5वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (2013) दक्षिण अफ्रीका स्थित डरबन में 25 मार्च 2013 से 28 मार्च 2013 तक सम्पन्न हुआ. पहली बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में किया गया. इसी के साथ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का पहला चक्र सम्पन्न हुआ. वर्ष 2012 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया था. 5वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का थीम, ब्रिक्स एंड अफ्रीका: पार्टनरशिप फॉर डेवलपमेन्ट, इंटीग्रेशन और इंडस्ट्रिलाइज़ेशन रहा. छठा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वर्ष 2014 में ब्राजील में आयोजित किया जाना है.
5वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (2013) के मुख्य बिंदु
• ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिणी अफ्रीका के नेता एक व्यापार परिषद का गठन करने और कुछ विशेषज्ञ केंद्र स्थापित करने पर सहमत हुए. दक्षिण अफ्रीका के किसी प्रतिनिधि को ही इस व्यापार परिषद का अध्यक्ष बनाया जाना है.
• वित्तीय और आर्थिक क्षेत्रों के अलावा, सूचना सुरक्षा, नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई, शिक्षा के क्षेत्र में आदान-प्रदान, आदि क्षेत्रों में सहयोग पर भी समझौते हुए.
• अफ़्रीका के विकास के लिए उसकी बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं में मिलकर निवेश किया जाना है.
• डरबन में मुख्य तौर पर बातचीत उन समस्याओं और सवालों पर हुई, जो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने से सम्बन्ध रखते हैं, क्योंकि विश्व की अर्थव्यवस्था पिछले 5 वर्ष से मन्दी में फंसी हुई है.
• ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विश्व राजनीति से जुड़े कुछ सवालों पर भी चर्चा की गई. विशेष रूप से ब्रिक्स-दल के देशों के नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि सीरिया सम्बन्धी कार्यदल की जिनेवा विज्ञप्ति प्रासंगिक है.
• शिखर सम्मेलन में स्वैप मुद्रा यानि विनिमय धनराशि के रूप में एक आरक्षित मुद्रा कोष की स्थापना पर विचार-विमर्श किया गया. इस कोष में 100 अरब डॉलर जमा किए जा सकते हैं. आवश्यकता पड़ने पर इसी कोष से किसी भी ब्रिक्स देश को उसका अपना भुगतान संतुलन बनाए रखने के लिए वित्तीय सहायता दी जानी है.
• ब्रिक्स देशों के वित्तीय सहायता कोष में 100 अरब डॉलर की धनराशि जमा करने के लिए चीन 41 अरब डॉलर, रूस, भारत और ब्राज़ील प्रत्येक 18-18 अरब डॉलर और दक्षिणी अफ्रीका 5 अरब डॉलर दे सकते हैं.
• विकासशील देशों में दीर्घावधि आर्थिक सहायता और निवेश की कमी के कारण बुनियादी सुविधाओं के विकास की चुनौतियां हैं. इसके लिए ब्रिक्स देशों और अन्य विकासशील देशों की सहायता के लिए एक नए विकास बैंक की स्थापना के बारे में आपसी सहमति जताई.
• इस सम्मेलन से ब्रिक्स संगठन देशों के बीच एकजुटता तथा विश्वशांति, स्थिरता, विकास और सहयोग के लिए सकारात्मक प्रतिबद्धता बढ़ी है.
• अफ्रीका के विकास तथा गरीबी उन्मूलन के लिए क्षेत्रीय सहयोग को महत्त्वपूर्ण बताते हुए ब्रिक्स देशों ने उपमहाद्वीप की एकीकरण प्रक्रियाओं के प्रति समर्थन दोहराया.
• सदस्य देशों ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, जानकारी के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और अफ्रीका से विविध आयात को बढावा देने के जरिए अफ्रीकी देशों के औद्योगिक विकास के प्रति समर्थन व्यक्त किया.
• अफ्रीका में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए मिलकर धन जुटाने के लिए एक बहुस्तरीय समझौता किया गया.
• संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को और अधिक प्रतिनिधित्व वाली प्रभावी और कुशल संस्था बनाने पर चर्चा की गई.
• सम्मेलन में सभी रूपों में आतंकवाद की भर्त्सना की गई.
ब्रिक्स देशों के मध्य सहयोग के नए क्षेत्र
• ब्रिक्स सार्वजनिक कूटनीति फोरम.
• ब्रिक्स भ्रष्टाचार विरोधी सहयोग.
• ब्रिक्स राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियां/राज्य के स्वामित्व वाले उद्यम.
• राष्ट्रीय नशा नियंत्रण के लिए जिम्मेदार एजेंसियां.
• ब्रिक्स वर्चुअल सचिवालय.
• ब्रिक्स युवा नीति वार्ता.
• पर्यटन.
• ऊर्जा.
• खेल और विशाल खेल आयोजन.
ब्रिक्स
ब्रिक्स विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं वाले विकासशील देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का संगठन है. दक्षिण अफ्रीका वर्ष 2010 में इस समूह में शामिल हुआ. इससे पहले इस समूह को ब्रिक के नाम से जाना जाता था. ब्रिक देशों की पहली आधिकारिक बैठक 16 जून 2009 को रूस के येकेटिनबर्ग में हुई थी. ब्रिक्स का उद्देश्य शांति, सुरक्षा, विकास और सहयोग प्राप्त करना है. ब्रिक्स विश्व में मानवता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देना के साथ ही एक अधिक न्यायसंगत और निष्पक्ष विश्व की स्थापना करना चाहता है.
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