चीन ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को प्रतिष्ठित पेकिंग यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए 1 नवंबर 2012 को प्रस्ताव दिया. इसके अलावा स्टूडेंट्स के साथ काम करने के लिए उनकी पसंद की लैब बनाने की भी पेशकश की. इस प्रस्ताव के तहत एपीजे अब्दुल कलाम को वर्ष में एक बार अपने पसंद का विषय पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया गया है. विषय कुछ भी हो सकता है, विज्ञान, प्रौद्योगिकी या फिर मानवता.
एपीजे अब्दुल कलाम
एपीजे अब्दुल कलाम ने वर्ष 2002 से भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में 2007 तक सेवा की. एपीजे अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है.
वर्ष 1962 में एपीजे अब्दुल कलाम को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में नियुक्त किया गया. डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय प्राप्त है. जुलाई 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया.
डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव रहे.
एपीजे अब्दुल कलाम को निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान किए गए:
• एपीजे अब्दुल कलाम को वर्ष 1997 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया.
• वर्ष 1998 में एपीजे अब्दुल कलाम को भारत सरकार द्वारा वीर सावरकर पुरस्कार मिला.
• वर्ष 1997 में एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रीय एकता हेतु इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
• एपीजे अब्दुल कलाम को वर्ष 1990 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.
• वर्ष 1981 में उन्हें पद्म भूषण प्रदान किया गया.
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