उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह भारत का 7.77 फीसदी हिस्सा है। साथ ही, यह सबसे अधिक जिले वाला राज्य भी है, जिसके प्रत्येक जिले की अपनी विशेषता है।
आपने प्रदेश में अवध के बारे में जरूर पढ़ा या सुना होगा और बात जब अवध की हो रही है, तो यहां के नवाबों को कैसे भूला जा सकता है। यहां के नवाब अपने शाही अंदाज के लिए विश्व विख्यात थे। ऐसे में इस लेख के माध्यम से हम अवध में नवाबों के पतन के बारे में जानेंगे।
क्या है अवध
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर अवध क्या है। आपको बता दें कि मुगल शासन में अवध एक सूबा हुआ करता था। मुगल शासक मुहम्मद शाह द्वारा 1722 में सादत खान को अवध का गर्वनर नियुक्त किया गया था।
सादत खान ने 1723 में कर की नई प्रणाली की शुरुआत की और किसानों को राहत प्रदान की। साथ ही उन्होंने 1739 में नादिर शाह को भारत में आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, सादत खान नादिर से किया हुआ वादा निभाने में असफल रहे और उन्होंने आत्महत्या कर ली।
सफदरजंग बना नया नवाब
सादत खान की मौत के बाद सफदरजंग नया नवाब बना। साथ ही वह मुगल दरबार में वजीर के पद पर भी था। वर्तमान का प्रयागराज उस समय सादत खान के अधीन था।
शुजाउदौला बना नया नवाब
सादत खान की मृत्यु 1754 में हुई, जिसके बाद शुजाउदौला नया नवाब बना। खान ने शाह आलम-2 और बंगाल के नवाब मीर कासिम के साथ मिलकर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ पैक्ट साइन किया।
1764 में हुआ बक्सर का युद्ध
ईस्ट कंपनी को इस पैक्ट के काफी नाराज हुए और शुजाउदौला, कासिम और शाह आलम-2 के खिलाफ 1764 का बक्सर का युद्ध हुआ, जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनी जीत गई। साथ ही, शुजाउदौला को उनका साम्राज्य वापस मिला गया। हालांकि, इसके लिए उन्हें 50 लाख रुपये ब्रिटिश कंपनी को देने पड़े।
असफुदुल्लाह बने नवाब
शुजाउदौला के बाद अवध के नवाब असफदुल्लाह बने और उन्होंने फैजाबाद से लखनऊ राजधानी स्थानांतरित कर दी।
अवध के अंतिम नवाब
अवध के अंतिम नवाब की बात करें, तो यह वह वाजिद अली शाह थे। 1857 की क्रांति हुई और अवध अंग्रेजों के अधिकार क्षेत्र में आ गया।
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