प्रणब मुखर्जी ने 25 जुलाई 2012 को भारत के 14वें राष्ट्रपति पद की शपथ ली. उन्हें प्रात: 11:30 बजे संसद के केंद्रीय कक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एसएच कपाडिया ने राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई. प्रणब मुखर्जी ने प्रतिभा देवी सिंह पाटील का स्थान लिया.
प्रणब मुखर्जी ने अंग्रेजी में ईश्वर के नाम पर संविधान एवं विधि के संरक्षण और सुरक्षा की शपथ ली. उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई. प्रणब मुखर्जी ने शपथ ग्रहण करने से जुड़े रजिस्टर पर हस्ताक्षर किया.
राष्ट्रपति भवन से भारत की 13वीं राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटील और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का काफिला संसद भवन परिसर पहुंचा. केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति पद का शपथ समारोह आयोजित किया गया. शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 13 तालकटोरा रोड स्थित अपने निवास स्थान पर नहीं लौट सकेंगे. उन्हें राष्ट्रपति भवन में मेहमानों के लिए आरक्षित अपार्टमेंट में कुछ दिन रूकना होगा.
भारत के विभिन्न संवैधानिक अधिकारियों की शपथ का प्रारूप भारत के संविधान की तीसरी अनुसूची में दिया गया है. भारत के राष्ट्रपति की शपथ की व्यवस्था को भारत के संविधान के अनुच्छेद 60 में रखा गया है.
भारत के राष्ट्रपति की शपथ
अनुच्छेद 60. राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान- प्रत्येक राष्ट्रपति और प्रत्येक व्यक्ति, जो राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, अपना पद ग्रहण करने से पहले भारत के मुख्य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उच्चतम न्यायालय के उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष निम्नलिखित प्रारूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताज्ञर करेगा, अर्थात्:-
ईश्वर की शपथ लेता हूं
"मैं, अमुक--------------------------- कि मैं श्रद्धापूर्वक भारत के राष्ट्रपति के पद का कार्यपालन
सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं
(अथवा राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन) करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा।"।
भारत के राष्ट्रपति की शक्तियां और अधिकार
• भारत का राष्ट्रपति राष्ट्रप्रमुख, भारत का प्रथम नागरिक और भारतीय सशस्त्र सेनाओं का प्रमुख सेनापति है.
• भारत के संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी. अनुच्छेद 74(1) के अनुसार राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही किया जा सकेगा.
• संविधान के 72वें अनुच्छेद के तरह राष्ट्रपति के पास न्यायिक शक्तियां होती हैं. वह दंड का उन्मूलन ,क्षमा, आहरण, परिहरण, परिवर्तन कर सकता है.
• भारत के राष्ट्रपति के पास वीटो शक्ति होती है.
• राष्ट्रपति के पास संसदीय शक्ति भी होती है. राष्ट्रपति संसद का अंग होता है. कोई भी बिल बिना उसकी स्वीकृति के पास नहीं हो सकता अथवा सदन में ही नहीं लाया जा सकता है.
• राष्ट्रपति के पास संसद के सदनों को आहूत करन या उसका सत्रावसान करने और लोक सभा का विघटन करने की शक्ति है.
• राष्ट्रपति के पास विवेकाधीन शक्तियां भी होती हैं. भारत के संविधान के अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को समय समय पर मिलकर राज्य के मामलों तथा भावी विधेयकों के बारे में सूचना देगा, राष्ट्रपति सूचना प्राप्ति का अधिकार रखता है. भारत के संविधान का अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री पर एक संवैधानिक उत्तरदायित्व रखता है.
• जब कोई राजनैतिक दल लोकसभा में बहुमत नहीं पा सके तब राष्ट्रपति अपने विवेकानुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है.
• यदि मंत्रिपरिषद को बहुमत प्राप्त नहीं है तो लोकसभा का विघटन भी राष्ट्रपति की विवेक शक्ति के दायरे में आ जाता है.
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