नए साल में करियर को बुलंदियों के शिखर तक ले जाने का जोश और जज्बा आपके तन-मन में भी अवश्य उमड रहा होगा। साथ ही, यह सवाल भी शायद जेहन में उठ रहा हो कि इस साल ऐसे कौन से क्षेत्र होंगे, जहां प्रोफेशनल्स की डिमांड सबसे ज्यादा रहेगी, या फिर किन क्षेत्रों के जरिये करियर को नया मोड और अलग आयाम दिया जा सकता है। ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब हम लाए हैं, आपके लिए जोश के इस अंक में।
ट्रेवल, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी
इस साल अक्टूबर महीने में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के मद्देनजर ट्रेवल, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर्स में बहार छाने की उम्मीद की जा रही है। अंग्रेजी और हिंदी पर अच्छी पकड के अलावा विदेशी भाषाओं का ज्ञान इस क्षेत्र में बेहतरीन संभावनाएं ला सकता है। जानकारों का कहना है कि इस साल इन क्षेत्रों में सपोर्टिव स्टाफ के लिए बडे पैमाने पर नई राहें खुलेंगी। जहां तक हॉस्पिटैलिटी की बात है, तो मैनपावर इंडिया के आंकडों के मुताबिक इस साल इस सेक्टर में 94 हजार नियुक्तियों का अनुमान लगाया गया है।
एजुकेशन इंडस्ट्री
शिक्षा का क्षेत्र जितनी तेजी से विस्तार ले रहा है, उसमें उतनी ही तेजी से निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ रही है। नए स्कूल और निजी यूनिवर्सिटीज के अलावा शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने वाली कंपनियां भी पिछले कुछ सालों में तेजी से उभरी हैं, जो स्कूल के टीचर्स को नई टेक्नोलॉजी की मदद से अच्छी शिक्षा देने की ट्रेनिंग देती हैं। बतौर शिक्षक भी इस साल करियर की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
हेल्थकेयर
हेल्थ एक ऐसा सेक्टर है, जो बाजार की तेजी और मंदी से परे है। इस बात का अंदाजा एसोचैम की रिपोर्ट से भी लगाया जा सकता है, जिसमें कहा गया है कि 2009 के दौरान भी यह सेक्टर 42.44 प्रतिशत की रफ्तार से बढता रहा। वैसे इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत जैसे विकासशील देश में डॉक्टर्स और नर्सेज की संख्या जरूरत के मुकाबले कहीं कम है।
यही नहीं हेल्थकेयर सेक्टर के इन हार्डकोर प्रोफेशनल्स के अलावा इस वर्ष सपोर्टिग स्टाफ की डिमांड भी तेज रहने वाली है। जिसमें रेडियोलॉजिस्ट, फीजियोथेरिपिस्ट, पैरामेडिकल सांइटिस्ट के अलावा एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ भी शामिल हैं। इस क्षेत्र के तेजी से बढने के पीछे भारत में लगतार बढते मेडिकल ट्यूरिज्म को भी बडा कारण माना जा रहा है। एसोचैम की रिपोर्ट की मानें तो तेजी से बढते भारतीय मेडिकल टूरिज्म का आकार 2015 तक 9500 करोड रुपये का होगा। ऐसे में 2010 के साथ आगामी वर्ष भी साइंस के विद्यार्थियों के लिए मददगार हो सकते हैं।
इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी
मंदी के दौर ने इस सेक्टर को जमकर परेशान किया, लेकिन इस साल से आईटी को काफी उम्मीदें हैं। अब जबकि मंदी के बादल छंटने लगे हैं, तो इस क्षेत्र में प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ रही है। फिर भी जानकारों का कहना है कि इस क्षेत्र में गेमिंग टेक्नोलॉजी या फिर प्रोग्रामिंग की स्पेसिफिक लैंग्वेजेज की डिमांड ज्यादा रहेगी। यही नहीं, एक अनुमान के मुताबिक, आनेवाले समय में बीपीओ और केपीओ के अलावा एलपीओ में लगभग 23 लाख नौकरियों की उम्मीद की जा रही है।
फाइनेंस सेक्टर
फाइनेंस सेक्टर की बात करें, तो पिछले कुछ सालों की तरह चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की डिमांड इस साल भी बरकरार रहेगी, जबकि बैंकिंग के लिहाज से भारत के सार्वजनिक और पब्लिक सेक्टर बैंकों में अच्छी संभावनाओं की तलाश की जा सकती है। आयरलैंड की रीसर्च ऐंड मार्केट्स के सर्वे में प्रकाशित आंकडों की मानें, तो तेजी से बढते भारतीय रीटेल बैंकिंग का आकार साल 2010 में 300 बलियन डॉलर को पार करता दिख सकता है। इसके अलावा, इंश्योरेंस सेक्टर में भी बडे पैमाने पर करियर के बेहतरीन विकल्प देखने को मिल सकते हैं।
कंस्ट्रक्शन
2009 की पहली दो तिमाहियां इस सेक्टर के लिए भी बेहद खराब साबित हुई, लेकिन इस साल से कंस्ट्रक्शन सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि सिविल इंजीनियर्स और स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स के अलावा मार्केटिंग प्रोफेशनल्स समेत प्रोजेक्ट मैनेजर्स और आर्किटेक्ट की जरूरत होगी। यही नहीं कंस्ट्रक्शन में ही शामिल किए जाने वाले रीटेल सेक्टर के बारे में एसोचैम की रिपोर्ट का कहना है कि आईटी के बाद यह ऐसा सेक्टर होगा, जिसमें संभावनाओं के दरवाजे सबसे ज्यादा खुलेंगे।
इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि इस सेक्टर को भी पंख लगते हैं तो ऐसे में मॉल मैनेजमेंट के प्राफेशनल्स की जरूरत बढती दिखेगी। इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन एक ऐसा सेक्टर माना जाता है जिसमें विविधता भरी संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
मैनेजमेंट
कंस्ट्रक्शन, रीटेल और आईटी में बूम आने की उम्मीदें प्रबल हो रही हैं। ऐसे में मैनेजमेंट के लिहाज से भी इस साल महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद की जा रही है। खास तौर से मार्केटिंग और फाइनेंस के क्षेत्र में मैनेजमेंट करने वालों के लिए सन् 2010 करियर को ऊंचाइयों पर पहुंचाने की सौगात ला सकता है।
पब्लिक रिलेशन और इवेंट मैनेजमेंट
कॉरपोरट कंपनियों के खास समाचारों को मीडिया तक पहुंचाने से लेकर उनके इवेंट्स को ऑर्गेनाइज करने का काम अब पीआर और इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां करने लगी हैं। पिछले कुछ सालों में ऐसा काम करने वाली कंपनियों की न सिर्फ संख्या बल्कि कारोबार भी बढा है। हिंदी और अंग्रेजी भाषा पर बेहतरीन पकड के साथ अगर आपमें लेखन कौशल है तो यह क्षेत्र आपको कामयाबी की मंजिल पर पहुंचाने से कतई नहीं चूकेगा।
एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी
पिछले कुछ सालों से एग्रीकल्चर के क्षेत्र में भी तकनीक का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। विज्ञान विषय से पढने वाले छात्र इस दिशा में भी संभावनाएं तलाश सकते हैं। एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी में भविष्य बनाने के लिहाज से बीटेक और एमटेक के अलावा बीएससी इन फूड टेक्नोलॉजी भी कर सकते हैं। निजी कंपनियां भी अब इस क्षेत्र में रुचि ले रही हैं, खासकर मेडिकल क्रॉप्स और फार्मिग के लिए एग्रीकल्चरल इंजीनियर्स की सहायता ही लेती हैं।
अन्य विकल्प
इन क्षेत्रों के अलावा जानकारों का कहना है कि मीडिया के क्षेत्र में अच्छे अवसरों की तलाश की जा सकती है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अलावा इंटरनेट पर किताबें पढने का चलन भी तेजी से फैल रहा है, ऐसे में यह साल इंटरनेट जर्नलिज्म के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसके अलावा ऐविएशन इंडस्ट्री पर नजर डालें, तो 2010 में ग्राउंड स्टाफ, केबिन क्रू और फ्लाइट डिस्पैच ऑफिसर्स की डिमांड में बढोतरी देखने को मिल सकती है।
(करियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा और जितिन चावला से बातचीत पर आधारित।)
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