भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ ) के तहत रेपो दर में .25 प्रतिशत वृद्धि की. जिससे रेपो दर 7.75 प्रतिशत से बढ़कर 8.0 प्रतिशत हो गई. इसके अलावा, इसके शुद्ध मांग और समय दायित्व (एनडीटीएल) में बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर ) में कोई परिवर्तन ना करते हुए 4 प्रतिशत ही रखा गया गया.
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर बढ़ाने और अपरिवर्तित सीआरआर रखने का निर्णय की घोषणा 28 जनवरी 2014 को अपनी तीसरी तिमाही मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद की. नतीजतन, एलएएफ के तहत रिवर्स रेपो दर 7 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिग फैसिलिटी (एमएसएफ ) दर एवं बैंक दर 9.0 प्रतिशत है.
तीसरी तिमाही नीति समीक्षा के मुख्य आकर्षण
• वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ रही घरेलू अनिश्चिता की संभावनाएं कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं के चारों ओर बनी हुई हैं. वित्तीय बाजार को छूट देना एक स्पष्ट संभावित खतरा है.
• रबी की बुआई में एक मजबूत बढ़त के बावजूद घरेलू स्तर पर वित्तवर्ष 2013-14 की तीसरी तिमाही में विकास की गति के कुछ नुकसान होने की संभावना है.
• वित्तवर्ष 2013-14 के लिए चालू खाता घाटा (सीएडी) वित्तवर्ष 2012-13 के 4.8 प्रतिशत की तुलना में सकल घरेलू उत्पाद के 2.5 प्रतिशत से नीचे रहने की संभावना है.
• आगामी 12 माह के शीर्ष , और वर्तमान नीति के रुख के साथ वित्तवर्ष 2014-15 में सीपीआई मुद्रास्फीति का 8 प्रतिशत के पार होने का खतरा है.
• वास्तविक जीडीपी विकास दर 5.5 फीसदी के केंद्रीय अनुमान के आसपास संतुलित जोखिम के साथ वित्तवर्ष 2014-15 में 5 से 6 प्रतिशत की एक श्रृंखला और वित्तवर्ष 2013-14 में 5 प्रतिशत से नीचे होने उम्मीद की जा सकती है.
• डॉ. उर्जित पटेल समिति की सिफारिश के बाद मौद्रिक नीति समीक्षा आमतौर पर व्यापक आर्थिक और वित्तीय डाटा की उपलब्धता के साथ लगातार दो मासिक चक्र में शुरू हो जाएगी. तदनुसार अगली नीति की समीक्षा 1 अप्रैल 2014 को होगी.
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