भारत के टॉप IIMs में एडमिशन के लिए इंडियन स्टूडेंट्स में जरुर होने चाहिए ये स्किल्स

भारत के टॉप बिजनेस स्कूल्स किसी एमबीए कैंडिडेट में कई महत्वपूर्ण क्वालिटी परखते हैं जैसेकि, मुश्किल और काफी मेहनत से पूरे होने वाले एमबीए प्रोग्राम के लिए कैंडिडेट्स की काबिलियत.

Updated: May 4, 2021 20:48 IST
MBA at IIMs: Skills B-schools Look for | Skills B-schools Impart
MBA at IIMs: Skills B-schools Look for | Skills B-schools Impart

अगर आप भी एक ऐसे स्टूडेंट हैं जो भारत के टॉप बिजनेस स्कूल्स में एडमिशन लेना चाहते हैं, उनके लिए मैनेजमेंट एजुकेशन के दो पहलू हैं – किसी एमबीए प्रोग्राम में एडमिशन लेने के लिए एमबीए कैंडिडेट स्टूडेंट्स के लिए जरुरी स्किल्स और किसी एमबीए प्रोग्राम के दौरान इन स्टूडेंट्स का स्टडी कोर्स क्या होगा? अगर इंडियन स्टूडेंट्स को इन दोनों पहलुओं के बारे में स्पष्ट जानकारी हो तो भविष्य में करियर प्लान बनाने में ऐसे स्टूडेंट्स को काफी सहायता मिलेगी. प्रोफेसर राजीव कुमार, फैकल्टी – ऑपरेशन्स मैनेजमेंट ग्रुप्स, आईआईएम, कलकत्ता ने एक इंटरव्यू में इंडियन स्टूडेंट्स के लिए इन दोनों पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है और हम आपकी सहूलियत के लिए इस इंटरव्यू के प्रमुख अंश इस आर्टिकल में पेश कर रहे हैं. आइये आगे पढ़ें यह आर्टिकल:

इंटरव्यू के मुख्य अंश

एमबीए एडमिशन इंटरव्यूज में सफल होने के लिए क्या करें?

आमतौर पर, एमबीए कैंडिडेट्स किसी इंटरव्यू में खुद को कैसे प्रस्तुत करें? .........इस बारे में अपने पीअर्स, कोचिंग सेंटर्स और ऐसे अन्य सोर्सेज से प्राप्त फीडबैक से अक्सर प्रभावित हो जाते हैं. लेकिन, पूरी तैयारी के बावजूद, इंटरव्यू पैनल को अक्सर एमबीए कैंडिडेट्स में सत्यता और मौलिकता की कमी नजर आती है. खासकर जब किसी कैंडिडेट को अपनी ताकतों और कमियों के बारे में बताना होता है, ऐसे में अगर कैंडिडेट्स अपनी एप्रोच में सच्चे और सटीक रहने की कोशिश करें तो यह उनके लिए बेहतर रहेगा. इंटरव्यू पैनल में कोई भी मेम्बर इस बात की उम्मीद नहीं करता है कि कैंडिडेट को हरेक टॉपिक की समझ और जानकारी होगी. इसलिए, एमबीए इंटरव्यू के दौरान स्पष्ट और ईमानदार रहने पर आप इंटरव्यू पैनल को ज्यादा अच्छी तरह इम्प्रेस कर सकते हैं. 

पैनल इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता है कि कैंडिडेट ने कैसे कपड़े पहने हैं या वे खुद को कैसे प्रस्तुत करते हैं? चूंकि, किसी भी कैंडिडेट के लिए इंटरव्यू के दौरान जरा घबराना और नर्वस होना स्वाभाविक ही है इसलिए, आमतौर पर, पैनल इसे कैंडिडेट के खिलाफ एक कमी नहीं समझता है.

लेकिन, इंटरव्यू के दौरान ही इंटरव्यूअर्स आपके एकेडेमिक कौशल और पेशेवर अनुभव को भी परखते हैं. एकेडेमिक मोर्चे पर, पैनल यह परखने की कोशिश करेगा कि आपने अपनी स्टडीज में कितना अच्छा परफॉर्म किया है?.....और क्या आप एमबीए प्रोग्राम के दौरान उस प्रेशर को हैंडल करने के काबिल हैं जिससे कोई एमबीए स्टूडेंट गुजरता है?.

इसी तरह, इंटरव्यू पैनल आपके वर्क-एक्सपीरियंस से संबंधित प्रश्न भी पूछेगा ताकि उन्हें यह पता चल सके कि आपको पेशेवर जीवन का कितना अनुभव है?. कैंडिडेट्स से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपने पेशेवर जीवन के विशेष अनुभव पैनल के साथ शेयर करें जैसेकि, आपने कौन-सी चुनौतियों का सामना किया और उन चुनौतियों को जीतने के लिए आपने कौन-सी स्ट्रेटेजीज अपनाईं? इसके अलावा, पैनल यह भी पता लगाने की कोशिश करेगा कि जिस ऑर्गेनाइजेशन और इंडस्ट्री में आपने काम किया था, आप उसकी कितनी जानकारी रखते हैं?.

इस परिभाषा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि एक माहिर पेशेवर के तौर पर आप केवल अपने करियर इंटरेस्ट और जॉब इंटरेस्ट का ही ध्यान न रखें बल्कि अपने आस-पास होने वाली घटनाओं पर भी पूरा ध्यान दें. अगर आप इंटरव्यू में इस रवैये का प्रदर्शन नहीं करते हैं तो ऐसा लगता है कि आप अपनी एप्रोच में थोड़ा-सा चूक रहे हैं.  

टॉप इंडियन बिजनेस स्कूल्स अपने एमबीए कैंडिडेट्स में तलाशते हैं ये स्किल्स  

बिजनेस स्कूल्स किसी एमबीए कैंडिडेट में जो सबसे महत्वपूर्ण क्वालिटी परखते हैं, वह हैं मुश्किल और काफी मेहनत से पढ़े जाने वाले एमबीए प्रोग्राम को पूरा करने के लिए उन कैंडिडेट्स की काबिलियत और टैलेंट. इस संबंध में, वे पहले नंबर पर कैंडिडेट की एकेडेमिक क्षमता की जांच करते हैं. जिन स्टूडेंट्स का बढ़िया एकेडेमिक ट्रैक रिकॉर्ड होता है, उनके एकेडेमिक ट्रैक रिकॉर्ड से बिजनेस स्कूल की सेलेक्शन कमेटी को यह पता लग जाता है कि उस स्टूडेंट में किसी एमबीए प्रोग्राम के पेस और प्रेशर को, करिकुलम और एक्स्ट्रा-करिकुलम आस्पेक्ट्स के मुताबिक, सफलतापूर्वक पूरा करने की काबिलियत है.

इसी तरह, बिजनेस स्कूल्स स्टूडेंट्स के एकेडेमिक्स के अलावा भी अन्य आस्पेक्ट्स की जांच करने की कोशिश करते हैं जिनमें कैंडिडेट्स ने कुछ महारत या उपलब्धि प्राप्त की हो. यह कैंडिडेट्स की कोई हॉबी या कैंडिडेट्स के आस-पास घटने वाली विशेष घटनाओं की जानकारी या सामान्य जानकारी आदि कुछ भी हो सकता है. किसी एक्स्ट्रा-करीकुलर एरिया में महारत और दिलचस्पी दिखाने से, यह पता चलता है कि आप केवल ‘किताबी कीड़ा’ ही नहीं हो बल्कि आप अपने आस-पास के जीवन में भी पूरी दिलचस्पी रखते हो.

इसी तरह, अगर आपके पास वर्क-एक्सपीरियंस है तो बिजनेस स्कूल यह जानने की कोशिश करता है कि आपको अपने काम में, जिस कंपनी और इंडस्ट्री में आपने काम किया है, उसमें कितनी दिलचस्पी है? बिजनेस स्कूल यह भी पता करने की कोशिश करेगा कि जिस फील्ड में आपने काम किया है, उसके संबंध में सीरियस इकनोमिक या बिजनेस ट्रेंड्स के बारे में आप कितने जागरुक हैं?

इंडियन स्टूडेंट्स अपने एमबीए प्रोग्राम में सीखते हैं ये स्किल्स

किसी एमबीए प्रोग्राम के दौरान कोई स्टूडेंट 2 व्यापक श्रेणियों में स्किल्स प्राप्त करता है. पहली श्रेणी टेक्निकल या फंक्शनल स्किल्स हैं. ये स्किल्स फाइनेंस, एकाउंटिंग, ऑपरेशन्स और मार्केटिंग जैसे कोर बिजेनस फंडामेंटल्स से संबंधित हैं. किसी बिजनेस स्कूल में, आपको इन सभी बिजनेस फंडामेंटल्स के बारे में पूरी जानकारी या रिव्यु से संबंधित जानकारी प्राप्त होगी और बिजनेस करते समय इन फंडामेंटल्स का प्रैक्टिकल महत्व भी समझ में आएगा.

किसी एमबीए प्रोग्राम का दूसरा पहलू जिसे एमबीए स्टूडेंट्स अक्सर नज़रंदाज़ करते हैं, इस प्रोग्राम के बिहेवियरल आस्पेक्ट्स हैं. इन्हें आम बोलचाल की भाषा में सॉफ्ट स्किल्स के तौर पर भी जाना जाता है. बिहेवियरल स्किल्स बिजनेस मैनेजर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं. ये स्किल्स कई ऐसे लोगों के साथ काम करने की आपकी काबिलियत को बढ़ाते हैं, जो लोग जरुरी नहीं कि आपके जैसे विचार नहीं रखते हों. सॉफ्ट स्किल्स मैनेजर्स को झगड़ें निपटाने में मदद करते हैं और ये स्किल्स खासकर ऐसी परिस्थिति में जब काम करने वाले लोग और उनके काम एक-दूसरे पर निर्भर करते हों तो, मैनेजर्स को लोगों से प्रभावी तरीके से बातचीत करना सिखाते हैं.   

एक्सपर्ट के बारे में:

प्रोफेसर राजीव कुमार आईआईएम, कलकत्ता में ऑर्गनाइजेशनल बिहेवियर ग्रुप का हिस्सा हैं. उन्होंने  इंडियन इंस्टीट्यूट और मैनेजमेंट, अहमदाबाद से फेलोशिप (पीएचडी के समकक्ष) किया है. आईआईएम, कलकत्ता में फैकल्टी मेम्बर के तौर पर वे बिजनेस रिसर्च मेथड्स, ऑफिस में ह्यूमन बिहेवियर, डिज़ाइनिंग इफेक्टिव ऑर्गनाइजेशन्स, इंटरपर्सनल स्किल्स एंड लीडरशिप, जैसे विभिन्न अनिवार्य और इलेक्टिव सब्जेक्ट्स पढ़ाते हैं. एकेडेमिया में अपना करियर शुरू करने से पहले, उन्होंने हेविट एसोसिएट्स में एचआर कंसलटेंट के तौर पर काम किया था. इससे पहले उन्होंने राजस्थान और गुजरात में एक एनजीओ अर्थात सोसाइटी फॉर दी प्रमोशन ऑफ़ वेस्टलैंड्स डेवलपमेंट्स (एसपीडब्ल्यूडी) में भी 3+ वर्षों तक काम किया था.

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