भारत में एशिया का सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा कहां बन रहा है?

Jul 5, 2021, 17:10 IST

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'प्रोजेक्ट सीबर्ड' ' के दूसरे चरण के तहत जारी ढांचागत निर्माण के विकास की प्रगति की समीक्षा करने के लिए कर्नाटक में कारवार नौसेना बेस का दौरा किया. 

Seabird Project
Seabird Project

हाल ही में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह के साथ नौसैनिक बुनियादी ढांचा परियोजना कारवार नेवल बेस पर 'प्रोजेक्ट सीबर्ड' फेज II-ए साइट पर चल रहे कार्यों की समीक्षा की, जिसका उद्देश्य बेड़े का समर्थन और युद्धपोतों का रखरखाव प्रदान करना है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रोजेक्ट सीबर्ड' के तहत यहां विकसित किया जा रहा नौसैनिक अड्डा एशिया का सबसे बड़ा होना चाहिए और जरूरत पड़ने पर वह इसके लिए बजट आवंटन बढ़ाने की कोशिश भी करेंगे.

राजनाथ सिंह ने परियोजना पर काम कर रहे ठेकेदारों और इंजीनियरों से बातचीत की. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कारवार नौसैनिक अड्डा सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता को और मजबूत करेगा और व्यापार, अर्थव्यवस्था और मानवीय सहायता कार्यों को बढ़ाने में मदद करेगा.

आइये अब प्रोजेक्ट सीबर्ड-फेज II के बारे में अध्ययन करते हैं 

प्रोजेक्ट सीबर्ड में लगभग 11,169 एकड़ के क्षेत्र में एक नौसैनिक अड्डे का निर्माण शामिल है.

फेज I में एक गहरे समुद्र में बंदरगाह, ब्रेकवाटर ड्रेजिंग (breakwaters dredging), एक टाउनशिप, एक नौसेना अस्पताल, एक डॉकयार्ड अपलिफ्ट सेंटर और एक जहाज लिफ्ट का निर्माण शामिल था. 2005 में इसे पूरा किया गया था.

प्रोजेक्ट सीबर्ड के फेज- II को 2012 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी द्वारा मंजूरी दी गई थी. इसमें अतिरिक्त युद्धपोतों को रखने और अन्य योजनाओं के साथ एक नया नेवल एयर स्टेशन स्थापित करने के लिए सुविधाओं का विस्तार करने की परिकल्पना की गई है.

वर्तमान में तीसरा सबसे बड़ा भारतीय नौसैनिक अड्डा आईएनएस कदंबा (INS Kadamba)  है, और विस्तार फेज II के पूरा होने के बाद पूर्वी गोलार्ध में सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा बनने की उम्मीद है.

नौसेना का अकेला विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य कारवार में स्थित है. बेस में देश की पहली सीलिफ्ट सुविधा, एक अद्वितीय "शिपलिफ्ट" और डॉकिंग और अन-डॉकिंग जहाजों और पनडुब्बियों के लिए स्थानांतरण प्रणाली भी है. इस परियोजना में कई तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियां भी शामिल हैं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा नौसेना देश की रक्षा के अपने कर्तव्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही है, जो देश 7500 किलोमीटर से अधिक के अपने समुद्र तट, लगभग 1300 द्वीपों और 2.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर के आर्थिक क्षेत्र के माध्यम से दुनिया के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

भारतीय नौसेना में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों के बारे में

राजनाथ सिंह के अनुसार नौसेना के आधुनिकीकरण बजट का दो तिहाई से अधिक पिछले पांच वित्तीय वर्षों में स्वदेशी खरीद पर खर्च किया गया है.

यहीं आपको बता दें कि 48 जहाजों और पनडुब्बियों में से 46 को स्वदेशी निर्माण के माध्यम से नौसेना में शामिल किया जा रहा है.

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत को नौसेना के आत्मनिर्भरता के प्रयासों का जीता जागता उदाहरण बताया.

प्रोजेक्ट 75 (I) में अत्याधुनिक एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम (Air Independent Propulsion system) से लैस पनडुब्बियों के स्वदेशी निर्माण की परिकल्पना की गई है, जिसकी अनुमानित लागत Rs. 43,000 करोड़ है.

नौसेना 'SAGAR' (Security & Growth for All in Region) पर अपने ध्यान के साथ अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ भारत के संबंधों को लगातार मजबूत कर रही है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि "प्रभावित देशों से फंसे भारतीय नागरिकों को बचाने से लेकर विदेशों से ऑक्सीजन सिलेंडर सहित महत्वपूर्ण उपकरणों को लाने ले जाने तक, भारतीय नौसेना ने COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में अथक परिश्रम किया है. नौसेना ने विभिन्न देशों को सहायता भी प्रदान की".

Source: pib,thehindu

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Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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FAQs

  • कारवार (Karwar) कहाँ स्थित है?
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    आईएनएस कदंबा (INS Kadamba) कर्नाटक में कारवार के पास बिनागा खाड़ी में स्थित है. यह पश्चिमी घाट और पश्चिम में अरब सागर के बीच में स्थित है.
  • प्रोजेक्ट सी बर्ड के तहत भारत का सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा कौन सा है?
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    भारत के लिए सबसे बड़ी नौसैनिक बुनियादी ढांचा परियोजना, इसमें भारत के पश्चिमी तट पर कारवार में एक नौसैनिक अड्डे का निर्माण शामिल है. पूरा होने पर, यह भारतीय नौसेना को पश्चिमी तट पर अपना सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा और स्वेज नहर के पूर्व में सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा प्रदान करेगा.
  • कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी द्वारा प्रोजेक्ट सीबर्ड के दूसरे चरण को कब मंजूरी दी गई?
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    प्रोजेक्ट सीबर्ड के दूसरे चरण को 2012 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी द्वारा मंजूरी दी गई थी.

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