मारियो द्रागी बने इटली के नए प्रधानमंत्री

Feb 15, 2021, 15:39 IST

इटली के प्रधानमंत्री के तौर पर 73 साल के मारियो द्रागी की नियुक्ति से इटली में कई सप्ताह से कायम राजनीतिक अस्थिरता को खत्म कर दिया है. इटली अभी भी ऐसे स्वास्थ्य संकट की चपेट में है जिसने 93,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है.

Mario Draghi becomes Italy’s new Prime Minister
Mario Draghi becomes Italy’s new Prime Minister

13 फरवरी 2021 को यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पूर्व प्रमुख मारियो द्रागी ने इटली के नए प्रधानमंत्री के तौर पर, घातक महामारी कोविड - 19 और आर्थिक मंदी की पृष्ठभूमि के दौरान, औपचारिक रूप से शपथ ली.

इटली के प्रधानमंत्री के तौर पर 73 साल के मारियो द्रागी की नियुक्ति से इटली में कई सप्ताह से कायम राजनीतिक अस्थिरता को खत्म कर दिया है. इटली अभी भी ऐसे स्वास्थ्य संकट की चपेट में है जिसने 93,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है.

महत्वपूर्ण समय पर द्रागी ने संभाला कार्यभार

पिछले दिनों केंद्र-लेफ्ट गठबंधन सरकार के प्रमुख ग्यूसेप कोंटे के पतन के बाद, राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेल्ला द्वारा मारियो द्रागी को देश के शासन के लिए इतने महत्वपूर्ण समय में आमंत्रण दिया गया था.

द्रागी ने पिछले 10 दिनों में एक व्यापक आधार वाले गठबंधन को तैयार किया और 12 फरवरी की रात को, उन्होंने औपचारिक रूप से मैटरेल्ला के साथ आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री के पद को स्वीकार कर लिया. इस बैठक के बाद, उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से नए मंत्रिमंडल का खुलासा किया.

इटली में गठबंधन सरकार

मारियो द्रागी को इंद्रधनुष गठबंधन का समर्थन प्राप्त है जो वामपंथियों से लेकर मैटेओ साल्विनी के फ़ार-राइट लीग तक व्यापक है.

इस गठबंधन में लोकलुभावन फाइव स्टार मूवमेंट- M5S, सेंटर-लेफ्ट डेमोक्रेटिक पार्टी (PD), और इटालिया विवा - शामिल है, जिन्होंने पिछली सरकार को बनाया और फिर कोरोना वायरस महामारी से निपटने में असफल रहने के कारण सत्ता से हटा दिया.

मारियो द्रागी के लिए चुनौतियां

इटली को अपने नए प्रधानमंत्री से काफी उम्मीदें हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि, वे वर्ष, 2010 के ऋण संकट के बीच में यूरोज़ोन को बचाने के लिए 'जो भी होगा' करेंगे.

कोविड -19 और प्रतिबंधों की लहरों के कारण लागू शटडाउन ने अर्थव्यवस्था में वर्ष, 2020 में 8.9% तक मंदी छा गई थी और 4,20,000 से अधिक लोगों ने अपनी नौकरी खो दी, जिससे यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इटली की सबसे खराब मंदी रही.

किसी भी अन्य यूरोपीय संघ देश की तरह ही इटली भी, अपने टीकाकरण कार्यक्रम में पीछे रह गया है और इसने वितरण में देरी पर दोष लगाया. यूरोपीय संघ के रिकवरी फंड से 220 बिलियन यूरो से अधिक की धनराशि हासिल करने की इस देश को उम्मीद है.

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