बजट 2019: इस बार अंतरिम बजट, जानिए अंतरिम और पूर्ण बजट में अंतर

Jan 31, 2019, 13:10 IST

अंतरिम बजट चुनावी वर्ष में एक प्रकार की आर्थिक व्यवस्था है जिसके तहत सरकार बनने तक सरकारी खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता पूरी की जाती है.

Budget 2019 session starts today
Budget 2019 session starts today

वित्त मंत्रालय द्वारा घोषणा की गई है कि वर्ष 2019-20 के लिए सरकार पूर्ण बजट की बजाय अंतरिम बजट पेश करेगी. अंतरिम बजट पेश होने की स्थिति में नई सरकार के गठन के बाद जुलाई में शेष वित्त वर्ष के लिए अनुपूरक बजट पेश करना होगा.

कुछ समय पूर्व ही अरुण जेटली की अस्वस्थता के कारण पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. इसलिए अपेक्षा की जा रही है कि पीयूष गोयल ही बजट पेश करेंगे. संसद का बजट सत्र 31 जनवरी 2019 से आरंभ होगा तथा 13 फरवरी 2019 तक चलेगा.

अंतरिम बजट क्या होता है?

•    अंतरिम बजट चुनावी वर्ष में एक प्रकार की आर्थिक व्यवस्था है जिसके तहत सरकार बनने तक सरकारी खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता पूरी की जाती है.

•    नई सरकार बनाने के लिए जो समय होता है, उस अवधि के लिए अंतरिम बजट संसद में पेश किया जाता है.

•    इस बजट में कोई भी ऐसा फैसला नहीं किया जाता है जिसमें ऐसे नीतिगत फैसले हों जिसके लिए संसद की मंजूरी लेनी पड़े या फिर कानून में संशोधन की जरूरत हो.

•    अंतरिम बजट की परंपरा है कि इसमें डायरेक्ट टैक्स, जिसमें इनकम टैक्स शामिल है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाता है.

•    अप्रत्यक्ष करों में भी कम बदलाव किया जाता है. सरकार यदि कोई चीज सस्ती करनी चाहे तो वह इंपोर्ट, एक्साइज या सर्विस टैक्स में थोड़ी राहत दे सकती है.

•    आम तौर पर हर सरकार की अपनी राजकोषीय योजनाएं होती हैं और वह उसी के मुताबिक धन का आवंटन करती हैं.

अंतरिम बजट और लेखानुदान (वोट ऑन अकाउंट) में अंतर

•    केंद्र सरकार जब पूरे वित्त वर्ष की बजाय कुछ महीनों के लिए संसद से आवश्यक खर्चों के लिए अनुमति मांगती है तो वह अंतरिम बजट की बजाय वोट ऑन अकाउंट अथवा लेखानुदान पेश कर सकती है.

•    अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट दोनों ही कुछ ही महीनों के लिए होते हैं लेकिन दोनों के पेश करने के तरीके में अंतर होता है.

•    अंतरिम बजट में केंद्र सरकार खर्च के अलावा राजस्व का भी ब्यौरा देती है जबकि लेखानुदान में सिर्फ खर्च के लिए संसद से मंजूरी मांगती है.

 



भारत में बजट कैसे पारित होता है?

•    वित्त मंत्रलाय द्वारा बजट तैयार किये जाने के बाद सरकार बजट पेश करने के लिए एक तारीख सुझाती है. इसके बाद लोकसभा सचिवालय के सेक्रेटरी जनरल राष्ट्रपति की इस पर मंजूरी मांगते हैं.

•    वित्त मंत्री लोकसभा में बजट पेश करते हैं. इसमें महत्वपूर्ण बिंदुओं और प्रस्तावों का जिक्र किया जाता है.

•    वित्त मंत्री के बजट भाषण के दो हिस्से होते हैं. पहले हिस्से में आर्थिक सर्वेक्षण और नीतिगत घोषणाओं का एलान होता है, दूसरे हिस्से में टैक्स से जुड़ी घोषणाएं होती हैं.

•    वित्त मंत्री के भाषण के बाद राज्य सभा के पटल पर ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ रखा जाता है.

•    बजट पेश किये जाने के बाद अगले दिन से बजट पर दो हिस्सों में चर्चा होती है – आम चर्चा और विस्तृत बहस.

•    सदन का कोई भी सदस्य वितरित अनुदान में कटौती की मांग कर सकता है. इसके लिए डिसअप्रूवल ऑफ पॉलिसी कट, इकोनॉमी कट, टोकन कट की मांग की जा सकती है.

•    इसके बाद लोकसभा में अप्रोप्रिएशन बिल वोटिंग के लिए पेश किया जाता है. अप्रोप्रिएशन बिल के बाद फाइनेंस बिल पर विचार किया जाता है. संसद इसे मनी बिल के तौर पर पास करती है.

•    बिल पेश किए जाने के 75 दिन के अंदर इसे दोनों सदनों और भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होती है. फाइनेंस बिल के पास होने और राष्ट्रपति के इस पर हस्ताक्षर होने के बाद बजट प्रक्रिया संपन्न हो जाती है.

Gorky Bakshi is a content writer with 9 years of experience in education in digital and print media. He is a post-graduate in Mass Communication
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