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Indian Railway: कितने CC का होता है रेल इंजन, जानें

Indian Railway: आप भारतीय रेलवे में सफर करते होंगे तो तरह-तरह के इंजन को देखते होंगे। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से रेल के लोकोमोटिव के इंजन को लेकर जानकारी देंगे कि यह कितने सीसी का होता है और इसमें कितनी शक्ति होती है। 

Indian Railway: कितने CC का होता है रेल इंजन, जानें
Indian Railway: कितने CC का होता है रेल इंजन, जानें

Indian Railway: आप अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए भारतीय रेलवे का सफर करते होंगे। इस दौरान आप भारी भरकम ट्रेन को एक इंजन द्वारा खींचते हुए देखते होंगे। लेकिन, क्या कभी आपके दिमाग में आया है कि इतनी बड़ी ट्रेन को खींचने वाले रेल इंजन में कितनी शक्ति होती है और यह कितने सीसी का होता है। यदि नहीं, तो आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव इंजन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें आपको पता चलेगा कि यह इंजन कितने सीसी का होता है और इसमें कितनी शक्ति होती है। तो, आइये यह जानने की शुरुआत करते हैं। 



सबसे पहले तो हम यह समझेंगे कि जब भी हम इंजन की बात करते हैं, तो हम पूरे लोकोमोटिव को ही इंजन बोल देते हैं, जो कि गलत है। क्योंकि, इंजन लोकोमोटिव का एक हिस्सा है न कि पूरा लोकोमोटिव इंजन है। ऐसे में दोनों ही चीज अलग-अलग है। 

 

16 सिलेंडर वाला होता है एक इंजन 

आपको बता दें कि एक डीजल लोकोमोटिव का एक इंजन 16 सिलेंडर और 32 वाल्व का होता है। वहीं, एक सिलेंडर में 10,941 सीसी की क्षमता होती है। यानि 16 सिलेंडर में 175,056 सीसी की क्षमता हुई।  वहीं, एक सिलेंडर में करीब 150 लीटर डीजल का इस्तेमाल होता है, जबकि चार सिलेंडर वाली कार में एक यो दो लीटर का इस्तेमाल होता है। आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि एक डीजल लोकोमोटिव के टैंक में 400-500 नहीं बल्कि 50 हजार लीटर तक डीजल भरा जा सकता है। 



क्षमता को सीसी में नहीं बल्कि लीटर में करते हैं व्यक्त

वैसे तो सड़क पर चलने वाली गाड़ियों के इंजन की क्षमता को सीसी में मापा में जाता है। लेकिन, लोकोमोटिव इंजन के मामले में यह नहीं होता है। बल्कि, यहां पर इंजन की क्षमता को लीटर में मापा जाता है। यहां एक लीटर का मतलब 1000 सीसी से है। यानि डीजल इंजन के एक सिलेंडर की क्षमता 10.94 लीटर हुई। वहीं, 16 सिलेंडर की क्षमता 175 लीटर होगी। आपको यह भी बता दें कि हर इंजन की क्षमता एक जैसी नहीं होती, बल्कि अलग-अलग लोकोमोटिव इंजन की अलग-अलग क्षमता होती है और उसी हिसाब से इंजन को काम में लिया जाता है। 

 

लोकोमोटिव में मौजूद होते हैं सुपरचार्जर

आपको यह भी बता दें कि एक लोकोमोटिव में सुपरचार्जर भी मौजूद होते हैं। इन सुपरचार्जर का वजन कई टन में होता है। वहीं, एक लोकोमोटिव में सुपरचार्जर तक का वजन 15 से 20 टन तक पहुंच सकता है। सुपरचार्जर एक प्रेशर बूस्टिंग उपकरण होता है, जिसका काम इंजन में हवा को पहुंचाना होता है। जब इंजन में हवा सही मात्रा में नहीं पहुंचती है, तो यह हवा को सही मात्रा में इंजन में पहुंचाता है, जिससे इंजन में ईंधन का दहन ठीक तरह से होता है और इंजन अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करता है। इन सुपरचार्जरों की कीमत काफी अधिक होती है। कुछ सुपरचार्जर करोड़ों में आते हैं। 



यहां यह भी जानना जरूरी है कि लोकोमोटिव में जहां लोको पायलट(ड्राइवर)  और असिस्टेंट बैठे होते हैं, उसे कॉकपिट कहा जाता है। वहीं, जहां यह दोनों खड़े होकर पूरी ट्रेन को कंट्रोल करते हैं, उसे कंट्रोल स्टैंड बोलते हैं। वहीं, लोकोमोटिव के पहियों को चलाने के लिए बड़ी-बड़ी ट्रैक्शन मोटर की जरूरत होती है, जिसके माध्यम से पहिये रफ्तार पकड़ते हैं। इसके लिए ट्रांसफॉर्मर की जरूरती है, जिससे मोटर में बिजली आपूर्ति की जाती है। वहीं, यह मोटर पहियों के एक्सेल में जुड़ी होती है और इन ट्रैक्शन मोटर का वजन भी बहुत होता है, जिसे क्रेन की मदद से उठाया जा सकता है। 

 

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