जैव प्रौद्योगिकी से हमारे जीवन और स्वास्थ्य को सुधारने में मदद मिलती हैं. इस तकनीक की मदद से, हम रोगों से लड़ने में सक्षम हो पाते हैं, बच्चों के जीवन को बचा पाते हैं, भोजन की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और किसान फसलों की संकर प्रजातियों का उत्पादन करते हैं.
आजकल परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों में काफी बदलाव हो रहे है और इसलिए हमें अपनी तैयारी की पद्धति में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है. ये विवरणात्मक प्रश्न न केवल जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित आपके ज्ञान को बढ़ाएंगे हैं, बल्कि परीक्षाओं की तैयारी में भी आपकी सहायता करेंगें .
1. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (Monoclonal antibody) प्रौद्योगिकी क्या है?
Ans. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (एमएबी) कोशिकाओं के एक क्लोन से बनती हैं. यह सजातीय (homogeneous) होती है और निदानकारी (diagnostic) परिक्षण और अनुसंधान में अत्यधिक उपयोगी हैं. कोहलर और मिल्सटीन ने एमएबी के उत्पादन के लिए हाइब्रिडोमा नामक तकनीक विकसित की थी.
हाइब्रिडोमा हाइब्रिड कोशिका है जोकि बी कोशिकाओं के संलयन से मायलोमा कोशिकाओं जैसे कि ट्यूमर सेल के साथ बनती है. इस तकनीक का मुख्य सिद्धांत यह है कि इस कोशिका में एंटीबॉडी का उत्पादन होता है जो बी कोशिकाओं से प्राप्त होता है और साथ ही यह मायलोमा कोशिकाओं से प्राप्त गुणवत्ता को भी विभाजित कर सकता है. यह तकनीक दोनों कोशिकाओं के वांछित गुणों को जोड़कर बड़े पैमाने पर एंटीबॉडी उत्पादन (मोनोक्लोनल एंटीबॉडी) को सुनिश्चित करती है.
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2. पुनः संयोजक (Recombinant) डीएनए प्रौद्योगिकी (rDNA) क्या है?
Ans. जब एक नए जीव में आनुवंशिक पदार्थ को दूसरे जीव में अन्तर्स्थापित किया जाता है तब इन दो अलग-अलग प्रजातियों के दो डीएनए अणु एक साथ जुड़कर एक नया आनुवंशिक पदार्थ बनाते हैं जोकि दवा, कृषि, उद्योग और विज्ञान में सहायक होते है. इस तकनीक को ही पुनः संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी कहते है.
जीन के बिना यह प्रकिया संभव नहीं है, आनुवंशिक प्रयोगशाला का मुख्य कार्य उनके लक्षणों को पहचान कर जीन को अलग-अलग करना होता है. इसलिए, rDNA प्रौद्योगिकी ने जीन या डीएनए के किसी भी अन्य खंड को अलग करके न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम को निर्धारित करना संभव बना दिया है. जीन के इस अध्ययन की सहायता से, इसकी नकल अर्थात इसके जैसा एक और जीन एवं उत्परिवर्तन को आसानी से समझा जा सकता है.
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3. एंटिसेंस तकनीक (Antisense technology) का क्या मतलब है?
Ans. एंटीसेन्स दवाओं की खोज के लिए एक प्रयोगात्मक मंच है, यह कैंसर, वायरल और परजीवी संक्रमण जैसी विकारों के लिए वैकल्पिक उपचार प्रदान करता है. एंटीसेन्स आरएनए (RNA) एक सिंगल स्ट्रैंड आरएनए है, जो मैसेंजर आरएनए (एमआरएनए) का प्रशंसपूर्ण है और सेल (cell) के भीतर ही होता है।
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जीका (ZIKA) वायरस क्या है और यह कैसे फैलता हैं?
बीमारी के दौरान, डीएनए, आरएनए, आदि जैसे न्यूक्लिक एसिड की एक स्ट्रैंड को संश्लेषित करना संभव हो सकता है. इस तकनीक की मदद से, यह जीन द्वारा निर्मित एमआरएनए को बाँध देता है और इसे निष्क्रिय कर देता है, जिसकी वजह से प्रभावी जीन का काम करना बंद हो जाता है.
4. जैव प्रौद्योगिकी के क्या लाभ है?
Ans. यह तकनीक कीटनाशक प्रतिरोधों के लिए पौधों की मदद करती है, पौधों को कम तापमान, सूखा, मिट्टी में नमक आदि जैसी तनावपूर्ण परिस्थितियों से बचाती है, दवाओं की मदद से जानवर रोगों के खिलाफ लड़ पाते है और अन्य दवाइयां उत्पादन करने के लिए भी इस तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
5. इलेक्ट्रोफोरेसीस (Electrophoresis) क्या है?
Ans. इलेक्ट्रोफोरिसिस को कैटाफोरिसिस के रूप में भी जाना जाता है जोकि विद्युत चार्ज के अस्तित्व को दर्शाता है. इस पद्धति का उपयोग आणविक जीव विज्ञान और चिकित्सा में किया जाता है और इसे विद्युत क्षेत्र के प्रभाव के तहत कोलाईडल (colloidal) कणों की आवाजाही के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है. जब कोलाईडल कण विपरीत रूप से चार्ज किए गए इलेक्ट्रोड तक पहुंचते हैं तो वह उन्हें निष्प्रभावी और जमा देते हैं.
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6. पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी (Environmental Biotechnology ) क्या होता है?
Ans. यह जैव प्रौद्योगिकी की एक शाखा है जो प्रदूषण को नियंत्रित करने, ईंधन के रूप में बायोमास का उत्पादन, बायोरेमेडिएशन (bioremediation) की मदद से पर्यावरण को साफ करने, अपशिष्ट जल उपचार आदि को बेहतर बनाने में मदद करता है.
7. टिशू कल्चर (Tissue culture) क्या है?
Ans. टिशू कल्चर एक माध्यम में ऊतकों या कोशिकाओं का एक कृत्रिम विकास है जो जीवित ऊतक या जीव से प्राप्त होता है या हम यह कह सकते हैं कि जिस पद्धति में पौधों या जानवरों के ऊतकों को एक कृत्रिम वातावरण में पेश किया जाता है जहां वे कार्य करते हैं या बढ़ते हैं, उसे टिशू कल्चर कहा जाता है.
Source: www.passel.unl.edu.com
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