यस बैंक संकट क्या है: जानें 5 मुख्य कारण

Mar 7, 2020, 18:57 IST

वर्तमान में भारत का बैंकिंग सेक्टर भारी संकट से गुजर रहा है. अब एक और वाणिज्यिक बैंक, यस बैंक संकट में है. इस बैंक के पास 24000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की देयदरियां हैं.  RBI ने यस बैंक के ग्राहकों के लिए 5 मार्च से 3 अप्रैल तक प्रति ग्राहक 50000 रुपये की निकासी की सीमा निर्धारित की है ताकि सभी खाताधारकों को कुछ ना कुछ पैसा दिया जा सके.

yes Bank crisis
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भारतीय बैंकिंग क्षेत्र इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. इसका मुख्य कारण बड़े बड़े कॉर्पोरेट घरानों द्वारा ऋण ना चुकाना है.इस गैर अदायगी के कारण बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियां बढ़ रही हैं जिसके कारण वे नए लोगों को उधार नहीं दे पा रहे हैं और उनकी पूरी वित्तीय क्षमता प्रभावित हो रही है.

30 सितंबर, 2019 तक; सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियां (NPAs) 7.27 लाख करोड़ रूपये थीं. इसी प्रकार निजी क्षेत्र के बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियां (NPAs) भी बहुत अधिक हो गयीं हैं.

आइये अब इस लेख में यस बैंक को वित्तीय संकट में फ़साने वाले कारणों की जाँच करते हैं.लेकिन इससे पहले यस बैंक के बारे में कुछ तथ्य जान लेते हैं.

यस बैंक के बारे में कुछ तथ्य (Facts About the Yes Bank)

स्थापना: 2004; (16 साल पहले)

संस्थापक: राणा कपूर, अशोक कपूर

चेयरमैन: ब्रह्मदत्त

एमडी और सीईओ: रवनीत गिल

शाखाओं और एटीएम की संख्या:1,122 शाखाएँ और 1,220 एटीएम (जून 2019)

कर्मचारी:18,238 (2018)

बैंक का प्रकार: निजी बैंक

राजस्व:  रु. 25,491 करोड़ (2018)

कुल संपत्ति:  रु. 301,390 करोड़ (2018)

शुद्ध आय: रु.-1,506.64 करोड़ (2019)

उत्पाद: उपभोक्ता बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, कॉर्पोरेट बैंकिंग, वित्त और बीमा, बंधक ऋण, निजी बैंकिंग, धन प्रबंधन, निवेश बैंकिंग

अब हम यस बैंक संकट के कारणों के बारे में चर्चा करते हैं

1. बिगड़ती वित्तीय स्थिति (Deteriorating Financial Position)

यस बैंक के शेयरों में दामों में लगातार गिरावट से बैंक की वित्तीय हालत का पता लगाया जा सकता है. यस बैंक का शेयर मूल्य 2018 में 400 रुपये था जो अब 6 मार्च 2020 तक केवल 16.60 है. बैंक अपने संभावित ऋण घाटे को दूर करने के लिए पूंजी जुटाने में असमर्थ रहा है. बैंक, पिछली चार तिमाहियों से घाटे का सामना कर रहा था.

2. कंगाल कॉर्पोरेट ग्राहक Bankrupt Corporate Customers
यस बैंक के ग्राहकों की सूची में खुदरा से अधिक कॉर्पोरेट ग्राहक हैं. यस बैंक ने  अधिकांश  उन कंपनियों को ऋण दिया है जो कि घाटे में चल रहीं हैं. यही कारण है कि यस बैंक को अपना ऋण समय पर वापस नहीं मिला. कंपनियों की खराब आर्थिक स्थिति ने यस बैंक की वित्तीय स्थिति भी खराब कर दी है. इस बैंक के पास 24000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की देनदारियां हैं.

3. संस्थागत मुद्दे (Governance Issues)
यस बैंक के संस्थापक श्री अशोक कपूर की 26/11 को मुंबई हमले में मृत्यु हो गई थी. स्वर्गीय अशोक कपूर की पत्नी चाहती हैं कि उनकी बेटी को निदेशक मंडल में शामिल किया जाए जिसका विरोध राणा कपूर की पत्नी द्वारा किया गया था. इससे सिद्ध होता है कि बैंक भाई-भतीजावाद के झगडे में फसा था और बैंक को बचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाये गए थे. यही कारण है कि RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर श्रीमान R. गांधी को यस बैंक के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर में शामिल किया गया था. वर्ष 2018-19 में बैंक का कुल NPA 3,277 करोड़ रुपये था.

4. नकदी का बहिर्गमन (Outflow of Liquidity)
ग्राहकों द्वारा जमा किया गया धन बैंकिंग उद्योग की रीढ़ है. अगर अफवाह उठती है कि भविष्य में कोई बैंक दिवालिया हो सकता है तो अचानक सभी ग्राहक पैसे निकालना शुरू कर देते हैं.इसके कारण बैंक की जमा पूँजी ख़त्म होने लगती है जिसके कारण वह नया लोन नहीं दे पाता है, लाभ नहीं कमा पाता है और अंततः बैंक दिवालिया हो ही जाता है. 

yesbank

यस बैंक के पास सितंबर 2019 के अंत तक 2.09 लाख करोड़ रुपये की राशि जमा थी जो कि बहुत तेजी से घटी और फिर एक दिन ऐसा आया जब बैंक लोगों का पैसा देने ने नाकाम हो गया और रिज़र्व बैंक को 50000 प्रति ग्राहक/प्रति माह की लिमिट तय करनी पड़ी है.

5. भारी देयताएं (Huge Liabilities)
यस बैंक की कुल देनदारी 24 हजार करोड़ डॉलर है. बैंक के पास लगभग 40 बिलियन डॉलर (2.85 लाख करोड़ रुपये) की बैलेंस शीट है. यस बैंक को पूंजी आधार बढ़ाने के लिए 2  बिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि यस बैंक के हर ग्राहक का पैसा सुरक्षित रहेगा. ख़बरों के अनुसार, SBI; यस बैंक की 49 फीसदी हिस्सादारी खरीद सकता है. उम्मीद है कि इस लेख को पढने के बाद आप समझ गए होंगे कि यस बैंक किन कारणों से वित्तीय संकट में फसा है?

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Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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