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Kalki Dham: क्यों खास है कल्कि धाम मंदिर, यहां जानें 10 महत्वपूर्ण तथ्य

Last Updated: Feb 19, 2024, 14:15 IST

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कल्कि धाम मंदिर का शिलान्यास किया गया है। अयोध्या के श्रीराम मंदिर के बाद यह मंदिर अधिक चर्चाओं में रहा है। ऐसे में इस लेख के माध्यम से हम कल्कि धाम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे। 

कल्कि धाम मंदिर
कल्कि धाम मंदिर

बीते दिनों अयोध्या के श्रीराम मंदिर चर्चाओं में रहा था, जिसका 22 जनवरी, 2024 को उद्घाटन किया गया था। इसके बाद अब उत्तर प्रदेश के एक और जिले का मंदिर चर्चाओं में आ गया है, जो कि संभल जिले में है। इस मंदिर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया है, जिसे कल्कि धाम मंदिर नाम से जाना जाता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आखिर संभल का कल्कि धाम मंदिर क्यों खास है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम कल्कि धाम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे।

 

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-सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि संभल जिले में कल्कि धाम मंदिर किस इलाके में बनने जा रहा है, तो आपको बता दें कि इस मंदिर का निर्माण एंकरा कबोह इलाके में होगा। 

-मंदिर के शिखर की ऊंचाई 108 फीट होगी और 11 फीट के ऊपर मंदिर का चबूतरा बनेगा। 

-कल्कि धाम मंदिर का निर्माण उन पत्थरों से किया जाएगा, जिनसे सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ है। 

-कल्कि भगवान विष्णु के 10वें के रूप में मान गए हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, पृथ्वी पर जब  कलयुग अंतिम समय पर होगा, तब भगवान विष्णु कल्कि का अवतार लेंगे और कलयुग का अंत करेंगे।

-कल्कि धाम के प्राचीन मंदिर के पास कल्कि पीठ में एक सफेद घोड़े की प्रतीमा भी लगी हुई है। दरअसल, ऐसी मान्यता है कि जब कल्कि अवतार लेंगे, तो वह सफेद घोड़े पर सवार होंगे। इस सफेद घोड़े की प्रतिमा के तीन पैर जमीन पर हैं, तो एक पैर हवा में है। ऐसी मान्यता है कि जब घोड़े का चौथा पैर जमीन पर होगा, तब माना जाएगा कि कल्कि ने अवतार ले लिया है। 

-मंदिर का निर्माण भव्य रूप से किया जाएगा, जिसके लिए पांच एकड़ का स्थान निर्धारित किया गया है। इस बड़े परिसर को भविष्य में आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए बनाया जा रहा है। 

-कल्कि धाम मंदिर के निर्माण में किसी भी प्रकार का लोहा या स्टील नहीं लगा होगा। इस मंदिर का निर्माण भी इंटरलॉकिंग पद्धति पर किया जाएगा, जो कि भारत में मंदिर निर्माण की पुरानी शैली है। 

-मंदिर का निर्माण पूरा होने की समय-सीमा अगले पांच वर्षों तक तय की गई है, जिसके बाद भव्य मंदिर में श्रद्धालु आ सकेंगे। 

-मंदिर में 10 गर्भगृहों का निर्माण किया जाएगा, जो कि भगवान विष्णु के 10 अवतार को दर्शाएंगे। 

-मंदिर में 68 तीर्थों की भी स्थापना होगी। वहीं, एक विग्रह भी स्थापित होंगे, जबकि पुराना कल्कि पीठ यथावत ही रहेगा।

भगवान विष्णु के 10 अवतार

 

-मत्स्य अवतार

-कूर्म अवतार

-वराह अवतार

-भगवान नृसिंह

-वामन अवतार

-श्रीराम अवतार

-श्रीकृष्ण अवतार

-परशुराम अवतार

-बुद्ध अवतार

-कल्कि अवतार

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Feb 19, 2024, 14:14 IST

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