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निचली अदालतें या अधीनस्थ न्यायालय

जिला और अधीनस्थ अदालतें उच्च न्यायालय के तहत आती हैं। इन अदालतों का प्रशासन क्षेत्र भारत में जिला स्तर का होता है। जिला अदालत सभी अधीनस्थ अदालतों के उपर लेकिन उच्च न्यायालय के नीचे होती हैं। जिले का क्षेत्राधिकार जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पास होता है। सिविल मामलों का संचालन करते हुए जिला जज और आपराधिक केसों के न्याय का संचालन करते समय उसे सत्र न्यायाधीश कहा जाता है। राज्य सरकार द्वारा मेट्रोपोलिटन के रुप में मान्यता प्राप्त शहर या इलाके की जिला अदालत में अध्यक्षता करने पर उसे मेट्रोपोलिटन सत्र न्यायाधीश के तौर पर संबोधित किया जाता है।
Dec 24, 2015 16:53 IST
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भारत में न्यायिक प्रणाली

भारत सरकार की तीन स्वतंत्र शाखाएं हैं - कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। भारतीय न्यायिक प्रणाली अंग्रेजों ने औपनिवेशिक शासन के दौरान बनाई थी। इस प्रणाली को आम कानून व्यवस्था के रुप में जाना जाता है जिसमें न्यायाधीश अपने फैसलों, आदेशों और निर्णयों से कानून का विकास करते हैं। विभिन्न तरह की अदालतें देश में कई स्तर की न्यायपालिका बनाती हैं। भारत की शीर्ष अदालत नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट है और उसके नीचे विभिन्न राज्यों में हाई कोर्ट हैं। हाई कोर्ट के नीचे जिला अदालतें और उसकी अधीनस्थ अदालतें हैं जिन्हें निचली अदालत कहा जाता है।

भारतीय संविधान के छठे भाग में निचली अदालतों से संबंधित प्रावधान प्रदान दिए गये हैं। अनुच्छेद 233-237 अधीनस्थ अदालतों से संबंधित मामलों की देखरेख करते हैं।

न्यायालयों पर नियंत्रण –

यह ऊपरी पर्यवेक्षी और अपीलीय अधिकार क्षेत्र का एक विस्तार होता है। यह सर्वविदित है कि उच्च न्यायालय किसी भी अधीनस्थ अदालत या न्यायालय में लंबित मामलों को उस स्थिति में वापस ले सकता है जब कानून पर महत्वपूर्ण प्रश्न चिह्न लगने लगते हैं। इस मामले को निपटाकर या कानूनी प्रश्न का हल कर इसे उसी अदालत को वापस सौंप दिया जाता है। दूसरे मामले में उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तुत की गयी राय अधीनस्थ अदालत के लिए बाध्यकारी होती है। अधीनस्थ अदालतें सदस्यों की पदोन्नति तैनाती, छुट्टी के अनुदान, स्थानांतरण और अनुशासन से संबंधित मामलों को भी हल करती हैं। उच्च न्यायालय के पास इसके अधिकारियों और कर्मचारियों के ऊपर पूरा अधिकार और नियंत्रण होता है। इस संदर्भ में यह मुख्य न्यायाधीश द्वारा निर्देशित मुख्य न्यायाधीश या इस तरह के अन्य उच्च न्यायाधीशों के लिए के लिए अधिकारियों और सेवकों की नियुक्ति करती हैं। हालांकि राज्य के राज्यपाल को जब भी नियमों की आवश्यकता होती है तो ऐसे मामलों में निर्दिष्ट नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को कोर्ट से संलग्न नहीं करते हैं और राज्य न्यायालय लोक सेवा आयोग के साथ परामर्श के बाद ही अदालत से संबंध रखने वाले किसी भी कार्यालय में नियक्ति कर सकता है।

निचली अदालतों में जिला न्यायाधीश, शहर के सिविल न्यायालयों के न्यायाधीश, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट और राज्य न्यायिक सेवा के सदस्य शामिल होते हैं।

जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति

अनुच्छेद 233 के अनुसार,

1) किसी भी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों और पदोन्नति को उच्च न्यायालय के परामर्श से राज्य के संबंधित अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत राज्य के राज्यपाल द्वारा किया जाएगा।

2) एक व्यक्ति जो पहले से ही संघ या राज्य की सेवा में कार्यरत नहीं है वहीं जिला न्यायाधीश के पद नियुक्त होने का योग्य होता है लेकिन इसके लिए उसके पास एक वकील के रूप में कम से कम 7 साल का अनुभव होना चाहिए और नियुक्ति के लिए उसकी सिफारिश उच्च न्यायालय द्वारा सिफारिश की होनी चाहिए। निचली अदालतों पर नियंत्रण सामूहिक होता है और यह उच्च न्यायालय की जिम्मेदारी होती है क्योंकि वह राज्य में न्यायपालिका का प्रमुख होता है और उसका कुछ मामलों में निचली अदालतों पर प्रशासनिक नियंत्रण भी होता है।