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जाने तानसेन समारोह कब, कहाँ और क्यों मनाया जाता है?

तानसेन समारोह भारत में आयोजित सबसे पुराने संगीत समारोहों में से एक है| इसका आयोजन अकबर के दरबार में रहने वाले महान संगीतकार तानसेन को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से किया जाता है। तानसेन समारोह या तानसेन संगीत समारोह का आयोजन हर वर्ष दिसम्बर महीने में मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के “बेहत” नामक गांव में किया जाता है।
Dec 19, 2016 19:25 IST
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तानसेन समारोह भारत में आयोजित सबसे पुराने संगीत समारोहों में से एक है| इसका आयोजन अकबर के दरबार में रहने वाले महान संगीतकार तानसेन को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से किया जाता है। तानसेन समारोह या तानसेन संगीत समारोह का आयोजन हर वर्ष दिसम्बर महीने में मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के “बेहत” नामक गांव में किया जाता है। यह एक चार दिवसीय संगीत समारोह है जिसमें दुनिया भर के कलाकार और संगीत प्रेमी इकट्ठा होते हैं और संगीत उस्ताद तानसेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं| इस लेख में हम तानसेन संगीत समारोह एवं उसके इतिहास का विवरण दे रहे हैं जिससे विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हिन्दी माध्यम के छात्रों को सामान्य ज्ञान (GK in Hindi) के प्रश्नों को हल करने में मदद मिलेगी|

आइए सर्वप्रथम जानते हैं कि तानसेन कौन थे और भारतीय संगीत में उनका क्या योगदान है?

तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु मिश्रा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक महान ज्ञाता थे। उन्हे सम्राट अकबर के नवरत्नों में भी गिना जाता है। तानसेन का जन्म ग्वालियर से लगभग 45 कि॰मी॰ दूर ग्राम बेहत में श्री मकरंद पांडे के यहाँ तत्कालीन प्रसिद्ध फ़क़ीर हजरत मुहम्मद गौस के वरदान स्वरूप 1493 या 1506 (इस पर विद्वानों के बीच मतभेद है) में हुआ था|

तानसेन के आरंभिक काल में ग्वालियर पर कलाप्रिय राजा मानसिंह तोमर का शासन था। उनके प्रोत्साहन से ग्वालियर संगीत कला का विख्यात केन्द्र था, जहां पर बैजूबावरा, कर्ण और महमूद जैसे महान संगीताचार्य और गायक गण एकत्र थे और इन्हीं के सहयोग से राजा मानसिंह तोमर ने संगीत की ध्रुपद गायकी का आविष्कार और प्रचार किया था। तानसेन की संगीत शिक्षा भी इसी वातावरण में हुई। राजा मानसिंह तोमर की मृत्यु होने और विक्रमाजीत से ग्वालियर का राज्याधिकार छिन जाने के कारण यहाँ के संगीतज्ञों की मंडली बिखरने लगी।

तब तानसेन भी वृन्दावन चले गये और वहां उन्होनें स्वामी हरिदास जी से संगीत की उच्च शिक्षा प्राप्त की। संगीत शिक्षा में पारंगत होने के उपरांत तानसेन शेरशाह सूरी के पुत्र दौलत ख़ाँ के आश्रय में रहे और फिर बांधवगढ़ (रीवा) के राजा रामचन्द्र के दरबारी गायक नियुक्त हुए। यहीं पर मुग़ल सम्राट अकबर ने उनके गायन की प्रशंसा सुनकर उन्हें अपने दरबार में बुला लिया और अपने नवरत्नों में स्थान दिया।

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तानसेन की प्रमुख रचनाएं

तानसेन मौलिक कलाकार थे। वे स्वर-ताल में गीतों की रचना करते थे। उन्होंने कई राग-रागिनियों की रचना की थी। 'मियाँ का मल्हार', 'दरबारी कान्हड़ा', 'गूजरी टोड़ी' या 'मियाँ की टोड़ी' तानसेन की ही देन है। इसके आलावा तानसेन कवि भी थे। उन्होंने 'संगीतसार', 'रागमाला' और 'श्रीगणेश स्तोत्र' नामक तीन ग्रंथों की रचना की थी| भारतीय संगीत के इतिहास में ध्रुपद गायक के रूप में तानसेन का नाम अग्रणी है| इसके साथ ही ब्रजभाषा के पद साहित्य का संगीत के साथ जो अटूट सम्बन्ध रहा है, उसमें भी तानसेन का योगदान उल्लेखनीय है|

तानसेन की मृत्यु

तानसेन के जन्म की तरह उनके मृत्यु की तिथि एवं साल के बारे मतभेद है, लेकिन अधिकांश लोगों की राय के अनुसार उनकी मृत्यु 1586 या 1589 में हुई थी | उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें उनके गुरु गौस मुहम्मद खाँ की समाधि के पास दफनाया गया था| वर्तमान में यहीं उनके समाधिस्थल पर हर साल तानसेन संगीत समारोह का आयोजन किया जाता है।

तानसेन समारोह का इतिहास

प्रारंभ में तानसेन समारोह मूलतः एक स्थानीय त्योहार था, लेकिन 1952 और 1962 के बीच भारत सरकार में प्रसारण मंत्री रहे बी.वी. केस्कर की पहल पर इसका आयोजन विस्तृत रूप से किया जाने लगा| जिसके कारण तानसेन समारोह एक लोकप्रिय राष्ट्रीय संगीत उत्सव में बदल गया था| इस समारोह का आयोजन साल 1950 से हर वर्ष किया जा रहा है| इस समारोह में हर वर्ष शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए किसी न किसी व्यक्ति को "तानसेन सम्मान" से नवाजा जाता है|

तानसेन सम्मान प्राप्त करने वाले प्रमुख व्यक्तियों के नाम इस प्रकार हैं:

2000 - उस्ताद अब्दुल हलीम जफर खान - सितार वादक।

2001 - उस्ताद अमजद अली खान - सरोद वादक।

2002 - नियाज अहमद खान

2003 - पंडित दिनकर कयकिनी

2004 - पंडित शिवकुमार शर्मा - संतूर वादक।

2005 - मालिनी राजुरकर - ग्वालियर घराने की हिन्दुस्तानी गायक और टप्पा और तराना का स्वीकार किया मास्टर।

2006 - सुलोचना वृहस्पति - हिन्दुस्तानी गायक और रामपुर-सहसवान घराने के प्रतिपादक।

2007 - पंडित गोकुलोत्सव महाराज - हिन्दुस्तानी गायक।

2008 - उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान - हिन्दुस्तानी गायक और रामपुर-सहसवान घराने के प्रतिपादक।

2009 - अजय पोहंकर - हिन्दुस्तानी गायक और किराना घराना के प्रतिपादक।

2010 - सविता देवी - बनारस घराना से हिंदुस्तानी गायक।

2011 - राजन और साजन मिश्रा - गायक जोड़ी

2013 - विश्व मोहन भट्ट - हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत वादक

2014 - प्रभाकर कारेकर- भारतीय शास्त्रीय गायक

2015 - अजय चक्रवर्ती - भारतीय हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक

2015 - पं. लक्ष्मण कृष्णराव पंडित - गायक (कृष्णराव शंकर पंडित के बेटे)

2016 - पं. डालचंद शर्मा - पखावज  वादक

तानसेन संगीत समारोह का आयोजन उस्ताद अलाउद्दीन खान कला एवं संगीत अकादमी और मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। वर्ष 2016 में 16 दिसम्बर से 20 दिसम्बर के बीच ग्वालियर में इसका आयोजन किया गया है |भारतीय संगीत में तानसेन के अतुलनीय योगदान को हमेशा हमेशा याद रखा जायेगा |

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