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पानीपत का प्रथम युद्ध और खानवा की लड़ाई

पानीपत के युद्ध ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना के लिए नया मार्ग प्रदान किया और दिल्ली सल्तनत के युग को पूरी तरह से समाप्त कर दिया.
Aug 22, 2014 12:19 IST
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सुल्तान इब्राहिम लोदी ने 1 लाख सैनिकों और 300 युद्ध हाथियों की फौज का नेतृत्व इस युद्ध में किया था जबकि बाबर की सेना बहुत ही छोटी थी लेकिन उसकी खासियत थी की उसकी सेना पूरी तरह से रणनीतिक रूप से व्यवस्थित सेना थी. बाबर ने इस युद्ध में बंदूकें और सैन्य तकनीक का इस्तेमाल किया था जो बाबर को युद्ध में विजित करने में सहायक साबित हुए.

इस युद्ध में बाबर के बंदूकों के सामने इब्राहीम लोदी की सेना टिक ना सकी और पल भर में ही धरासाई हो गयी. युद्ध भूमि में ही इब्राहीम लोदी मारा गया.

पानीपत की लड़ाई की मुख्य विशेषताएं

• बंदूकें और सैन्य तकनीक से लड़ी गयी यह प्रथम युद्ध प्रणाली थी जिसने बाबर को निर्णायक विजय प्रदान किया. इस युद्ध से यह बात साबित हुई की प्रौद्योगिकी के समक्ष संख्याबल बिल्कुल नगण्य है और इसकी बदौलत किसी भी युद्ध को जीता जा सकता है इस तथ्य की स्थापना की.

• पानीपत के युद्ध ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना के लिए नया मार्ग प्रदान किया और दिल्ली सल्तनत के युग को पूरी तरह से समाप्त का दिया.

• बाबर अपने लोगों के बीच धन और कीमती पत्थरों के वितरण के कारण कलन्दर की उपाधि से सम्मानित किया गया.

खानवा की लड़ाई

पानीपत की लड़ाई जीतने के बाद  बाबर ने राणा सांगा जोकि अपने आप को  दुर्जेय राजपूत राजा मानता था की ओर ध्यान दिया. 16 मार्च 1527 ईस्वी में बाबर और राणा सांगा की सेनाओं के मध्य खानवा के मैदान में युद्ध हुआ. एक बार फिर से बाबर की बंदूकें और उसकी सैन्य पद्धति ने विपक्ष शिविर में कहर बरपा दिया. राणा सांगा के नेतृत्व में सभी राजपूत शासक और उनकी सेना पराजित हो गयी. इस तरह बाबर दिल्ली का निर्विवाद शासक बन गया. को हरा दिया और बाबर भारत के निर्विवाद शासक बन गया. वास्तव में, खानवा  की लड़ाई बाबर के लिए पानीपत की लड़ाई से अधिक महत्वपूर्ण था.

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