दक्षिण एशियाई मानसून 1980 से चरम आर्द्र और शुष्क अवधि में खतरनाक वृद्धि का सामना कर रहा है, यह स्टैन्फोर्ड के वैज्ञानिकों के द्वारा किये गये एक अध्ययन में ख़ुलासा हुआ हैं. यह एक जर्नल नेचर क्लाइमेट चेंज के अप्रैल 2014 के अंक में प्रकाशित हुआ था.
अध्ययन ने इस क्षेत्र में चरम आर्द्र और शुष्क अवधि के प्रतिरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन पाया, जिसनें हाल के वर्षों में मध्य भारत में सूखा और बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया हैं.
शोधकर्ताओं ने पाया हैं की मानसून ऋतु के दौरान औसत कुल वर्षा की मात्रा में कमी आयीं हैं लेकिन वर्षा के प्रमुख महीनों के दौरान वर्षा की परिवर्तनशीलता बढ़ गई है. विशेष रूप से चरम आर्द्र और शुष्क अवधि की आवृत्ति में वृद्धि हुई हैं, जो की क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं विशेष रूप से फसल की उपज पर.
उदाहरण के लिए, महत्वपूर्ण फसलों के विकास के चरणों के समय कई दिनों तक वर्षा नहीं होने से ऊपज कम हो सकतीं या फसल नष्ट हो सकती हैं और संक्षिप्त अवधि के लिए बहुत भारी वर्षा मानवीय आपदा का काऱण बन सकती हैं जैसा की मुंबई में 2005 में हुआ.
उन्होंने वायुमंडलीय परिवर्तनों जैसे पवनों एवं आर्द्रता, जो की संभवतः चरम आर्द्र और शुष्क अवधि के लिए उत्तरदायी हैं का भी पता लगाया.अगला कदम वायुमंडल में परिवर्तन लाने वाले कारकों की जांच करने से हैं. चूँकि भारत एक जटिल क्षेत्र हैँ ,शोधकर्ता वैश्विक तापन या कोई और कारण जो की अत्यधिक एवं बारंबार शुष्क अवधि को उत्पन्न कर रहा हैं की ओर इंगित करने से पहले सुनिश्चित होना चाहते हैं.
जलवायु वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों ने परस्पर सहयोग से दुर्लभ भूभौतिकीय घटनाओं का विश्लेषण करने के लिए सांख्यिकीय तरीकों का उपयोग करने पर ध्यान केन्द्रित किया हैं. इस टीम ने पिछले साठ वर्षों की अवधि में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और अन्य स्रोतों से एकत्रित वर्षा के आंकड़ों की तुलना की साथ ही सर्वाधिक वर्षा प्रतिरूप वाले दो समय अवधि 1950 से 1980 एवं 1981 से 2011 की तुलना की.
भारत में मानसून का प्रतिरूप
दक्षिण एशियाई ग्रीष्म मानसून पवनों से संचलित एकवार्षिक मौसमी परिघटना हैं जिससे भारत में वार्षिक वर्षा का 85 प्रतिशत भाग प्राप्त होता हैं. यह भारत के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है.
भारत में मानसून आमतौर पर दक्षिण भारत में शुरू होता है और संपूर्ण उपमहाद्वीप को पार करता हैं. मानसून का मौसम जून में शुरू होता है और सितंबर माह तक रहता है. मानसून अवधि के महीनों के दौरान चरम वर्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी की इससे प्राप्त कुल जल की मात्रा.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation