UNESCO की विश्व विरासत स्थल की लिस्ट उठाकर देखें, तो हमें इसमें भारत के कुल 44 स्थल देखने को मिलते हैं। इनमें 36 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल है। वहीं, उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित आगरा किला 1983 में चुने गए पांच विश्व विरासत स्थलों की लिस्ट में शामिल रहा है। यह किला अपनी मजबूत किलेबंदी, मुगलों के खजाने और उत्तर भारत पर नियंत्रण के लिए जाना जाता था। 1857 की क्रांति में इस किले का उपयोग बंकर के रूप में किया गया था। समय के साथ यहां कई शासकों का शासन रहा, इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
बादलगढ़ के रूप में था प्रसिद्ध
जिस जगह पर आगरा किला है, वहां कभी राजपूत शासक रहे राजा बादल सिंह का एक किला हुआ करता था। यह एक कच्चा किला था, जिस पर 11वीं शताब्दी में गजनी के महमूद ने आक्रमण किया था।
लोदी राजवंश का रहा राज
आगरा शहर को दिल्ली सल्तनत के सिकंदर लोदी ने बसाया था। उसका शासनकाल 1504 से 1517 तक रहा। वहीं, इब्राहिम लोदी(1517-1526) तक पानीपत की लड़ाई से पहले यही रहा था।
1526 में बाबर ने किया कब्जा
साल 1526 में बाबर ने इब्राहिम लोदी को पानीपत की लड़ाई में हरा दिया और इस किले पर नियंत्रण कर लिया। वहीं, इस किले में बाबर के बेटे हुमायूं का राज्याभिषेक भी हुआ था।
1540 में शेरशाह सूरी ने किया कब्जा
सूरी राजवंश के शेरशाह सूरी ने हुमायूं को हराने के बाद इस किले पर कब्जा कर लिया था और इसे सैन्य छावनी के रूप में इस्तेमाल किया।
अकबर ने बनवाया किला
मुगल सम्राट अकबर ने 1565 में पुराने किले को तोड़कर नया किला बनवाया। वहीं, जहांगीर और शाहजहां(1605 से 1658) तक किले में संगमरमर वाली कई इमारतों का निर्माण करवाया गया।
1761 में जाटों का हुआ राज
महाराजा सूरजमल ने 1761 में किले पर हमला किया और इस किले को जीता। राजा के बाद उनके पुत्र जवाहर सिंह और इनके बाद राजा रतन सिंह का यहां कब्जा रहा। राजा रतन सिंह की हवेली आज भी यहां मौजूद है।
1774 में नजफ खां ने वापस लिया कब्जा
मुगलों की ओर से 1774 में नजफ खां लड़े और जाटों से इस किले को वापस लिया।
1785 में मराठों के हाथ में रहा किला
1785 में ग्वालियर के महादजी दौलतराम सिंधिया ने इस किले को मुगलों से जीता और 1803 तक यहां राज किया। उस समय यहां फ्रांसीसी सेना भी मौजूद रहती थी।
1803 में अंग्रेजों ने जीता किला
साल 1803 में अंग्रेजों ने दिल्ली जीती और फिर आगरा के लिए रूख किया। ब्रिटिश सेना के अधिकारी जैर्राड लेक और इंजीनियर जॉन रसेल के नेतृत्व में किले पर कई दिनों तक गोलाबारी की गई। इस दौरन हाथी गेट के पास किले की कमजोर दीवार तोड़ी गई। वहीं, एक गोला किले के अंदर मौजूद बारूद के ढेर पर गिरा, जिससे किले में विस्फोट हुआ और किला अंग्रेजों के हाथ में चला गया।
1947 तक किया राज
अंग्रेजों ने यहां 1947 तक राज किया और इस दौरान यहां अंग्रेजी सैनिकों के लिए कई बैरक बनवाए।
1947 से भारत सरकार के अधीन
देश आजाद होने के बाद किला भारत सरकार के अधीन हो गया। वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण(ASI) के अधीन आता है।
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