केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जारी किया. केंद्रीय सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने यह अनुमान 7 फरवरी 2012 को जारी किया. वित्त वर्ष 2010-11 में सकल घरेलू उत्पाद का अनुमान 8.4 प्रतिशत लगाया गया था. वित्तीय वर्ष 2009-10 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब सकल घरेलू उत्पाद की दर का अनुमान सात प्रतिशत से कम आंका गया.
वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी और ऊंची ब्याज दरों के कारण वर्ष 2011-12 में भारत में विनिर्माण क्षेत्र का विकास प्रभावित हुआ. कृषि क्षेत्र की विकास दर वित्त वर्ष 2010-11 के मुकाबले आधी से भी कम रह गई. जबकि खनन क्षेत्र में विकास दर शून्य से भी नीचे चली गई. केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के आंकड़ों के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2011-12 में घटकर 2.5 प्रतिशत रहेगी. इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह सात प्रतिशत थी. विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी इस वित्त वर्ष में घटकर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इससे पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में यह 7.6 प्रतिशत थी.
केंद्रीय सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2011-12 में खनन क्षेत्र में 2.2 फीसद की नकारात्मक वृद्धि रहेगी. वाणिज्य, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है जबकि वित्त, बीमा, रियल ईस्टेट और व्यापार सेवाओं के क्षेत्र में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है.
ज्ञातव्य हो कि भारतीय रिजर्व बैंक ने जनवरी 2012 में मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था.
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