हिमाचल प्रदेश में जैविक कृषि को बढ़ावा देने हेतु 7 सितंबर 2015 को तीन दिवसीय जैविक कृषि मेला का आयोजन शिमला में किया गया. जैविक कृषि मेले का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने किया. मेले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को जैविक उत्पादों के प्रति आकर्षित करना व किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके व स्वास्थ्य बेहतर बना रहे.
हिमाचल प्रदेश में 30110 हजार किसान जैविक खेती के लिए पंजीकृत किए जा चुके हैं. इनमें से 2040 किसानों को प्राधिकृत प्रमाणीकरण एजेंसियों ने मान्यता प्रदान की है. प्रदेश में 17847 हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के अंतर्गत लाया गया है.
विदित हो कि कृषि कचरे, गोबर या शहरी जैव कचरे में कार्बनिक पदार्थ होते हैं जिन्हें जैविक खाद के रूप में बदला जा सकता है. इसके लिए ऐसी तकनीक की आवश्यकता है जिससे कार्बनिक पदार्थो को कम से कम समय में कंपोस्ट खाद में बदला जा सके. इस क्रम में केंचुआ खाद लाभदायक है. जैविक खेती से पैदा उत्पादों के सेवन से स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है क्योंकि उनमें जहरीले रासायनिक पदार्थ नहीं होते हैं.
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