Search

भारतीय बजट के बारे में 6 ऐसे प्रश्न जो आप नही जानते हैं

भारत के केंद्रीय बजट है को 'वार्षिक वित्तीय विवरण' के रूप में भी जाना जाता है| भारत में बजट का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में किया गया है| स्वतंत्र भारत के पहले केंद्रीय बजट को आर के शणमुखम चेट्टी द्वारा 26,1947 को पेश किया गया था| पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ही ऐसे दो वित्तमंत्री रहे हैं जिन्होंने लगातार 5-5 बार बजट पेश किया है |
Jan 13, 2017 16:30 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत केन्द्रीय बजट का प्रावधान किया गया है। केन्द्रीय बजट में आगामी वित्त वर्ष (1 अप्रैल-31 मार्च) के लिए सरकार द्वारा निर्धारित वित्तीय क्रियाकलापों का विवरण रहता है। जब बजट व्यय उसके राजस्व के बराबर होता है तो उसे “संतुलित बजट” कहा जाता है, लेकिन जब बजट व्यय, बजट राजस्व से अधिक रहता है तो इसे “घाटे का बजट” कहा जाता है| आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में अभी तक पेश किए गए अधिकांश बजट “घाटे के बजट” ही थे| आम तौर पर भारत के केन्द्रीय बजट फरवरी के अंत में प्रस्तुत किये जाते हैं । भारत में सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व वित्तमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है, उन्होंने 10 बार बजट पेश किया था|

इस लेख में हम भारतीय बजट से संबंधित 6 अनूठे प्रश्नों का उत्तर दे रहे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है|

प्रश्न 1. यदि हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है तो संसद में बजट अंग्रेजी में ही क्यों प्रस्तुत किया जाता है?

उत्तर. सबसे पहले हम आपको बताना चाहते हैं कि हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है, बल्कि यह संविधान में वर्णित कई आधिकारिक भाषाओं में से एक है। भारत के विभिन्न राज्यों में संविधान में वर्णित 22 आधिकारिक भाषाओं (असमिया, बांग्ला, कन्नड़, कश्मीरी, मैथिली, मलयालम, मराठी, पंजाबी, संस्कृत और उर्दू आदि) के अलावा अंग्रेजी भाषा का भी प्रयोग किया जाता है| प्रत्येक भारतीय राज्य को अपनी आधिकारिक भाषा चुनने की स्वतंत्रता है। चूंकि सांसद अलग-अलग राज्यों से चुनकर आते हैं जहां कि आधिकारिक भाषा अलग-अलग होती है लेकिन अधिकांश सांसद अंग्रेजी भाषा जानते हैं और उन्हें अंग्रेजी भाषा में बात करने में सहूलियत होती है जिसके कारण बजट अंग्रेजी भाषा में पेश किया जाता है|

इसके पीछे एक कारण यह भी है कि सांसदों को उपलब्ध ईयरफोन में अंग्रेजी भाषा को हिन्दी भाषा में और हिन्दी भाषा को अंग्रेजी भाषा में अनुवाद करने की सुविधा होती है| हम आपको यह भी बताना चाहते हैं कि आम लोगों के बीच यह गलतफहमी है कि बजट “हिन्दी भाषा” में तैयार नहीं किया जाता है| वास्तव में अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ हिन्दी भाषा में भी बजट तैयार करने की परम्परा 1955-56 से ही शुरू हो गई थी|

headphones in parliament

Image source:The Caravan

प्रश्न  2. संसद में अब तक कितने बजट पेश हुए हैं?

उत्तर. भारतीय संसद में अब तक 86 बार बजट पेश हुए हैं जिनमें से 69 सामान्य वार्षिक बजट, 13 अंतरिम बजट तथा 4 विशेष बजटीय प्रस्ताव (जिसे मिनी बजट भी कहा जाता है) थे| भारत में पहला मिनी बजट 30 नवम्बर 1956 को टी. टी. कृष्णामचारी द्वारा पेश किया गया था| आगामी आम बजट 2017 भारत का 87वां बजट होगा|

(T. T. Krishnamachari going to present Union Budget)

T T Krishnamachari

Image source:Google image

प्रश्न 3. संसद में बजट पेश करते समय वित्त मंत्री अपने साथ ‘लाल रंग’ का ही बैग क्यों लाते हैं?

उत्तर. बजट पेश करने के लिए लाल रंग वाला बैग लाने की परंपरा 1860 में शुरू हुई थी जब “विलियम एवर्ट ग्लैडस्टोन” ब्रिटिश राजकोष के चांसलर थे| वे अपने लंबे-लंबे बजट भाषण के लिए प्रसिद्ध थे और उनका बजट भाषण लगभग 5 से 6 घंटे तक चलता था। इस तरह के लंबे बजट भाषण के लिए आवश्यक फाइलों और दस्तावेजों को सही ढ़ंग से संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) तक ले जाने के लिए उन्हें एक बॉक्स/बैग की जरूरत महसूस हुई| अतः ब्रिटेन की तत्कालीन महारानी ने उन्हें ‘लाल रंग’ का चमड़े का एक बैग दिया जिसे "बजट बॉक्स" कहा गया| उसके बाद से ही सभी वित्तमंत्रियों द्वारा बजट पेश करते समय लाल रंग वाले बैग लाने की परम्परा की शुरूआत हुई जो आज तक चली आ रही है|

Budget Box

Image source:Guruprasad's Portal

प्रश्न 4. भारत में हमेशा घाटे का बजट ही क्यों पेश किया जाता है?

उत्तर.  भारत एक कल्याणकारी राज्य है। यहां सरकार का मुख्य उद्येश्य हमेशा लोगों के कल्याण को बढ़ाना होता है लेकिन भारत सरकार के पास कल्याणकारी योजनाओं को शुरू करने और अच्छे बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए प्रचुर मात्रा में पैसा नहीं है ऐसी हालत में सरकार को घाटे की वित्त व्यवस्था (deficit financing) का सहारा लेना पड़ता है| जब सरकार का बजट खर्च उसकी बजट आय से अधिक हो जाता है तो ऐसे बजट को घाटे का बजट कहा जाता है| संतुलित बजट की हालत में बजट आय, बजट खर्च के बराबर होती है| भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2016 में सकल घरेलू उत्पाद का 3.9% है और यह उम्मीद है कि यह वित्तीय वर्ष 2017 में यह 3.5% से नीचे आ जाएगा| इस प्रकार सीमित आय के साधनों लेकिन अनिवार्य खर्च के कारण सरकार को हर साल घाटे का बजट बनाना पड़ता है |

Union Budget 2016-2017

image source:ClearIAS

प्रश्न 5. बजट को केंद्रीय बजट क्यों कहा जाता है?

उत्तर:- भारत राज्यों का एक संघ है। किसी भी संघ में दो मुख्य संस्थाएं होती हैं: संघीय राज्य और केंद्र हैं। भारत मजबूत केंद्र वाला ‘राज्यों का संघ’ है | भारत के संविधान में केंद्र को ‘राज्यों का संघ’ कहा गया है| इसी कारण संघ के बजट को "केंद्रीय बजट" (union budget)कहा जाता है।

प्रश्न 6. संसद में पेश किया जाने वाला बजट पेपर से ही क्यों पढ़ा जाता है क्या इसे डिजिटल नही बनाया जा सकता है?

उत्तर. फ़िलहाल भारत सरकार डिजिटल बजट पेश करने के बारे में नहीं सोच रही है| ऐसा कुछ सुरक्षा कारणों की वजहों से भी हो सकता है क्योंकि यदि डिजिटल बजट साइबर हैकिंग का शिकार हो गया तो भारतीय अर्थव्यवस्था बर्बादी की कगार पर भी पहुंचाई जा सकती है। इसलिए बजट को सफेद कागज पर काली स्याही से छापा जाता है (ताकि स्पष्ट दिखायी दे)| यहाँ पर यह बात बताने योग्य है कि भारत में उत्तराखंड ही अकेला राज्य है जिसने सबसे पहले डिजिटल बजट पेश किया है|

Jagranjosh

image source: Nasscom

रेल बजट को आम बजट में जोड़ने से क्या फायदा होगा?