भारतीय रिजर्व बैंक ने सार्वजानिक व निजी क्षेत्रों के बैंकों को होम लोन की गणना सिर्फ आवास की कीमत के आधार पर ही करने का दिशा निर्देश जारी किया. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने नए दिशा निर्देश में बैंकों को स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस को मिलाकर होम लोन देने पर रोक लगा दी.
भारतीय रिजर्व बैंक ने विगत कुछ समय में आवास लोन में बढ़ते फंसे कर्जे (एनपीए) को देखते हुए यह निर्णय लिया है. आरबीआई के इस निर्णय से बैंक कम राशि बतौर होम लोन ग्राहकों को दे सकेंगे. साथ ही ग्राहकों पर इस निर्देश का असर यह होगा कि उन्हें घर खरीदने के लिए अब ज्यादा राशि अपने हिस्से से लगाना होगा.
ज्ञातव्य हो कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वर्ष 2011 में 20 लाख रुपये से ज्यादा कीमती आवास के होम लोन के लिए ऋण और घर की कीमत का अनुपात (लोन टू वैल्यू) अधिकतम 80 फीसदी तक किया था. जबकि 20 लाख रुपये तक की घर के लिए लोन टू वैल्यू 90 फीसदी तक किया था. नियम में स्पष्टता नहीं होने की वजह से बैंकों ने स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन शुल्क को भी घर की लागत में शामिल करना शुरू कर दिया था.
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