पत्रकार और रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है. गोस्वामी ने 20 अप्रैल को लाइव टेलीविजन पर यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि संगठन की कोई विश्वसनीयता नहीं बची है क्योंकि वह फेक न्यूज़ रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है.
अर्नब गोस्वामी ने इस्तीफ़ा क्यों दिया (Why Arnab Goswami Resigned)?
लाइव शो के दौरान अर्नब गोस्वामी ने संपादकों गिल्ड के अध्यक्ष शेखर गुप्ता पर संगठन की विश्वसनीयता को नष्ट करने का आरोप लगाया. अर्नब ने कहा, 'मैं कहूंगा, शेखर गुप्ता, आप इसे पहले मुझसे सुनें. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की जो भी साख बची हुई थी, वह अब आपकी अपमानजनक चुप्पी से नष्ट हो गई है. इसलिए मैं एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की सदस्यता से इस्तीफ़ा देता हूँ.
अर्नब गोस्वामी अपने चैनल रिपब्लिक टीवी पर पालघर में भीड़ की भीड़ पर एक पैनल चर्चा कर रहे थे, जिसमें दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. चर्चा के दौरान, गोस्वामी ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष शेखर गुप्ता को भयानक घटना पर चुप रहने के लिए फटकारा और उन पर लाइव टीवी बहस के दौरान संगठन की शेष विश्वसनीयता को नष्ट करने का आरोप लगाकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
पालघर की घटना क्या थी (What was the Palghar's incident)
16 अप्रैल को, एक कार ड्राईवर दो साधुओं को कांदिवली से गुजरात में अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ले जा रह था. इसी बीच भीड़ द्वारा उन तीनों को कार से बाहर निकाला गया और चोर होने के शक में पीट पीटकर उनकी हत्या कर दी गयी थी. अब तक इस संबंध में 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया क्या है (What is the Editors Guild of India)
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया एक संगठन है जो वर्ष 1978 में स्थापित किया गया था. यह संगठन प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा और समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के संपादकीय नेतृत्व के मानकों को बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया था.
एडिटर्स गिल्ड ने संसद और कार्यपालिका के साथ प्रेस की स्वतंत्रता के दुरुपयोग के मुद्दों को उठाया. इसने प्रेस की स्वतंत्रता और अन्य स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए कड़ी मेहनत की, जिसे संविधान, कार्यकारी आदेशों और न्यायिक घोषणाओं में कई संशोधनों के माध्यम से कम करने का प्रयास किया गया जा चुका है.
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के कार्य (Functions of the Editors Guild of India)
वर्ष 2001 में जब भारत की तत्कालीन सरकार ने आतंकवाद निरोधक अध्यादेश लाया था, इसमें पत्रकारों को मात्र संदेह के आधार पर गिरफ्ताए करने जैसे प्रावधान थे. एडिटर्स गिल्ड द्वारा इसका जोरदार विरोध किया संगठन ने आगे यह सुनिश्चित किया कि जब अध्यादेश को संसद के द्वारा कानून बना दिया जाये तो उसमें प्रेस की स्वतंत्रता को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
गैर-सरकारी स्रोतों से मीडिया की स्वतंत्रता के खतरों का संपादकों की गिल्ड द्वारा (विशेष रूप से उत्तर, पूर्व और उत्तर पूर्वी भारत के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में) दृढ़ता से विरोध किया गया है.
जब भी संपादकों द्वारा प्राधिकरण से उत्पीड़न की शिकायतें की जातीं हैं, तो एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सम्बंधित मामलों की जांच करती है और संबंधित सरकारों और संस्थानों से उचित कार्रवाई की सिफारिश करती है.
जब गुजरात दंगों के दौरान मीडिया के पक्षपात पूर्ण होने के आरोप लगे थे तो एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक फैक्ट फाइंडिंग टीम बनायीं थी और शिकायतों की जांच की, और निष्कर्षों को व्यापक रूप से प्रसारित किया था.
इस प्रकार स्पष्ट है कि मीडिया की स्वतंत्रता को बरक़रार रखने और देश के सही मुद्दों को जनता के सामने रखने के प्रयासों में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सदा की आगे तरह है और मीडियाकर्मियों और इससे संस्थानों के हितों की रक्षा करता है.
हाल ही में जारी की गयी Global Press Freedom Index 2020 में भारत के स्थान 180 देशों में 142 वां है जो कि पिछले साल की तुलना में 2 स्थान नीचे है. इसलिए भारत में प्रेस की गिरती आजादी की दिशा में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को और भी काम करने की जरूरत है.
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