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भारत के महान्यायवादियों की सूची

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी के संबन्धित है. भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है. वह सभी कानूनी मामलों में सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार होता है। राष्ट्रपति, महान्यायवादी की नियुक्त करता है और नियमानुसार वह 3 वर्ष तक अपने पद पर रहता है.
Dec 20, 2017 04:10 IST
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भारत के अटॉर्नी जनरल, भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है, और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का मुख्य वकील होता है. भारत के अटॉर्नी जनरल को संविधान की धारा 76 (1) के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और वह राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत अपने पद पर रहता है. इसे देश का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी भी कहा जाता है.

भारत के वर्तमान अटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल हैं. उन्हें भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नियुक्त किया गया था. उन्होंने औपचारिक रूप से 30 जून 2017 से अपना पद ग्रहण किया था और उनका कार्यकाल 3 साल का होगा. के के वेणुगोपाल भारत के 15 वें अटॉर्नी जनरल होंगे.

attorney general india venugopal

इस लेख में भारत के अब तक के सभी अटॉर्नी जनरल या महान्यायवादियों के नाम दिए जा रहे हैं.

                              महान्यायवादी (नाम)

                       कार्यकाल

 1. एम सी सीतलवाड़ (सबसे लंबा कार्यकाल)

 28 जनवरी 1950 – 1 मार्च 1963

 2. सी.के. दफ्तरी

 2 मार्च 1963 – 30 अक्टूबर 1968

 3. निरेन डे

 1 नवंबर 1968 – 31 मार्च 1977

 4. एस वी गुप्ते

 1 अप्रैल 1977 – 8 अगस्त 1979

 5. एल.एन. सिन्हा

 9 अगस्त 1979 – 8 अगस्त 1983

 6. के परासरण

 9 अगस्त 1983 – 8 दिसंबर 1989

 7. सोली सोराबजी (सबसे छोटा कार्यकाल)

 9 दिसंबर 1989 – 2 दिसंबर 1990

 8. जी रामास्वामी

 3 दिसंबर 1990 – 23 नवंबर 1992

 9. मिलन के. बनर्जी

 21 नवंबर 1992 – 8 जुलाई 1996

 10. अशोक देसाई

 9 जुलाई 1996 – 6 अप्रैल 1998

 11. सोली सोराबजी

 7 अप्रैल 1998 – 4 जून 2004

 12. मिलन के. बनर्जी

 5 जून 2004 – 7 जून 2009

 13. गुलाम एस्सजी वाहनवति

 8 जून 2009 – 11 जून 2014

 14. मुकुल रोहतगी

 12 जून 2014 – 30 जून 2017

 15. के.के. वेणुगोपाल

 30 जून 2017 से अभी तक

नियुक्ति और पदावधि
संविधान, महान्यायवादी को निश्चित पद अवधि प्रदान नहीं करता है. इसलिए, वह राष्ट्रपति की मर्ज़ी के अनुसार ही कार्यरत रहता है. उसे किसी भी समय राष्ट्रपति  द्वारा हटाया जा सकता है. उसे हटाने के लिए संविधान में कोई भी प्रक्रिया या आधार उल्लेखित नहीं है. महान्यायवादी वही पारिश्रमिक प्राप्त करता है जो राष्ट्रपति निर्धारित करता है. संविधान के महान्यायवादी का पारिश्रमिक निर्धारित नहीं किया है.

भारत का महान्यायवादी: विस्तृत विवरण