भारतीय वायुसेना (IAF) की विंग कमांडर एस धामी फ्लाइंग यूनिट की फ्लाइट कमांडर बनने वाली देश की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं. वे देश की पहली ऐसी महिला वायुसेना अधिकारी हैं जिन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है.
उन्होंने हाल ही में हिंडन वायुसैनिक अड्डे में चेतक हेलीकॉप्टर के फ्लाइट कमांडर का प्रभार ग्रहण किया है. विंग कमांडर एस धामी हिंडन एयरबेस पर ‘चेतक’ हेलिकॉप्टर की एक यूनिट की फ्लाइट कमांडर का जिम्मेदारी संभालेंगी.
वायुसेना की कमांड यूनिट में फ्लाइट कमांडर का पद दूसरे स्थान का पद है. भारतीय वायुसेना में साल 1994 में पहली बार महिलाओं को शामिल किया गया था. भारतीय वायुसेना भारतीय सशस्त्र सेना का एक अंग है जो वायु युद्ध, वायु सुरक्षा और वायु चौकसी का महत्वपूर्ण काम देश के लिए करती है.
स्थाई कमीशन कैसे मिलता है?
दिल्ली हाईकोर्ट में लंबी और बहुत कठिन कानूनी लड़ाई जीतने के बाद महिला अधिकारियों को अपने पुरुष समकक्षों के साथ ‘स्थाई कमीशन’ पर विचार करने का हक मिला है. स्थाई कमीशन के लिए चयन होने हेतु महिला ऑफिसर को कम से कम 13 साल तक अनुभव भारतीय वायुसेना में होनी चाहिए. महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत वायुसेना में नियुक्त की जाती है.
स्थाई कमीशन से क्या होगा फायदा?
महिलाओं हेतु स्थाई कमीशन लागू होने के कारण से महिला उम्मीदवार ज्यादा समय तक सेना में काम कर सकेंगी. इस कमीशन के तहत उन्हें कई अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी. स्थाई कमीशन से महिलाएं बीस साल तक काम कर सकेंगी तथा इसे बढ़ाया भी जा सकता है.
एस धामी के बारे में
• शालिजा धामी पंजाब के लुधियाना में पली-बढ़ी हैं. वे बचपन से ही पायलट बनना चाहती थी.
• विंग कमांडर एस धामी भारतीय वायुसेना की पहली महिला अधिकारी भी हैं जिन्हें लंबे कार्यकाल के लिए स्थायी कमीशन प्रदान किया जाएगा.
• उनके पास 2300 घंटे तक उड़ान भरने का अनुभव है.
• एस धामी ने 15 साल के अपने करियर में ‘चेतक’ और ‘चीता’ हेलिकॉप्टर उड़ाती रही हैं.
• चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों के लिए विंग कमांडर एस धामी भारतीय वायुसेना की पहली महिला योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं.
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