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महत्वपूर्ण राजपूत शासक

उपलब्ध कई स्रोतों के मुताबिक, राजपूत उत्तर भारत के हिंदू योद्धा थे. उनकी वीरगाथाओ से इतिहास के पन्ने भरे पड़े हैं. उन्होंने नवी सदी से लेकर 12 वीं सदी तक के काल में शासन कार्य किया था.
Aug 7, 2014 12:26 IST
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हम सभी राजपूत शब्द के बारे में भलीभांति जानते हैं. यह, केंद्रीय पश्चिमी और उत्तरी भारत के अनेक  पितृवंशीय समूहों में से एक थे. ये राजपुत भारत के अलावा पाकिस्तान के अनेक भागो में दिखाई देते हैं. भारत और पाकिस्तान के ये स्थल अनेक राजपुत शासकों की उपस्थिति के गवाह हैं.

उपलब्ध कई स्रोतों के मुताबिक, राजपूत उत्तर भारत के हिंदू योद्धा थे. उनकी वीरगाथाओ से इतिहास के पन्ने भरे पड़े हैं. उन्होंने नवी सदी से लेकर 12 वीं सदी तक के काल में शासन कार्य किया था. नीचे कुछ महत्वपूर्ण राजपूत शासको की सूची दी जा रही है.

बप्पा रावल- यह राजपूत शासक अपने धर्म और संस्कृति की मजबूती और गौरव के लिए जाना जाता था. यह गहलोत राजवंश का आठवाँ शासक था. मेवाड़ राज्य की स्थापना उसी के द्वारा 734 ईस्वी में की गयी थी जोकि वर्तमान में राजस्थान है. आठवीं सदी में उसने अरब आक्रमणकारियों के खिलाफ युद्ध लड़ा था और उन्हें पराजित किया था.

राणा कुम्भा-  यह महाराणा कुम्भकर्ण के नाम से भी चर्चित था. यह 1433 ईस्वी से लेकर 1468 ईस्वी के बीच मेवाड़ का शासक था. वह सिसोदिया वंश से सम्बंधित था. उसके पिता का नाम राणा मोकल और माता का नाम सोभाग्या देवी था. उसे गुजरात और दिल्ली के शासको के द्वारा हिन्दू-सुरत्न की उपाधि दी गयी थी.

पृथ्वी राज चौहान-  पृथ्वीराज चौहान(1168 ईस्वी-1192 ईस्वी) चौहान वंश का प्रमुख शासक था. उसने 12 वीं सदी के दौरान उत्तरी भारत के अधिकांश भागों पर अपना राज्य स्थापित किया था और शासन कार्य किया था. वह कथित तौर पर दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाला दूसरा अंतिम हिंदू राजा था. जब वह 1179 ईस्वी में सिंहासन पर बैठा तब वह पूरी तरह से नाबालिग था. उसने अपने राज्य पर शासन कार्य का संचालन अजमेर और दिल्ली के दोहरे राजधानियों किया.

शहरों के शहर दिल्ली में स्थित किला राय पिथौरा का नामकरण उसी के नाम पर किया गया था. वह वास्तव में एक बहादुर योद्धा था. उसने संयोगिता (कन्नौज राजा जय चन्द्र की बेटी) के साथ विवाह किया था जैसा की अनेको किताबो में पृथ्वी राज चौहान और संयोगिता कथा का रोमांचक वर्णन किया गया है. यह कथा भारत की सबसे रोमांचक कथाओ के रूप में वर्णित किया है.उनके पलायन वहाँ हर संभव पुस्तकों में उल्लेख किया है और भारत की सबसे रोमांटिक कहानियों में से एक के रूप में माना गया है.

राव मालदेव राठौर- राजपूतों के सबसे लोकप्रिय शासकों में से एक, राव राव मालदेव राठौर वंश से सम्बंधित थे. शेरशाह शूरी के शासन के समय, मारवाड़ में राठौर एक प्रसिद्ध नाम था. राव मालदेव ने अपने क्षेत्र का विस्तार से दिल्ली के कुछ सौ किलोमीटर की दूरी तक किया था.के लिए किया था.  

राणा सांगा- इसे संग्राम सिंह के नाम से भी जाना जाता है. वह 1509 ईस्वी से1527 ईस्वी तक मेवाड़ का शासक था. उसकी सत्ता का उत्थान दिल्ली साम्राज्य के पतन के पश्चात् शुरू हुआ. वह गुजरात और मालवा के मुस्लिम राजाओं के साथ भी युद्ध किया था. राणा सांगा और लोदी शासको के बीच संपन्न युद्ध अपने आप में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. उसे अपने राज्य मेवाड़ से बहुत प्यार था. उसने मेवाड़ को अत्यंत समृद्ध और सम्पन्न बनाया. साथ ही उत्कर्ष की चोटी तक पहुँचाया.

महाराणा प्रताप- राजपूत शासको में महाराणा प्रताप एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली शासक थे. वह बहादुर और महान राजपूत राजाओं में से एक थे. अपने कार्यों के कारण ही वह अविस्मरणीय थे. महाराणा प्रताप  ने अधिकांश राजपूत शासको को मुग़ल शासको के पंजों से मुक्त करवाया और अनेक क्षेत्रो पर विजय प्राप्त की. उन्होंने राजपूतो की इस परंपरा को नकार दिया जिसमे अनेक राजपूत शासको ने अपनी बेटियों को मुग़ल शासकों को सौप दिया था और वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया था. बाद के दिनों में उन्होंने उन लोगो से अपने वैवाहिक संबंधो को तोड़ लिया जिन्हे वे राजपूत नहीं मानते थे. उनकी मृत्यु 1597 ईस्वी में हुई थी. उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र अमर सिंह ने भी मुगलों से अनेको युद्ध किया. अमर सिंह ने मुगलों के अनेको आक्रमण का सामना किया और उनके विरुद्ध 17-18 युद्ध लड़ा.