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राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा

केंद्र सरकार उन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देती है जिनके इलाके दुर्गम होते हैं। साथ ही प्रदेश का एक खास क्षेत्र इंटरनैशनल सीमा से लगा हो। वह क्षेत्र देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। ज्यादातर पहाड़ी राज्यों को विशेष राज्य दर्जा मिला है। फिलहाल भारत में 28 राज्यों में से 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला है। इसमें पूर्वोंत्तर के लगभग सभी राज्य हैं।
Dec 24, 2015 11:41 IST
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किसे मिलता है विशेष राज्य का दर्जा ?

केंद्र सरकार उन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देती है जिनके इलाके दुर्गम होते हैं। साथ ही प्रदेश का एक खास क्षेत्र इंटरनैशनल सीमा से लगा हो। वह क्षेत्र देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। ज्यादातर पहाड़ी राज्यों को विशेष राज्य दर्जा मिला है। फिलहाल भारत में 28 राज्यों में से 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला है। इसमें पूर्वोंत्तर के लगभग सभी राज्य हैं।

विशेष राज्य का दर्जा मिलने के फायदे

केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाले पैकेज में 90 फीसदी रकम बतौर मदद मिलती है। इसमें 10 फीसदी रकम ही बतौर कर्ज होती है। केंद्र सरकार की तरफ से अन्य कई तरह की भी कई सुविधाएं मिलती हैं।

अन्य राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा

कुछ राज्यों को अपनी गैर एकरूपता, असमान विकास, आदिवासी क्षेत्रों, पिछड़ेपन और लोगों की आकांक्षाओं के कारण समान विकास, समानता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के क्रम में कुछ विशेष दर्जे की जरूरत होती है। हालांकि संविधान में क्रमिक संशोधन द्वारा ये सभी विशेष व्यवस्थाएं स्थापित की गयी हैं।

अनुच्छेद 371: महाराष्ट्र और गुजरात के लिए प्रावधान

(क) कुछ प्रावधानों के साथ विदर्भ, मराठवाड़ा और पूरे महाराष्ट्र तथा सौराष्ट्र और महाराष्ट्र तथा सौराष्ट्र, कच्छ एवं गुजरात के लिए अलग विकास बोर्ड की स्थापना करना तथा प्रत्येक बोर्ड द्वारा किये गये कार्यों की रिपोर्ट को प्रत्येक वर्ष राज्य विधानसभा में प्रस्तुत करना।

 

(ख) एक राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप राज्य द्वारा चिह्नित किये गये क्षेत्रों के विकास व्यय के लिए अवमुक्त धनराशि का न्यायसंगत आवंटन,

 

(ग) तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु एक समान व्यवस्था लागू करना और राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन सेवाओं में रोजगार के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना। उपरोक्त चिह्नित क्षेत्रों के संदर्भ में राज्य पूरी आवश्यकताओं के लिए जिम्मेदार है।

अनुच्छेद 371-: नागालैंड के लिए प्रावधान

1. (क) निम्न के संर्दभ में संसद का कोई अधिनियम लागू नहीं होगा-

(क) नागालैंड में नागाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, नागा प्रथागत कानून और प्रक्रियाओं, सिविल और आपराधिक न्याय के प्रशासन, स्वामित्व और भूमि हस्तातंरण तथा इसके स्त्रोतों पर जब तक नागालैंड की विधानसभा द्वारा लाये गये प्रस्तावों पर कोई फैसला नहीं करती, तब तक।

 

(ख) नागालैंड के राज्यपाल के पास राज्य में कानून एवं व्यवस्था के संबंध में विशेष जिम्मेदारी होगी

 

(ग) अनुदान के लिए किसी भी मांग के संबंध में राज्यपाल की सिफारिश कर सकता है। नागालैंड के राज्यपाल यह सुनिश्चत करेगें कि किसी भी विशिष्ट सेवा या प्रयोजन के लिए भारत की संचित निधि से भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली धनराशि जो अनुदान से संबंधित भी हो सकती है, का प्रयोग किसी अन्य मांग के लिए नहीं होना चाहिए बल्कि उससे संबधित प्रायोजन या सेवा के लिए ही होना चाहिए।

 

(घ) नागालैंड के राज्यपाल द्वारा इस संबंध में लोक अधिसूचना के माध्यम से पैंतीस सदस्यों से मिलकर तुएनसांग जिले के लिए एक क्षेत्रीय परिषद की स्थापना की जाएगी जिसके लिए राज्यपाल संविधान के अनुसार अपने विवेकानुसार नियम बना सकतें हैं।

अनुच्छेद 371-बी: असम के लिए प्रावधान

असम राज्य के संबंध में राष्ट्रपति एक आदेश द्वारा राज्य विधानसभा के संविधान और कार्यों के लिए एक समिति का गठन कर सकते हैं जिसमें अनुसूचित क्षेत्रों से निर्वाचित विधायक शामिल होते हैं जिसका विवरण छठी अनुसूची के पैरा 20 में संलग्न तालिका के भाग में दिया गया है। इस प्रकार विधानसभा के अन्य सदस्यों का विवरण भी आदेश में हो सकता है। राज्य में नियम कानूनों में संशोधनों के लिए विधानसभा समुचित कार्य कर सकती है।

अनुच्छेद 371-सी: मणिपुर के लिए प्रावधान

1- मणिपुर राज्य के संबंध में राष्ट्रपति एक आदेश द्वारा राज्य विधानसभा के संविधान और कार्यों के लिए एक समिति का गठन कर सकते हैं जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों से निर्वाचित विधायक शामिल होते हैं। सरकार के कार्यों के नियमों में संशोधनों और राज्य विधानसभा की नियम प्रक्रिया से संबंधित नियमों में इस तरह की समिति के कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी विशेष रूप से राज्यपाल के पास होती है।

2- राज्यपाल, राष्ट्रपति को वार्षिक रूप में या जब भी आवश्यक हो, मणिपुर राज्य में पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगें। और कार्यकारी शक्ति के रूप में केंद्र चिह्नित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए राज्य को दिशा निर्देश देंगे।

अनुच्छेद 371-डी: आंध्र प्रदेश के लिए प्रावधान

1.  आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में राष्ट्रपति, सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा, तथा विभिन्न प्रावधानों के मामले में राज्य के विभिन्न भागों से संबंधित लोगों के लिए समान अवसर और सुविधाएं प्रदान करने का आदेश जारी कर सकते हैं तथा राज्य के विभिन्न भागों के लिए अलग प्रावधानों का भी निर्माण कर सकते हैं

2. एक विशेष रूप में भी आदेश हो सकता है, -

(क) सिविल सेवा या सिविल पदों में किसी भी वर्ग या वर्गों के लिए पदों का सृजन करना राज्य सरकार की आवश्यकता होती है, राज्य के विभिन्न भागों के लिए अलग- अलग स्थानीय कॉडर तय किये गये हैं और उसके अनुसार सिद्वांतों और व्यवस्था को निर्धारित किया जाता है।

3. राष्ट्रपति, आदेश द्वारा आंध्र प्रदेश को अधिकार क्षेत्र, शक्तियों और अधिकारों का प्रयोग करने के लिए एक प्रशासनिक न्यायाधिकरण उपलब्ध करा सकते हैं।

अनुच्छेद 371 : आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना  करना।

संसद कानून द्वारा आंध्र प्रदेश राज्य में एक विश्वविद्यालय की स्थापना कर सकती है।

अनुच्छेद 371-एफ: सिक्किम के लिए प्रावधान

(क) सिक्किम राज्य की विधान सभा कम से कम तीस सदस्यों से मिलकर बनेगी;

(ख) संविधान अधिनियम, 1975 (36 वां संशोधन) के प्रारंभ होने की तिथि से ही (इसके बाद इस अनुच्छेद को नियुक्ति दिन जाना जाएगा)

अनुच्छेद 371-जी: मिजोरम के लिए प्रावधान

(क) निम्न के संबंध में संसद का कोई अधिनियम लागू नहीं होगा-

(i) मिजो के धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं,

 

(ii) मिजो के प्रथागत कानून और प्रक्रिया,

 

(iii) सिविल और आपराधिक न्याय के प्रशासन में निर्णय मिजो प्रथागत कानून के अनुसार होंगे।

 

(iv) भूमि के स्वामित्व और हस्तांतरण मिजोरम राज्य में तभी लागू होगा जब तक मिजोरम की विधानसभा इस पर कोई फैसला नहीं ले लेती है:

(ख) मिजोरम की राज्य विधान सभा कम से कम चालीस सदस्यों से मिलकर बनेगी।

अनुच्छेद 371-एच: अरुणाचल प्रदेश के लिए प्रावधान

(क) अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के पास अरुणाचल प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था के संबंध में विशेष जिम्मेदारी होगी और मंत्रियों की परिषद से परामर्श करने के बाद वह इस संबंध में अपने कार्यों का निर्वहन करेगा।

(ख) अरुणाचल प्रदेश के राज्य की विधान सभा कम से कम तीस सदस्यों से मिलकर बनेगी।

अनुच्छेद 371-आई: गोवा के लिए प्रावधान

गोवा राज्य की विधान सभा कम से कम तीस सदस्यों से मिलकर बनेगी

अनुच्छेद 371-जे: कर्नाटक के लिए प्रावधान

1. राष्ट्रपति, कर्नाटक राज्य के संबंध अपने आदेश द्वारा राज्यपाल को निम्न के संबंध में विशेष जिम्मेदारी प्रदान सकते हैं-

(क) हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए एक अलग विकास बोर्ड की स्थापना

(ख) चिह्नित क्षेत्रों के विकास लिए आबंटित धन का न्यायसंगत वितरण,

(ग) सार्वजनिक रोजगार, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण से संबंधित मामलों में चिह्नित क्षेत्रों के लिए के समान अवसर और सुविधाएं प्रदान करना।

2. खंड (1) के उपखंड () के तहत निम्नलिखित बिंदुओं के एक आदेश कर सकता है:

(क) जो छात्र जन्म या अधिवास से ही उस क्षेत्र के हैं उन छात्रों के लिए हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के शैक्षिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सीटों के अनुपात में आरक्षण;  और

(ख) हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में राज्य सरकार के नियंत्रण या किसी निकाय या संगठन जो राज्य सरकार के अधीन में है और वहां पदों और वर्गों की पहचान करना औऱ ऐसे पदों पर जन्म या अधिवास के आधार पर, जो वहां से संबंध रखते हैं उनकी एक अनुपात में आरक्षण और नियुक्ति करना। जिसे सीधी भर्ती या पदोन्नति द्वारा एक प्रक्रिया के तहत निर्दिष्ट किया सकता है।