भारतीय नौसेना ने 31 अगस्त 2021 को रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) के साथ स्वदेश में ही विकसित नौसेना ड्रोन रोधी प्रणाली (एनएडीएस) की आपूर्ति के लिए समझौता किया है. यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने दी.
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एनएडीएस का विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है और इसका उत्पादन बीईएल कर रही है. यह देश में ही विकसित पहली ड्रोन रोधी प्रणाली है जिसे भारतीय सशस्त्र सेनाओं में शामिल किया जाना है.
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि बीईएल, डीआरडीओ और भारतीय नौसेना के वरिष्ट अधिकारियों की मौजूदगी में ये समझौता किया गया. समझौता में एनएडीएस सिस्टम के मोबाइल और स्टेटिक वर्जन शामिल है. मोबाइल वर्जन एक ट्रक पर लगाया गया है.
ड्रोन से पहली बार हमला
गौरतलब है कि इस साल जून में जम्मू स्थित वायुसेना के ठिकाने पर पाकिस्तान से संचालित आतंकवादियों ने दो ड्रोन से पहली बार हमला किया था, जिससे ड्रोन से गंभीर खतरा सामने आया था.
कब की जाएगी आपूर्ति
मंत्रालय ने बताया कि करार के बाद बहुत कम समय में भारतीय नौसेना को एनएडीएस के स्थायी और सचल संस्करण की आपूर्ति कर दी जाएगी.
ड्रोन रोधी प्रणाली: एक नजर में
बयान में कहा गया कि एनएडीएस प्रणाली तत्काल छोटे आकार के ड्रोन का पता लगा सकती है और लेजर आधारित ‘हथियार’ से लक्ष्य को नष्ट कर सकती है. मंत्रालय ने बताया कि एनएडीएस छोटे ड्रोन का पता लगाने और उन्हें जाम करने के लिए रडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल/इंफ्रा सेंसर और रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्टर का इस्तेमाल करती है.
रक्षा मंत्रालय का दावा है कि ये पहला स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम है जो सशस्त्र सेनाओं के बेड़े में शामिल किया गया है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये नेवल एंटी ड्रोन सिस्टम (एनएडीएस) डीआरडीओ ने तैयार किया है और बीईएल इसका उत्पादन कर रहा है. नेवल एंटी ड्रोन सिस्टम 'सॉफ्ट-किल' और 'हार्ड-किल' दोनों ही विकल्पों में उपलब्ध होगा.
गणतंत्र दिवस परेड के दौरान तैनात
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एनएडीएस को सबसे पहले इस साल गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सुरक्षा के लिए तैनात किया था और उसके बाद स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान इस प्रणाली की तैनाती की गई.
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