एक ऐसे देश में जहाँ अधिकांश माता पिता यह चाहते हैं कि उनके बच्चे साइंस स्ट्रीम की पढ़ाई करें, वहां आर्ट्स सब्जेक्ट का चयन करना अपने आप में बहुत सारे अनचाहे और अनसुलझे सवालों को सुनने तथा हल करने की कला में प्रवीण बनने का प्रथम सोपान है. इतना ही नहीं छात्रों को कॉलेज से लेकर घर बाहर हर जगह कुछ अवांछित टिप्पणीयां सुनने को मिलती हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता है. इन्हीं टिप्पणियों में से कुछ का वर्णन नीचे किया जा रहा है.
1. आर्ट्स का सिलेबस बहुत आसान होता है
आपने अक्सर सभी को यह कहते सुना होगा कि आर्ट्स का सिलेबस बहुत आसान होता है. लेकिन हम आपको यह बताना चाहते हैं कि यह भ्रम मात्र है कि साइंस पढ़ने वालों की तुलना में आर्ट्स पढ़ने वाले किसी आसान कोर्स का अध्ययन कर रहे हैं. वस्तुतः दार्शनिक सिद्धांत और भारतीय संविधान में सभी परिवर्तनों को याद रखना जितना आसान लगता है उतना आसान है नहीं .
2. शौक के साथ साथ भ्रामक पाठ्यक्रम
बच्चों द्वारा आर्ट्स सब्जेक्ट का चयन करने पर बहुत सारे गार्जियन यह सोचते हैं कि विरोधी स्वभाव और शौक के कारण बच्चे ने इस सब्जेक्ट का चयन किया है
अधिकांश स्थितियों में माता-पिता और रिश्तेदार यह उम्मीद करते हैं कि कुछ समय के बाद बच्चा इस सब्जेक्ट को छोड़कर मुख्य धारा में लौट आएगा.
3. यह मानना कि आर्ट्स विषय में प्रैक्टिकल नहीं होता है
ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि प्रैक्टिकल सिर्फ साइंस सब्जेक्ट्स में ही होते हैं लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि आर्ट्स सब्जेक्ट्स में भी प्रैक्टिकल होते हैं और उसका दायरा साइंस से बहुत अधिक होता है. दर्शन, मनोविज्ञान और पत्रकारिता के क्षेत्र में बिना प्रैक्टिकल के विकास संभव ही नहीं है.
4. बहुत अधिक अध्ययन से बचने के लिए छात्र आर्ट्स लेते हैं
यह आम धारणा है कि आर्ट्स में बहुत अध्ययन की जरुरत नहीं पढ़ती तथा जो छात्र बहुत देर तक अध्ययन नहीं कर सकते वे आर्ट्स सब्जेक्ट लेते हैं.लेकिन यह एक मानसिक विसंगति है. दोनों ही विषयों में समान मेहनत तथा अध्ययन की आवश्यक्ता होती है.
5. सृजनशीलता एक आवश्यक शर्त है
कभी कभी लोग आर्ट्स को स्केचिंग और ड्राइंग से जोड़कर देखते हैं. लेकिन ऐसी बात नहीं है. आर्ट्स से अभिप्राय गैर-विज्ञान पाठ्यक्रम है जिसमें किसी भी प्रकार का साइंस सब्जेक्ट शामिल नहीं है. इसके लिए सृजनशीलता की जरुरत नहीं है. हाँ साइंस की तरह चीजों को समझने, परखने तथा सही रूप में अभिव्यक्त करने की आवश्यक्ता इस विषय में भी होती है.
6. मुफ्त करियर सलाह
एक बड़ी दिलचस्प बात यह है कि चारो तरफ से आर्ट्स स्टूडेंट्स को मुफ्त करियर सलाह मिलती है. हर कोई उन्हें यही सुनाता है कि जिस कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं उसमें कोई दम नहीं है और संभव हो तो वह अपना स्ट्रीम बदल दे. ज्यादातर लोग एमबीए करने की सलाह देते हैं क्योंकि यह आजकल बहुत प्रचलन में है.
यदि आप आर्ट्स के छात्र हैं, तो आपने कई बार इन विषयों में सुना होगा. लेकिन आपको यह सुझाव दिया जाता है कि हर विषय अपने आप में समान रूप से महत्वपूर्ण है, जरुरत है उसमें मास्टरी हासिल करने की. अगर ऐसा नहीं होता तो एक साइंस के प्रोफेसर को एक आर्ट्स के प्रोफेसर से अधिक सैलरी मिलती लेकिन ऐसा नहीं होता सबको बराबर सैलरी मिलती है. अभी भी हमारे समाज में शिक्षा अपने वास्तविकता के उस स्तर तक नहीं पहुँच पाई है कि लोग हर कार्य या विषय को समान नजरिये से देख सके.
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