भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ– इसरो) ने 4 अप्रैल 2014 को भारत के दूसरे क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह आईआरएनएसएस 1बी को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन से लांच किया.
आईआरएनएसएस श्रृंखला के लांच से भारत के पास खुद के लिए अपना विश्वसनीय और स्वतंत्र नेविगेशन संसाधन होगा.
ध्रुवीय उपग्रह यान (पीएसएलवी) सी24 ने शाम 5.14 बजे इस उपग्रह को ले कर अंतरिक्ष रवाना हुआ. आईआरएनएसएस (भारतीय क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह) श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने के 19 मिनट के चार चरणों के बाद प्रक्षेपित किया गया.
आईआरएनएसएस 1बी का यह लांच इसरो द्वारा पीएसएलवी श्रृंखला का 25वां सफल लांच था. इस सफल लांच ने भारत को अमेरिका, रूस, चीन, जापान और यूरोपीय देशों के समूह के काफी करीब ला दिया है.
आरआरएनएसएस श्रृंखला भारत को स्थल, हवाई और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, वाहनों की स्थिति का पता लगाने औऱ बेड़े प्रबंधन में मदद करेगा. यह पैदल और यात्रियों को दृष्य और ध्वनि नेविगेशन भी प्रदान करेगा.
भारतीय क्षेत्रीय नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) के बारे में
भारतीय क्षेत्रीय नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नेवीगेशनल सेटेलाइट सिस्टम है जिसका डिजाइन इस उद्देश्य को ध्यान में रख कर किया गया है कि यह भारत के उपर 10 मीटर की स्थित से स्थान की सटीकता और भारत के आसपास के इलाकों के बारे में 1500 किलोमीटर के दायरे में जानकारी मुहैया करा सके. इसरो के मुताबिक सेटेलाइट की श्रृंखला विभिन्न प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले उपयोगकर्ताओं को किसी भी मौसम में 24X7 सटीक वास्तविक समय पर स्थिति, नेविगेशन और टाइम (पीएनटी) सेवा प्रदान करेगा.
आईआरएनएसएस सिस्टम में मुख्य रूप से तीन घटक होते हैं:-
• अंतरिक्ष खंड ( तारामंडल में उपग्रहों और अंतरिक्ष में मिलने वाले संकेत– कॉन्टेलेशन ऑफ सेटेलाइट एंड सिग्नल– इन– स्पेस)
• भूमि खंड और उपयोगकर्ता खंड (ग्राउंड सेग्मेंट और यूजर सेग्मेंट)
आईआरएनएसएस कॉन्सटेलेशन में सात सेटेलाइट होते हैं. इन सातों सेटेलाइटों की स्थिति का प्लान इस प्रकार होता है:-
• तीन सेटेलाइट जियोस्टेशनरी इक्वेटोरियल ऑर्बिट (जीईओ 34 डिग्री पूर्व, 83 डिग्री पूर्व और 131.5 डिग्री पूर्व ) में स्थापित किया जाएगा.
• दो सेटेलाइटों में से प्रत्येक को जीयोसिन्क्रोनस ऑर्बिट (जीएसओ) में 55 डिग्री पूर्व और 111.5 डिग्री पूर्व पर भूमध्यरेखा पर काटते हुए 29 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किया जाएगा.
• जरूरत पड़ने पर दो अतिरिक्त उपग्रहों को भी स्थापित किए जाने की योजना है.
आईआरएनएसएस दो प्रकार के संकेत देगा एल–5 और एस– बैंड सेंट्र फ्रीक्वेंसी, जिसमें एल– बैंड सेंटर फ्रीक्वेंसी 1176.45 मेगाहर्ट्ज होगी जबकि एस बैंड सेंटर फ्रीक्वेंसी 2492.028 मेगाहर्ट्ज. एल–5 और एस– बैंड दोनों ही में दो डाउनलिंक्स होंदें. आईआरएनएसएस दो बुनियादी सेवाई प्रदान करेगा. य़े सेवाएं होंगी आम लोगों के लिए – स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस (एसपीएस) और विशेषाधिकार वाले उपयोगकर्ताओं के लिए प्रतिबंधित सेवाएं (आर एस ). इसका सबसे अच्छी बात यह है कि इस श्रृंखला के नेविगेशन सॉफ्टवेयर का विकास भारत में इसरो उपग्रह केंद्र में ही विकसित किया जा रहा है.
अंतरिक्ष योग्य रुबीडीयम एटोमिक फ्रीक्वेंसी स्टैंडर्ड विकसित करने के लिए इसरो ने एनपीएल के साथ करार किया है. इसके अलावा, 2014 के आखिर तक भारत दो उपग्रह और 2015 की शुरुआत में 3 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजेगा. ये प्रक्रिया कॉन्सटेलेशन को पूरा करेगी और विश्व में भारत को अनूठा स्थान भी दिलाएगी. भारत की योजना जून 2014 तक मार्क III सेटेलाइट लांच करने की भी है.
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