एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी (डीके जोशी) ने नौसेना पनडुब्बी आईएनएस सिन्धुरत्न में हुए हादसे के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नौसेना अध्यक्ष पद से 26 फरवरी 2014 को इस्तीफा दे दिया.
नौसेना प्रमुख ने यह कदम आईएनएस सिंधुरत्न में विस्फोट के बाद धुआं फैलने से सात जवानों के बेहोश होने और दो के लापता होने के कुछ ही घंटों के बाद उठाया. भारत सरकार ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया. एडमिरल डीके जोशी को 31 अगस्त 2012 को नौसना का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. एडमिरल डीके जोशी आजादी के बाद नैतिक आधार पर इस्तीफा देने वाले पहले रक्षा बल प्रमुख है.
रूस निर्मित किलो क्लास पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरत्न मुंबई बंदरगाह से 90 नॉटिकल मील की दूरी पर दुर्घटना ग्रस्त हो गई. उस समय आईएनएस सिंधुरत्न अभ्यास पर थी. आईएनएस सिंधुरत्न को नौ सेना में वर्ष 1988 में शामिल किया था.
सिंधु श्रेणी की पनडुब्बियों को भारत सरकार ने रूस से प्राप्त किया. आईएनएस सिन्धुरत्न, सिन्धुरक्षक श्रेणी की पनडुब्बी है. जिसका मुख्य रूप से इस्तेमाल प्रतिरक्षा या युद्धक परिस्थितियों में किया जा सकता है. इस श्रेणी की अन्य पनडुब्बियां रूस के सहयोग से निर्मित की गई हैं. जिनमें सिन्धुरत्न के अलावा सिन्धुघोष, सिन्धुध्वज, सिन्धुराज, सिन्धुवीर, सिन्धुकेसरी, सिन्धुविजय और सिन्धुशस्त्र शामिल है. इनमें सिन्धुशस्त्र सबसे आधुनिक पनडुब्बी है जिसे वर्ष 2000 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया. 300 मीटर गहराई तक गोता लगानेवाली इन पनडुब्बियों से तारपीडो मिसाइलें दागी जा सकती हैं.
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