सऊदी अरब ने 7 मार्च 2014 को मुस्लिम ब्रदरहुड, अल-नुसरा फ्रंट, हिजबुल्ला और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) जेहादी समूह को आतंकवादी समूह घोषित किया. इस कदम से आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर लगाम लगने और झगड़ों में लोगों के सीधे भाग लेने पर रोक लगने की आशा है. इस प्रतिबंध को आतंकवाद से लड़ने के किंगडम के संकल्प और सऊदी अरब में उसके सीधे परिणामों से बचने की कवायद बताया जा रहा है.
सऊदी के गृह मंत्री ने विदेशों में लड़ रहे अपने नागरिकों को एक 15 दिन का अल्टीमेटम भी जारी किया है कि वे या तो किंगडम लौट आएँ या फिर जेल जाने के लिए तैयार रहें.
इस घोषणा का अर्थ है कि मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थक रैलियों में भाग लेने, उसका साहित्य रखने और उसे मौखिक या लिखित रूप में सपोर्ट करने के आरोपी सऊदी अरब के नागरिकों को पकड़कर दंडित किया जा सकता है.
पिछली डिक्री के तहत विदेशों में संघर्षरत सऊदी अरब के नागरिकों को 20 वर्ष तक की जेल हो सकती है. यही सजा चरमपंथी धार्मिक और वैचारिक समूहों या घरेलू, क्षेत्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों के रूप में वर्गीकृत आतंकवादी समूहों पर भी लागू होती है.

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