कैट एग्जाम देने के पीछे अधिकतर स्टूडेंट्स का एक ही मकसद होता है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम)में एडमिशन। लेकिन कुछ प्रतिभाओं का ही आईआईएम में प्रवेश पाने का सपना हकीकत में बदलता है। शेष स्टूडेंट को कैट एलाइड 150 बी-स्कूलों में प्रवेश का ऑप्शन है, जहां कैट स्कोर के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। आप किसी कैट रिलेटेड बी-स्कूल में प्रवेश लेकर प्रबंधन की डिग्री हासिल कर सकते हैं। यह तभी संभव है, जब आप किसी अच्छे बी-स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन कर दें। यदि आप आवेदन से चूके तो टॉप बी-स्कूल में प्रवेश पाने से वंचित रह जाएंगे। इन ढेर सारे बी-स्कूलों की भीड में अच्छे संस्थान की खोज के लिए विशेषज्ञ की हेल्प लेने के साथ संस्थानों में जाकर उसकी गुणवत्ता की परख करना जरूरी है।
खुद को तौलें और लें निर्णय
कैट देने के बाद स्टूडेंट को स्वयं को परखना चाहिए कि वह कहां खडा है। इसके लिए वह आइआइएम के सभी संस्थानों की वेबसाइट देखकर एडमिशन का विवरण समझ ले। प्रत्येक आइआइएम के एडमिशन का क्राइटेरिया अलग-अलग है। उसी आधार पर दी गयी कैट परीक्षा का आकलन कर संभावित परसेंटाइल निकाल लें और फिर आकलन करें कि क्या उसे किसी आइआइएम में प्रवेश मिल सकता है। अगर नहीं, तो क्या किसी बी-स्कूल से प्रबंधन में डिग्री हासिल करना चाहता है। यदि हां तो वह किसी अच्छे बी-स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन कर दे। यदि उसने कैट के परिणाम आने की प्रतीक्षा की और किसी बी-स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन नहीं किया तो कै ट में अच्छे परसेंटाइल आने के बावजूद अच्छे स्कूल में प्रवेश पाने से वंचित हो जाएगा।
कैसे करें बी- स्कूल का चयन
कै ट एलाइड बी-स्कूल के चयन के लिए आपको पडताल कर आवेदन करना होगा, तभी प्रवेश संभव होगा। किसी बी-स्कूल में प्रवेश लेने से पूर्व संस्थान की संबद्धता, मान्यता, मैनेजमेंट, फैकल्टी और पढ रहे स्टूडेंट्स से मिलकर वहां के नियम कानून को जानना होगा। बी-स्कूल के चयन में विज्ञापन के मायाजाल से बचने के लिए स्वयं वहां जाकर स्कूल की गुणवत्ता को परखें और विशेषज्ञ से सलाह-मशविरा जरूर करें।
जानें मान्यता
आप जिस बिजनेस स्कूल से प्रबंधन की पढाई करने का निर्णय करने जा रहे हैं, उससे पहले बेहतर होगा कि आप जान लें कि उस संस्थान की मान्यता एआईसीटी या फिर किसी विश्वविद्यालय से है भी कि नहीं? अगर है तो संस्थान की संबद्धता किस आधार पर है। जिस आधार पर मान्यता मिली है, उसकी कसौटी पर वह कितना खरा है। यह जरूर जांचें कि संस्थान फुल टाइम डिग्री दे रहा है या फिर डिस्टेंस लर्निग डिग्री? यदि आप ऐसा करते हैं तो गुमराह होने के चांसेज कम हो सकते हैं।
फैकल्टी है रीढ
किसी भी संस्थान की फैकल्टी वहां की रीढ होती है। यदि फैकल्टी अच्छी है तो भविष्य भी गोल्डन संभव है। इसलिए स्कूल की फैकल्टी को पहली प्राथमिकता देते हुए संस्थान को वरीयता क्रम के फर्स्ट च्वाइस मे रखें। टीचर का बैक ग्राउंड क्या है अर्थात वह किस संस्थान से पास आउट है। कॅ रियर की दृष्टि से यह जानना महत्वपूर्ण है। विजिटिंग फैकल्टी क ा संस्थान और स्टैंडर्ड का अहम रोल होता है। यदि विजिटिंग फैकल्टी किसी आइआइएम जैसे संस्थान से है तो निश्चित आपको उस फील्ड में नई दिशा मिलेगी। यह सब जानकारी उस संस्थान में पढ रहे सीनियर्स से बेहतर और कोई नहीं दे पाएगा।
देखें रैंक और जानें प्लेसमेंट
कई कंपनियां संस्थान की रैकिंग्स के आधार पर प्लेसमेंट के लिए स्कूल को वरीयता देती हैं। इसलिए पिछले तीन वर्षो के रैंक को जरूर देखें। इसके लिए आप कॅरियर काउंसलर और बिजनेस पत्रिकाओं की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप छोटे-छोटे शहरों के बी-स्कूल कैंपस के प्लेसमेंट प्रणाली पर ध्यान दें, क्योंकि छोटे शहरों में 20-25 कंपनियों को लाने के लिए खासी मशक्कत करनी पडती है। इसलिए पिछले वर्षो में संस्थान में आई कंपनियों एवं प्लेसमेंट के बारे में जानकारी करें कि कितने बच्चों का प्लेसमेंट हुआ और उनका क्या पैकेज रहा है। सिक्योरिटी जमा कराकर नौकरी देनी वाली कंपनियों से सावधान रहें। कहीं ऐसा न हो सिक्योरिटी जमा कराने के बाद आपको नौकरी दें और आरोपित करके कुछ माह सेवाएं लेने के बाद निकाल दें।
जांच-पडताल कर चुनें बी-स्कूल
कैट रिलेटेड बी-स्कूल में एडमिशन लेने से पहले वहां का कोर्स स्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल इंटरफेस, एल्युमिनी सपोर्ट, कैम्पस प्लेसमेंट, पीपीओ (प्री प्लेसमेंट ऑफर) का रेसियो जानने के अलावा समर ट्रेनिंग के बारे में जान लें कि इंटर्नशिप पेड है या अनपेड। इसके अलावा नेशनल और इंटरनेशनल प्लेसमेंट स्थिति को समझने के साथ मिनिमम और मैक्सिमम सैलरी की पडताल जरूर करे लें। यह बिन्दु बी-स्कूल के चयन में आपकी खासी मद्द करेंगे। कोशिश करें कि बी-स्कूल में आवेदन फार्म भरने से पहले इसकी जानकारी कर लें तो बेहतर होगा।
अनिल सिंह
निदेशक, जेनिथ अकादमी
कॅरियर के लिए हर बिन्दु महत्वपूर्ण
बी-स्कूल में प्रवेश लेने से पूर्व प्लेसमेंट के बाद जॉब पाने वाले कैंडिडेट्स की सूची मांगिए। अगर वह देने में असमर्थ है, तो कतई प्रवेश न लें। एक बात और ध्यान रखें कि विज्ञापन की चकाचौंध में पांच सितारा या रिसार्ट जैसे महौल वाले संस्थान का चयन तो नहीं कर रहे हैं। इससे बचने के लिए संस्थान से जुडे आंकडे जरूर देखिए। निम्न बिन्दु पर गौर करना जरूरी है-
बेहतर संस्थान के लिए होम सिकनेस से बचें।
स्कूल से जुडी फैकल्टी को जरूर जानें।
टेलीफोनिक साक्षात्कार के बाद एडमिशन देने की प्रक्रिया से दूर रहें।
स्कूल के मैनेजमेंट के बारे में पडताल जरूर कर लें।
स्टूडेंट रुचि वाले संस्थान में ही प्रवेश को वरीयता दें।
स्कूल के पूर्व परिणामों का आकलन करना न भूलें।
डॉ. योगेश
बी स्कूल के लिए चयन ओर एडमिशन के लिए स्ट्रेटेजी
कैट एग्जाम देने के पीछे अधिकतर स्टूडेंट्स का एक ही मकसद होता है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम)में एडमिशन
Your career begins here! At Jagranjosh.com, our vision is to enable the youth to make informed life decisions, and our mission is to create credible and actionable content that answers questions or solves problems for India’s share of Next Billion Users. As India’s leading education and career guidance platform, we connect the dots for students, guiding them through every step of their journey—from excelling in school exams, board exams, and entrance tests to securing competitive jobs and building essential skills for their profession. With our deep expertise in exams and education, along with accurate information, expert insights, and interactive tools, we bridge the gap between education and opportunity, empowering students to confidently achieve their goals.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation