भारतीय संस्कृति में माना जाता है कि पेड़ों में मनुष्यों की तरह जीवन है जो हमारी तरह दर्द और खुशी को महसूस करते हैं इसलिए पेड़ और उनके उत्पाद हमारे अनुष्ठानों और समारोहों का एक विशिष्ट हिस्सा हैं। भारत अपने विविधता के लिए जाना जाता है जिसमे पवित्र वनस्पतियों और पशुवर्ग की विविधता के महत्वपूर्ण भंडार हैं जो स्थानिये समुदायों द्वारा संरक्षित हैं।
हम यहाँ भारत के वृक्षवाटिकाओ (Sacred Groves) की सूची दे रहे हैं, जिसका प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा सकता है।
भारत के वृक्षवाटिकाओ (Sacred Groves) की सूची
राज्य | पवित्र पेड़ो के लिए स्थानीय शब्द | पवित्र पेड़ो की संख्या |
आंध्र प्रदेश | पविथ्रावना | 580 |
अरुणाचल प्रदेश | गुम्पा वन (बौद्ध मठों से जुड़े) | 101 |
गोवा | देवराई, पॅन | 55 |
झारखंड | साराना | 29 |
कर्नाटक | देवारा कडु | 1531 |
केरल | कवु, सारा कवु | 299 |
महाराष्ट्र | देव्राई, देवहत्ती, देवगड़ी | 2820 |
मणिपुर | गाखाप, मौहक (पवित्र बांस भंडार) | 166 |
मेघालय | की लॉ लिंगदोह, की लॉ क्नटांग, की लॉ न्याम | 101 |
उड़ीसा | जाहेरा, ठाकुराम्मा | 169 |
पुडुचेरी | कोविल कडु | 108 |
राजस्थान | ऑरान्स, केनक्रीस, जोगमाया | 560 |
तमिलनाडु | स्वामी शोल, कोइकाडू | 752 |
उत्तराखंड | देव भूमि, बगयाल (पवित्र अल्पाइन घास के मैदान) | 22 |
पश्चिम बंगाल | गरमथन, हरिथान, जाहेरा, सबित्रीठान, सांतलबीरथान | 39 |
उपरोक्त सूची पाठकों के सामान्य ज्ञान की बढ़ोतरी में सहायक होगा क्योंकि इसमें हमने भारत के वृक्षवाटिकाओ (Sacred Groves) के बारे में विवरण को शामिल किया हैl
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