भारत का इकलौता किला, जिसका नाम सप्ताह के दिन के नाम पर है, जानें यहां
भारत में आपने अलग-अलग किलों और उनके इतिहास के बारे में पढ़ा होगा। हालांकि, क्या आप भारत के इकलौते ऐसे किले के बारे में जानते हैं, जिसका नाम सप्ताह के एक दिन के ऊपर रखा गया है। कौन-सा है यह किला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें अतीत के पन्नों में देश का गौरवशाली इतिहास पढ़ने को मिलता है। इस कड़ी में भारत में अलग-अलग शासकों द्वारा निवास व सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े किलों का निर्माण करवाया गया था।
आपने भारत के बहुत-से किलों और उनके इतिहास के बारे में पढ़ा होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक किला ऐसा भी है, जिसका नाम सप्ताह के एक दिन के ऊपर रखा गया है। कौन-सा है यह किला और क्या है इसके नाम के पीछे की कहानी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
कौन-सा किला सप्ताह के दिन के नाम पर है
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि भारत में वह किला कौन-सा है, जिसका नाम सप्ताह के दिन के नाम पर है। आपको बता दें कि यह शनिवारवाड़ा है। यह किला महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है, जो कि कभी मराठाओं के पेशवा यानि कि प्रधानमंत्री का निवास स्थान हुआ करता था।
क्यों कहा जाता है शनिवारवाड़ा
शनिवारवाड़ा किले का निर्माण पेशवा बाजीराव प्रथम द्वारा करवाया गया था। उन्होंने 10 जनवरी, 1730 को इस किले की नींव रखी थी। जब यह किला बनकर तैयार हुआ, तो इसका गृह प्रवेश 22 जनवरी, 1732 को किया गया। इस दिन शनिवार का दिन था। मराठाओं में शनिवार को बहुत शुभ माना जाता है। ऐसे में इस महल को शनिवारवाड़ा ही कहा गया था।
5 दरवाजों के लिए जाना जाता है शनिवारवाड़ा
मराठाओं का शनिवारवाड़ा अपने 5 प्रमुख दरवाजों के लिए जाना जाता है।
दिल्ली दरवाजा
यह दरवाजा उत्तर की ओर खुलता है। इस दरवाजे पर बड़ी संख्या में सैनिक खड़े हो सकते हैं। किले के दरवाजे पर बड़ी-बड़ी नुकीली कीलें लगी हुई हैं, जो कि हाथियों के हमले से बचने के लिए लगाई गई थीं।
मस्तानी दरवाजा
इस दरवाजे को अली बहादुर दरवाजा भी कहा जाता था। हालांकि, पेशवा बाजीराव प्रथम की दूसरी पत्नी मस्तानी पुणे जाने के लिए इसी दरवाजे का उपयोग करती थीं। ऐसे में इस दरवाजे को मस्तानी दरवाजा भी कहा गया है।
खिड़की दरवाजा
किले का खिड़की दरवाजा पूर्व दिशा की ओर खुलता है। इस दरवाजे में एक छोटी खिड़की बनी हुई थी, जिससे बाहर आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जाती थी।
गणेश दरवाजा
यह दरवाजा दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर स्थित है, जो कि गणेश महल के नजदीक है। मराठा किसी उत्सव या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इस दरवाजे का उपयोग करते थे। आज भी इस स्थान को बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
नारायण दरवाजा
नारायण दरवाजे को जम्भुल दरवाजा भी कहा जाता है। इसके पीछे इतिहास की एक दुखद घटना जुड़ी हुई है। साल 1773 में युवा पेशवा नारायण राव को उनके सुरक्षा गार्डों द्वारा मारा गया था, तो उनके शरीर को इस दरवाजे से ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था। इससे पहले इस दरवाजे का उपयोग दासियों और नौकरों के प्रवेश और निकास के लिए होता था।
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