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कुतुब मीनार : सल्तनतकालीन स्थापत्य का अद्भुत नमूना

दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार विश्व की सबसे ऊँची ईंटों से बनी मीनार है, जिसकी ऊँचाई 72.5 मीटर है | इसका धरातलीय व्यास 14.32  मीटर और शीर्ष बिन्दु का व्यास 2.75  मीटर है | कुतुबुद्दीन ऐबक ने वर्ष 1199 में क़ुतुब मीनार का निर्माण शुरू करवाया था, लेकिन उसके दामाद एवं उत्तराधिकारी शमशुद्दीन इल्तुतमिश ने इसका निर्माण कार्य पूरा कराया|
Mar 11, 2016 10:11 IST
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दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार विश्व की सबसे ऊँची ईंटों से बनी मीनार और ‘विश्व विरासत स्थल’ है | वास्तव में कुतुब मीनार सल्तनतकालीन स्थापत्य का अद्भुत नमूना है, जिसका निर्माण तो कुतुबुद्दीन ऐबक ने प्रारम्भ कराया था लेकिन इल्तुत्मिश, अलाउद्दीन खिलजी, मुहम्मद बिन तुगलक व फिरोज़शाह तुगलक जैसे शासकों ने भी इसके निर्माण या मरम्मत कार्य में भूमिका निभाई थी |
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कुतुब मीनार से संबन्धित तथ्य:

I. गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने वर्ष 1199 में क़ुतुब मीनार का निर्माण शुरू करवाया था लेकिन उसके दामाद एवं उत्तराधिकारी शमशुद्दीन इल्तुतमिश ने इसका निर्माण कार्य पूरा कराया।
II. कुतुब मीनार का नाम ख़्वाजा क़ुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया था |
III. कुतुब मीनार की ऊँचाई 72.5 मीटर है | इसका धरतलीय व्यास 14.32  मीटर और शीर्ष बिन्दु का व्यास 2.75  मीटर है |  
IV. कुतुब मीनार ईंटों से निर्मित विश्व की सबसे ऊँची मीनार (Brick Minaret) भी है |
V. क़ुतुब मीनार का प्रयोग इसके पास स्थित मस्जिद की मीनार के रूप में होता था और यहाँ से अजान दी जाती थी।
VI. कुतुब मीनार 1326 ई. में क्षतिग्रस्त हो गई थी और मुस्लिम सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने इसकी मरम्मत करवायी थी। इसके बाद में 1368 ई. में मुस्लिम सुल्तान फ़िरोज़शाह तुग़लक़ ने इसकी ऊपरी मंज़िल को हटाकर इसमें दो नई मंज़िलें और जुड़वा दीं थीं।
VII. पाँच मंज़िला कुतुब मीनार की तीन मंज़िलें लाल बलुआ पत्थर से एवं अन्य दो मंज़िलें संगमरमर एवं लाल बलुआ पत्थर से बनाई गयी हैं और प्रत्येक मंज़िल के आगे बॉलकनी स्थित है।
VIII. कुतुब मीनार परिसर में स्थित लौह स्तंभ सैकड़ों वर्ष पुराना है, लेकिन उसमें अभी तक जंग नहीं लगी है |

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IX. कुतुब मीनार परिसर में मस्जिद के पास स्थित लौह स्तंभ का निर्माण चौथी सदी में हुआ माना जाता है | इस  लौह स्तंभ की ऊँचाई 7 मीटर है |

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X. कुतुब मीनार परिसर में कुतुब मीनार,कुब्बत-उल-इस्लाम मस्जिद, अलाई मीनार, आली दरवाजा, लौह स्तंभ और इल्तुत्मिश का मकबरा स्थित है |
XI. क़ुतुब मीनार में मूल रूप से सात मंज़िलें थी लेकिन वर्तमान इसकी पाँच मंज़िलें ही शेष है |
XII. अलाउद्दीन ने इमारत के पश्चिमी दरवाजे अर्थात ‘अलाई दरवाजे’ का निर्माण कार्य पूर्ण कराया | इसका निर्माण 1311 ई. में लाल बलुआ पत्थर से किया गया था और यह कुतुब मीनार के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है |

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XIII. कुतुब मीनार परिसर के ही उत्तर-पश्चिम में इल्तुत्मिश का मकबरा स्थित है ,जिसका निर्माण 1235 ई. में किया गया था | यह मकबरा भारत में किसी मुस्लिम शासक द्वारा स्वयं के जीवित रहते हुये अपने लिए बनवाया गया पहला मकबरा है |
XIV. वर्ष 1983 में युनेस्को द्वारा इसे ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया |
XV. क़ुतुब मीनार में 379 सीढ़ियाँ पायी जाती हैं|
XVI. कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुब्बत-उल-इस्लाम मस्जिद की गणना भारत में निर्मित कुछेक पहली मस्जिदों में की जाती है |