भारत का अनोखा किला, जो समय के साथ बदलता है अपना रंग

Last Updated: Oct 5, 2026, 12:27 IST

भारत में आपने अलग-अलग किलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। ये किले अपने समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाने जाते हैं। इस कड़ी में देश में एक किला ऐसा भी है, जो समय के साथ अपना रंग बदलता है। कौन-सा है यह किला, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें। 

किला
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भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां कई ऐतिहासिक किले देखने को मिलते हैं। ये किले सदियों से अपना समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत समेटे हुए हैं। इनमें कुछ किले ऐसे हैं, जो कि अपनी कुछ खास विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं, जिनमें से एक किला ऐसा भी है, जो कि समय के साथ अपना रंग बदलता है। क्या आप भारत के ऐसे किले के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

कौन-सा किला अपना रंग बदलता है

राजस्थान के थार रेगिस्तान के बीचों-बीच स्थित जैसलमेर का किलाभारत की उन ऐतिहासिक विरासतों में से एक है, जो प्रकृति और वास्तुकला के अनोखे संतुलन के लिए जानी जाती हैं। इसे 'सोनार किला' या 'गोल्डन फोर्ट'के नाम से भी जाना जाता है। इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसका समय के साथ रंग बदलना है, जो इसे दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाता है।

क्यों बदलता है किले का रंग 

जैसलमेर का किला कोई साधारण पत्थरों से नहीं बना है। इसके निर्माण में स्थानीय पीले बलुआ पत्थरोंका इस्तेमाल किया गया है। यह पत्थर सूरज की रोशनी के कोण और उसकी किरणों के हिसाब से दिन भर अपना रंग बदलते प्रतीत होते हैं। 

सुबह के समय ऐसा दिखता है किला

जब सुबह सूरज की पहली किरणें किले की प्राचीर और बुर्ज पर पड़ती हैं, तब यह हल्का केसरियाऔर सुर्खी लिए हुए लाल दिखाई देता है।

दोपहर में ऐसा दिखता है किला

दोपहर मेंतेज धूप में जब सूरज ठीक सिर पर होता है, तो यह पीला बलुआ पत्थर चमकदार सुनहरे रंग में बदल जाता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो रेत के टीले के बीच सोने का बड़ा महल खड़ा हो।

शाम को ऐसा दिखता है किला

शाम के समय जब ढलते सूरज की किरणें इस पर पड़ती हैं, तो इसका रंग शहद और भूरे-सुनहरेरंग का साया लेने लगता है, जो देखने में बहुत ही सुंदर होता है।

क्या है किले का इतिहास 

किले के निर्माण की बात करें, तो  इस किले का निर्माण 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक राव जैसल ने कराया था। उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम 'जैसलमेर' पड़ा। इस किले की एक और सबसे अनोखी बात यह है कि इसके निर्माण में गारे, चूने या सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया है, बल्कि पत्थरों में खास किस्म के खांचे बनाकर उन्हें आपस में जोड़ा गया है।

दुनिया का एकमात्र जीवंत किला

यह दुनिया के बहुत कम 'लिविंग फोर्ट्स' में से एक है। आज भी जैसलमेर शहर की लगभग एक-चौथाई आबादी इस किले के अंदर निवास करती है। इसके अंदर मकान, दुकानें, प्राचीन जैन मंदिर और हस्तशिल्प के बाजार स्थित हैं। 

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Oct 5, 2026, 12:27 IST

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