तमिलनाडु विधानसभा ने 13 सितंबर, 2021 को एक विधेयक पारित कर दिया है जो धार्मिक संस्थानों से संबंधित संपत्तियों के अतिक्रमण को एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाता है.
तमिलनाडु धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 में संशोधन की मांग वाला यह विधेयक 13 सितंबर को विधानसभा में पेश किया गया था और जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया है.
तमिलनाडु सरकार के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के नियंत्रण में लगभग 05 लाख एकड़ संपत्तियां हैं.
तमिलनाडु धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959
तमिलनाडु धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की धारा 79-B की उप-धारा (3) के अनुसार, कोई भी अदालत आयुक्त से लिखित में शिकायत के अलावा किसी धर्मार्थ या धार्मिक संस्था से संबंधित किसी भी संपत्ति के गैरकानूनी कब्जे के अपराध का संज्ञान नहीं लेगी.
अभी तक राज्य में मंदिर की जमीन पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ केवल हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के आयुक्त ही शिकायत दर्ज कराने के पात्र थे.
इस संशोधन से क्या बदलेगा?
तमिलनाडु धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 में संशोधन की मांग करने वाला यह विधेयक, जिसे तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित किया गया था, किसी को भी, जो धार्मिक संस्था के मामलों में रुचि रखता है, अतिक्रमणकारियों और मंदिर की भूमि के अतिक्रमण के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अधिकार देगा.
तमिलनाडु में इस बिल को पेश करने का प्रमुख कारण
हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री पीके शेखरबाबू, जिन्होंने यह नवीनतम विधेयक भी पेश किया है, ने कहा कि धार्मिक संस्थानों से संबंधित संपत्तियों का अतिक्रमण एक 'गंभीर प्रकृति' का अपराध है.
इसलिए, तमिलनाडु राज्य सरकार ने उपरोक्त अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाने और अधिनियम की धारा 79-B में संशोधन करने का निर्णय लिया है.
तमिलनाडु ने जिला समिति के सदस्यों के कार्यकाल को कम करने के लिए विधेयक को भी दी मंजूरी
तमिलनाडु सरकार ने एक अन्य विधेयक को भी अपनी मंजूरी दे दी है, जिसमें अधिनियम की धारा 7-A के तहत जिला समिति के सदस्यों के कार्यालय की अवधि को 03 वर्ष से घटाकर 02 वर्ष करने की मांग की गई थी.
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