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बौद्ध संगीतियाँ

पूर्वकालीन बौद्ध धर्म के वृतांत में छह बौद्ध संगीतियो का वर्णन किया गया है। यह वृतांत पहली सहस्राब्दी ई.पू. के आरम्भ से 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में ऐतिहासिक बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद की अवधि के दौरान विस्तारित हुआ था। यह एक सांप्रदायिक संघर्ष और संभावित फूट की भी कहानी है जिसके परिणामस्वरूप दो प्रमुख सम्प्रदायों, थेरवाद और महायान की उत्पत्ति हुई.
Sep 25, 2015 16:59 IST
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पूर्वकालीन बौद्ध धर्म के वृतांत में छह बौद्ध संगीतियो का वर्णन किया गया है। यह वृतांत पहली सहस्राब्दी ई.पू. के आरम्भ से 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में ऐतिहासिक बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद की अवधि के दौरान विस्तारित हुआ था। यह एक सांप्रदायिक संघर्ष और संभावित फूट की भी कहानी है जिसके परिणामस्वरूप दो प्रमुख सम्प्रदाय, थेरवाद और महायान की उत्पत्ति हुई।
कुल 6 बौद्ध संगीतियो का आयोजन किया गया था। छह बौद्ध संगीतियो का विवरण इस प्रकार है:

प्रथम संगीति

राजा अजातशत्रु के संरक्षण में 483 ईसा पूर्व के आसपास, बुद्ध के महापरीनिर्वाण के तुरंत बाद ही प्रथम संगीति का आयोजन किया गया था। इसकी अध्यक्षता एक भिक्षु महाकश्यप द्वारा की गयी थी। संगीति का आयोजन राजगृह के सत्तापणी गुफा में किया गया था। संगीति के आयोजन का उद्देश्य बुद्ध की शिक्षाओं (सुत्त) और नियमों का संरक्षण था। इस संगीति के दौरान, बुद्ध की शिक्षाओं को तीन पिटकों में विभाजित किया गया था। प्रथम संगीति के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 500 वरिष्ठ भिक्षुओं ने विनय-पिटक को ग्रहण किया था। सुत्त- पिटक को बुद्ध की सटीक शिक्षण के रूप में याद करने तथा आने वाली भिक्षुओं की पीढ़ियों के लिए याद रखा जाएगा।

दूसरी बौद्ध संगीति

दूसरी बौद्ध संगीति का आयोजन प्राचीन शहर वैशाली, जो अब नेपाल की सीमा से लगे उत्तर भारत के बिहार राज्य में स्थित है, में किया गया था। राजा कालाशोक के संरक्षण में इसकी अध्यक्षता सबाकमी ने की थी। इस संगीति का आयोजन 383 ई.पू. किया गया था। इसका आयोजन विशेष रूप से भिक्षुओं को पैसे संभालने की अनुमति देने के लिए मठवासी प्रथाओं पर चर्चा करने हेतु किया गया था।

तीसरी बौद्ध संगीति

तीसरी बौद्ध संगीति का आयोजन 250 ईसा पूर्व में राजा अशोक के संरक्षण के तहत पाटलिपुत्र में किया गया था। इसकी अध्यक्षता मोग्गलीपुत्त तिस्सा द्वारा की गयी थी । यह संगीति त्रिपिटक से सम्बंधित  टिप्पणियां को संग्रहीत करने के लिए आयोजित की गयी थी।

चौथी बौद्ध संगीति

चौथी बौद्ध संगीति 72वीं ईस्वी में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित की गयी थी। इसकी अध्यक्षता वासुमित्र ने की थी जबकि अश्वघोष उनका सहायक था। संगीति का आयोजन कुषाण साम्राज्य के कुषाण राजा कनिष्क के संरक्षण के तहत किया गया था। इस दौरान बौद्ध धर्म को दो संप्रदायों महायान और हीनयान में विभाजित हो गया था।

पांचवीं बौद्ध संगीति

पांचवीं बौद्ध संगीति राजा मिंडन के संरक्षण के तहत साल 1871 में मांडले, बर्मा में आयोजित की गयी थी। इसकी अध्यक्षता जगराभीवाम्सा, नरींधाभीधाजा और सुमंगलासामी द्वारा की गयी थी। इस संगीति के दौरान, 729 शिलाखंड बौद्ध शिक्षाओं के साथ उत्कीर्ण किये गये थे।

छठी बौद्ध संगीति

छठी बौद्ध संगीति का आयोजन 1954 में बर्मा के काबाऐ, यगूंन में किया गया था। इसका आयोजन बर्मा की सरकार के संरक्षण के तहत हुआ था और इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री यूनू द्वारा की गयी थी। संगीति का आयोजन बौद्ध धर्म के 2500 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था।