तेल कंपनियों ने देश भर में पेट्रोल के दामों में 4.99 रुपए से लेकर 5.01 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की. इस वृद्धि से नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 58.37रुपए से बढ़कर 63.37 रुपए हो गई. यह वृद्धि 14 मई 2010 को रात 12 बजे से ही लागू हो गई. पेट्रोल की कीमतों में हुई यह अब तक की सबसे अधिक वृद्धि है. हालांकि रसोई गैस, डीजल और केरोसीन को फिलहाल वृद्धि से अलग रखा गया. तेल कंपनियां जनवरी 2011 से ही सरकार पर पेट्रोल की कीमत बढ़ाने का दबाव बनाए हुए थीं. 13 मई 2011 को ही पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए. यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में अब तक पेट्रोल की कीमतों में करीब 23 रुपए प्रति लीटर की बढोत्तरी हो चुकी है.
विदित हो कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत जनवरी 2009 से मई 2011 के मध्य सर्वोच्च स्तर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी थी. केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव से पहले तेल के दाम बढ़ाकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती थी. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से तेल कंपनियों को पेट्रोल की मौजूदा कीमत पर घाटा उठाना पड़ रहा था. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत के बराबर लाने के लिए तेल कंपनियों को करीब साढ़े दस रुपए प्रति लीटर की वृद्धि करनी पड़ती. इस लिहाज से बहुत संभव है कि तेल कंपनियां एक बार फिर से पेट्रोल के दाम बढ़ाएं. पेट्रोल की कीमतों को सरकार ने जून 2010 में नियंत्रणमुक्त कर दिया था.
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