क्रिकेट मैचों में गेंदबाजों की गति को कैसे मापा जाता है

क्रिकेट के खेल में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों का एक समान महत्व है| लेकिन इन सब में गेंदबाजी को सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यह खेल में गति लाता है| क्रिकेट के खेल में एक से बढ़कर एक तेज गेंदबाज देखने को मिले हैं और उन सभी गेंदबाजों ने गेंद को ज्यादा से ज्यादा गति प्रदान करने की भरसक कोशिश की है| अब सवाल यह है कि क्रिकेट के खेल में गेंदबाजों की गति को कैसे मापा जाता है? इस लेख में हम जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किन-किन तकनीकों के माध्यम से क्रिकेट के खेल में गेंदबाजों की गति को मापा जाता है?
Mar 25, 2019 12:57 IST
    Hawk Eye

    क्रिकेट को जेंटल मेन का खेल कहा जाता है. क्रिकेट के खेल में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों का एक समान महत्व होता है. किसी भी गेंदबाज को खतरनाक बनाती है उसकी लाइन और लेंथ के साथ साथ गेंद की स्पीड. शोएब अख्तर, ब्रेट ली, शेन बांड, मैल्कम मार्शल एवं जे. थॉमसन को अब तक का सबसे तेज गेंदबाज माना जाता है.

    अब सवाल यह है कि क्रिकेट के खेल में गेंदबाजों की गति को कैसे मापा जाता है? इस लेख में हम जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किन-किन तकनीकों के माध्यम से क्रिकेट के खेल में गेंदबाजों की गति को मापा जाता है?

    क्रिकेट के खेल में गेंदबाजों की गति को मापने के लिए मुख्यतः दो तरीकों का प्रयोग किया जाता है:

    1. रडार गन या स्पीड गन (Radar Gun)
    रडार गन या स्पीड गन के माध्यम से गेंद की गति को मापने की क्रिया चलती कार की गति को मापने के समान है। इसकी खोज 1947 में “जॉन बाकर” ने किया था| यह स्पीड गन डॉप्लर प्रभाव के सिद्धांत पर कार्य करता है| इस स्पीड गन में एक रिसीवर और एक ट्रांसमीटर लगा होता है। इस स्पीड गन को साइटस्क्रीन के पास एक ऊँचे खम्भे पर लगाया जाता है, जहाँ से स्पीड गन पिच की दिशा में एक सूक्ष्म तरंग भेजता है और पिच पर किसी भी वस्तु की गतिविधि की सूचना प्राप्त कर लेता है|

    स्पीड गन के माध्यम से प्राप्त सूचना को एक इमेज प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर में डाला जाता है जो पिच पर अन्य वस्तुओं के बीच गेंद की शिनाख्त करता है और गेंद की गति बताता है|
    speed gun
    Image source: www.irsaindiana.org

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    रडार गन या स्पीड गन तकनीक के प्रमुख लाभ निम्न हैं:
    1. रडार गन या स्पीड गन के माध्यम से गेंद की गति की सटीक जानकारी मिलती है क्योंकि यह घूमती हुई गेंद की गति को बिना किसी त्रुटि के मापता है।

    2. ज्योंही गेंद रडार गन के सामने से गुजरता है वह तत्क्षण ही उसकी गति को रिकॉर्ड कर लेता है| यही कारण है कि किसी भी क्रिकेट मैच में जैसे ही गेंदबाज गेंद फेंकता है तो उसके गति का विवरण स्क्रीन पर दिखाया जाता है।
    नोट: रडार गन या स्पीड गन तकनीक का प्रयोग टेनिस में खिलाड़ियों के सर्विस की गति को मापने के लिए प्रयोग किया गया था जबकि क्रिकेट में इस तकनीक का प्रयोग सर्वप्रथम 1999 में किया गया था|

    2. हॉक आई (Hawk Eye)
    हॉक आई एक कम्प्यूटर प्रणाली है जिसे टेनिस, क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य विभिन्न खेलों में आधिकारिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक के जन्मदाता डॉ. पॉल हॉकिन्स नामक ब्रिटिश नागरिक हैं। क्रिकेट में सर्वप्रथम इस तकनीक का प्रयोग वर्ष 2001 में किया गया था।

    हॉक आई एक अचूक तकनीक है, क्योंकि यह 5 मिलीमीटर की सीमा के भीतर भी सही गणना करता है|  जिसके कारण इसे विभिन्न खेलों में सही निर्णय के लिए विकल्प के रूप में चुना गया है| हॉक आई एक ऐसा तकनीक है जो गेंद की गति को उसी प्रकार मापता है जैसा वह फेंका जाता है| इस तकनीक को मुख्य रूप से मिसाइल पर नजर रखने के लिए और मस्तिष्क की सर्जरी के लिए बनाया गया था।
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    इस तकनीक में छह कैमरों के माध्यम से आंकड़े प्राप्त किए जाते हैं| इस तकनीक के माध्यम से गेंदबाज के हाथ से गेंद के निकलने से लेकर डैड बॉल घोषित होने तक के आंकड़ों का उपयोग किया जाता है| इसके बाद यह तकनीक 3D छवि के रूप में गेंद की गति एवं दिशा की जानकारी प्रस्तुत करता है।

    यह तकनीक दर्शकों को गेंदबाजों के हाथ से गेंद के छूटने से लेकर स्टंप की ओर जाते समय गेंद की दिशा और लंबाई को समझने में स्पष्ट रूप से मदद करता है| इसके अलावा यह तकनीक एलबीडब्ल्यू से संबंधित निर्णय लेने में तीसरे अंपायर की मदद करता है क्योंकि इस तकनीक के माध्यम से इस बात की जानकारी मिलती है कि क्या गेंद वास्तव में स्टंप की लाइन में था जब वह बल्लेबाज के पैड से टकराया था|
    hawk eye
    Image source: Hawk-Eye Innovations

    हॉक आई तकनीक के प्रमुख लाभ निम्न हैं:

    1. इस तकनीक के माध्यम से गेंद की सटीक गति का आकलन होता है क्योंकि हॉक आई तकनीक द्वारा गेंद की दिशा को स्पष्ट रूप से देखा जाता है|

    2. इस तकनीक के माध्यम से गेंद की दिशा और स्विंग को एक साथ मापा जाता है|

    3. इस तकनीक के माध्यम से प्रामाणिकता के साथ यह कहा जा सकता है कि गेंद स्टंप पर लग रही है या नहीं|

    4. इसके अलावा यह तकनीक गेंद की वैधानिकता को भी सुनिश्चित करता है|

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