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हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने से क्या होती हैं दिक्कतें; अगर जान जाएँगे तो रख पाएंगे अपने आपको तैयार

Apr 16, 2018 19:33 IST
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दोस्तों जैसा की आप सभी जानते है की jagranjosh.com एक ऐसी वेबसाइट है जो अपने पढ़ने वालों को उनकी ज़रूरत के हिसाब से लेख प्रदान कराती है. इस वेबसाइट के माध्यम से हम दोनों ही भाषाओं में लेख लिखते हैं.

बहुत सारे छात्रों का यह सवाल होता है कि मै तो हिंदी मीडियम से पढ़ाई कर रहा हूँ और मुझे यह समझ में नही आरहा है कि आखिर मै आगे जाकर उन बच्चों के साथ कैसे कम्पीट करूँगा जो पहले से ही अंग्रेजी में बहुत अच्छे हैं क्योंकि वोह इंग्लिश मीडियम से पढ़े हुए हैं.

दोस्तों आजके इस लेख में हम इसी बात पर चर्चा करने जारहे हैं और आपको कुछ ऐसी सच्चाई के बारे में बताने वाले है जिसको अगर आप जानलें तो आगे आने वाली दिक्कतों का हल अभी से शरू कर सकते हैं

अगर कोई ऐसा कहता है तो यह गलत होगा कि हिंदी और इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई करने वाले छात्रों में कोई फर्क नही होता है. असल में हम फर्क को समझ नही पाते  हैं .

हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों में सब्जेक्ट से सम्बंधित बहुत अच्छा ज्ञान होता है और यह देखा गया है कि कांसेप्ट पे उनकी काफी अच्छी पकड़ होती है.

हिंदी माध्यम के छात्रों को तब बहुत दिक्कत होती है जब अच्चानक उनको पूरा लेक्चर इंग्लिश में सुनना पड़े या किसी एकजाम की तेयारी के लिए जो अच्छी और संस्तुत(recommended) किताबें हों, वो भी अंग्रेजी में हों.

अक्सर हमने देखा है कि कक्षा 12 के बाद बहुत सारे बच्चे कम्पटीशन कि प्रिपरेशन करने किसी न किसी कोचिंग में जाते हैं और उनका पहला साल यही समझने में चला जाता है कि इंग्लिश को कैसे समझूँ.

साथ ही साथ उनका मनोबल भी गिरने लगता है कि मेरे साथ रहने वाला बच्चा सबकुछ समझ रहा है और वोह हर सवाल कर लेता है जबकि मई नही और उसी समय ये विचार भी सताने लगता है कि जब मैं अपने इस क्लासमेट से compete नही कर कर पारहा हूँ तो आल इंडिया लेवल में या स्टेट लेवल पर मैं कैसे कर पाउँगा.

दोस्तों जिन बातों की मैंने उपर चर्चा की है वो बिकुल देखि हुई बातें हैं.

हमने उपर बिलकुल साफ़ तौर पर यह बताया है कि हिंदी से पढ़ाई करने वाले छात्रों का विषय सम्बंधित ज्ञान बहुत अच्छा होता है और साथ ही साथ उनकी ग्रामर पर अच्छी पकड़ होती है

फिर सवाल यह आता है कि हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले बच्चे इंग्लिश बोलने में बहुत कमजोरे क्यों होते हैं ?

इसका सिर्फ एक ही कारण होता है कि उनको इंग्लिश बोलने का वातावरण नही मिलता और यह इस बात से सिद्ध होता है कि यही छात्र जब घर से बहार निकलता है और ऐसी यूनिवर्सिटी/ कॉलेज या फिर कोचिंग में जाता है जहाँ अंग्रेजी बोलने का माहौल होता है , तो कुछ महीने में ही अंग्रेजी बोलने लगता है.

अगर आप इंजीनियरिंग को चुन रहें हैं अपना करियर, तो ज़रूर जान लें ये खास बातें!!

आखीर इन दिक्कतों का क्या है हल?

दोस्तों इन दिक्कतों को हल करने के लिए किसी राकेट साइंस कि ज़रूरत नही है. किसी भी दिक्कत का हल बहुत आसान होजाता है अगर आपको उस दिक्कत के बारे में पता लग जाए. निचे दिए गए सुझावों को अगर आप अपने ज़िन्दगी में लाएंगे तो यकीन मानिये कि अंत में आपको इन तमाम दोकतों का सामना नही करना पड़ेगा.

A.  आप शुरू से ही अपने सब्जेक्ट्स की टेर्मिनोलोजीज़ को इंग्लिश में भी ज़रूर पढ़ें

उदाहरण:

  1. क्रमाकुंचन गति- इस शब्द की अंग्रेजी होगी Peristalsis Movement
  2. त्वरण- इस शब्द की अंग्रेजी होगी Acceleration
  3. संकर लवण- इस शब्द की अंग्रेजी होगी complex salt
  4. तंत्रिका तंत्र- इस शब्द की अंग्रेजी होगी Nervous System
  5. सांख्यिकीय- इस शब्द की अंग्रेजी होगी statistic
  6. प्रायिकता- इस शब्द की अंग्रेजी होगी Probability

इसतरह से आपकी अपने छेत्र में प्रयोग होने वाली अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ बन जाएगी और आप अपने क्लास में होने वाली दिक्कतों से बाख जाएँगे

B.  हमेशा अंग्रेजी बोलने का शौक पैदा करें

उपर के तरीके से आपके पास अच्छी खासी वोकेबुलरी जमा होजाएगी और आप इन्ही शब्दों का प्रयोग करके अपने टीचर और दोस्तों से अंग्रेजी में बात करें और कोशिश करें कि आप अंग्रेजी में दिए गए सवालों को हल करें

c. हमेशा अंग्रेजी सब- टाइटल वाली फिल्म देखें

उम्मीद है कि हमारा यह लेख हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए काफी मददगार होगा.

शुभकामनाएं

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