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केंद्र सरकार ने उड़ान योजना के लिए 4,500 करोड़ रुपए की मंजूरी दी

उड़ान योजना के दो दौर में एयरलाइनों की ओर से अच्छी पहल की गयी और इस दौरान 43 हवाई पट्टियों पर पांच एयरलाइनों को 128 मार्ग आवंटित किए गए. इस परियोजना का फायदा छोटे शहरों और गांवों को मिलेगा.

Mar 8, 2019 15:24 IST
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केंद्र सरकार ने 07 मार्च 2019 को उड़ान योजना के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में बेकार पड़ी तथा कम इस्तेमाल वाली हवाई पटि्टयों को पूरी तरह से विकसित करने की समय सीमा बढ़ा दी है. इसके लिए सरकार ने 4500 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं.

इस परियोजना का फायदा छोटे शहरों और गांवों को मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों की कम इस्तेमाल होने वाली हवाई पट्टियों, देश की एयरपोर्ट अथॉरिटी, सिविल एनक्लेव, कम्युनिटी एंड पब्लिक सेक्टर यूनियन, हेलीपैड्स और वॉटर एयरोड्रोन के पुनर्विकास को मंजूरी दी है.

प्रभावः

इसके परिणामस्वरूप ‘बगैर उपयोग’ एवं ‘कम उपयोग’ वाले हवाई अड्डों के लिए उड़ानों का परिचालन शुरू होने पर छोटे शहरों/कस्बों की कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो जाएगी तथा इससे रोजगार सृजन एवं संबंधित बुनियादी ढांचागत विकास की दृष्टि से इन क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी आर्थिक विकास को और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा.

आरसीएस-उड़ान के तहत मुख्य बिंदु:

   क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के लिए बोलियों के अब तक के दो दौर में मंत्रालय को एयरलाइनों की ओर से व्यापक सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं.

   ‘उड़ान’ से जुड़ी बोलियों के प्रथम दौर में 31 मार्च 2017 को ‘बगैर उपयोग’ एवं ‘कम उपयोग’ वाले 43 हवाई अड्डों/हवाई पट्टियों के लिए पांच एयरलाइन ऑपरेटरों को कुल मिलाकर 128 मार्ग (रूट) सौंपे गए.

   आरसीएस से जुड़ी बोलियों के दूसरे दौर में एयरलाइन ऑपरेटरों की ओर से और भी ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं. इसके तहत जनवरी 2018 में 15 चयनित एयरलाइन ऑपरेटरों को 325 रूट सौंपे गए. ये रूट 86 प्रस्तावों के अंतर्गत आते हैं.

•   आरसीएस-उड़ान वर्जन 1.0 और 2.0 के दौरान 66 हवाई अड्डों और 31 हेलीपोर्टों (‘बगैर उपयोग’ वाले 28 हेलीपोर्ट एवं ‘बगैर उपयोग’ वाले 3 एयरपोर्ट) की पहचान की गई.

   उड़ान वर्जन 3.0 के दौरान तटीय क्षेत्रों में पर्यटन संभावनाएं बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर कई पर्यटन रूटों और विभिन्न वाटर एयरोड्रोम को कनेक्ट करने के लिए समुद्री विमानों (सीप्लेन) को इसमें शामिल किया गया.

क्या है उड़ान योजना?

उड़ान (UDAN) का मतलब है, 'उड़े देश का आम नागरिक'. योजना का मु्ख्य लक्ष्य देश के आम नागरिकों को सस्ती हवाई यात्रा मुहैया करवाना है. सरकार ने देश के छोटे व मझोले कस्बों में रहने वाले लोगों को बड़े नगरों से जोड़ने के लिए "उड़ान" नामक योजना का शुभारम्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिमला में 27 अप्रैल 2017 को किया गया था.

इस योजना के तहत लोग कम बजट में भी हवाई यात्रा का लुफ्त उठा सकते हैं क्योंकि इसके तहत एयर टिकट को काफी सामान्य रखा गया है जिसका खर्च आम आदमी आराम से उठा सकता है. उड़ान योजना के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना, रोजगार में बढ़ोतरी करने के साथ संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना भी है.

पृष्ठभूमि:

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण 2016-17 में अन्य बातों के अलावा ‘बगैर उपयोग’ एवं ‘कम उपयोग’ वाले हवाई अड्डों के पुनरुद्धार के लिए पर्याप्त प्रावधान करने की घोषणा की. मंत्रिमंडल ने राज्य सरकारों, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), सिविल एन्क्लेव और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसयू) के ‘बगैर उपयोग’ एवं ‘कम उपयोग’ वाले 50 हवाई अड्डों/हवाई पट्टियों के पुनरुद्धार से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी.

भारत की तटीय रेखा अत्यंत विशाल है जो लगभग 7500 किलोमीटर लंबी है. इसमें ऐसे अनेक जल स्थल भी शामिल हैं जिनका उपयोग वाटर एयरोड्रोम की स्थापना के लिए किया जा सकता है. भूमि पर अवस्थित हवाई अड्डों के साथ-साथ विभिन्न वाटर एयरोड्रोम के नेटवर्क से हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होगी और ये विशेषकर स्थानीय स्तर की कम दूरी वाली यात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे.

 

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