भारत के अटॉर्नी जनरल, भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है, और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का मुख्य वकील होता है. भारत के अटॉर्नी जनरल को संविधान की धारा 76 (1) के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और वह राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत अपने पद पर रहता है. इसे देश का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी भी कहा जाता है.
भारत के वर्तमान अटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल हैं. उन्हें भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नियुक्त किया गया था. उन्होंने औपचारिक रूप से 30 जून 2017 से अपना पद ग्रहण किया था और उनका कार्यकाल 3 साल का होगा. के के वेणुगोपाल भारत के 15 वें अटॉर्नी जनरल होंगे.
इस लेख में भारत के अब तक के सभी अटॉर्नी जनरल या महान्यायवादियों के नाम दिए जा रहे हैं.
महान्यायवादी (नाम) | कार्यकाल |
1. एम सी सीतलवाड़ (सबसे लंबा कार्यकाल) | 28 जनवरी 1950 – 1 मार्च 1963 |
2. सी.के. दफ्तरी | 2 मार्च 1963 – 30 अक्टूबर 1968 |
3. निरेन डे | 1 नवंबर 1968 – 31 मार्च 1977 |
4. एस वी गुप्ते | 1 अप्रैल 1977 – 8 अगस्त 1979 |
5. एल.एन. सिन्हा | 9 अगस्त 1979 – 8 अगस्त 1983 |
6. के परासरण | 9 अगस्त 1983 – 8 दिसंबर 1989 |
7. सोली सोराबजी (सबसे छोटा कार्यकाल) | 9 दिसंबर 1989 – 2 दिसंबर 1990 |
8. जी रामास्वामी | 3 दिसंबर 1990 – 23 नवंबर 1992 |
9. मिलन के. बनर्जी | 21 नवंबर 1992 – 8 जुलाई 1996 |
10. अशोक देसाई | 9 जुलाई 1996 – 6 अप्रैल 1998 |
11. सोली सोराबजी | 7 अप्रैल 1998 – 4 जून 2004 |
12. मिलन के. बनर्जी | 5 जून 2004 – 7 जून 2009 |
13. गुलाम एस्सजी वाहनवति | 8 जून 2009 – 11 जून 2014 |
14. मुकुल रोहतगी | 12 जून 2014 – 30 जून 2017 |
15. के.के. वेणुगोपाल | 30 जून 2017 से अभी तक |
नियुक्ति और पदावधि
संविधान, महान्यायवादी को निश्चित पद अवधि प्रदान नहीं करता है. इसलिए, वह राष्ट्रपति की मर्ज़ी के अनुसार ही कार्यरत रहता है. उसे किसी भी समय राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है. उसे हटाने के लिए संविधान में कोई भी प्रक्रिया या आधार उल्लेखित नहीं है. महान्यायवादी वही पारिश्रमिक प्राप्त करता है जो राष्ट्रपति निर्धारित करता है. संविधान के महान्यायवादी का पारिश्रमिक निर्धारित नहीं किया है.
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