विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने 14 अप्रैल 2014 को वर्ष 2014 में विश्व व्यापार में वृद्धि की दर 4.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया. संगठन ने यह भी अनुमान व्यक्त किया कि वर्ष 2015 में इसमें थोड़ी सी तेजी आएगी और यह 5.3 फीसदी पर पहुंच जाएगा जो कि बीस वर्षों की औसर विकास दर है.
वर्ष 2014 की विकास दर पिछले वर्ष के 2.2 फीसदी से दुगुने से भी ज्यादा है. वर्ष 2013 में विकास दर में कमी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आयात की सपाट मांग और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सामान्य आयात वृद्धि की वजह से थी. निर्यात की तरफ से देखें तो, विकसित और विकासशील दोनों ही अर्थव्यवस्थाओँ में छोटी, सकारात्मक वृद्धि ही दर्ज की गई.
डब्ल्यूटीओ की ओर से जारी मुख्य तथ्य
• वर्ष 2014 के लिए व्यापार दर के पूर्वानुमान 4.7 फीसदी को अपडेट कर 4.5 फीसदी और 2015 के व्यापार दर में 5.3 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है.
• वर्ष 2013 में एशिया ने 4.2 फीसदी की दर से जीडीपी की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की, जो कि पिछले दो वर्षों की वृद्धि दर के लगभग बराबर था. इसके बाद अफ्रीका (3.8 फीसदी), मध्य पूर्व ( 3.0 फीसदी), दक्षिण और मध्य अमेरिका ( 3.0 फीसदी), स्वतंत्र देशों के राष्ट्रकुल (2.0 फीसदी), उत्तरी अमेरिका (1.8 फीसदी) और यूरोप (0.3 फीसदी) का स्थान है.
• वर्ष 2013 में विश्व उत्पाद व्यापार (वर्ल्ड मर्चेंडाइज ट्रेड) में मात्रा के लिहाज से 2.1 फीसदी की वृद्धि हुई जो पिछले वर्ष के 2.3 फीसदी के काफी करीब रहा.
• वित्तीय बाजार में अस्थिरता चालू खातों में बड़े घाटों के साथ उभरते बाजारों में महसूस किया गया. खासकर भारत में जहां दूसरी तीमाही में आउटपुट ग्रोथ 2.6 फीसदी था, तीसरी में यह 7.2 फीसदी हुआ और चौथे में यह 3.9 फीसदी हो गया.
• वर्ष 2013 में एशिया के निर्यात में किसी भी अन्य क्षेत्र के मुकाबले सबसे तेज वृद्धि हुई, इसमें 4.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद उत्तरी अमेरिका और यूरोप का स्थान रहा.
• एशिया में आयात सबसे तेजी से बढ़ा (4.4 फीसदी). इसके बाद मध्य पूर्व, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और यूरोप रहे. विदेशों से चीन की खरीददारी में लगभग 10 फीसदी का इजाफा हुआ.
• आर्थिक मंदी की वजह से भारत के आयात में 2.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की. साल 2013– 14 के निर्यात लक्ष्य़ 325 बिलियन डॉलर से भारत थोड़ा पीछे रहा और 312 मिलियन डॉलर का ही निर्यात कर सका.

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