भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी विशेषता है। खास बात यह है कि विशेषताओं की वजह से कुछ राज्यों को उनके मूल नाम के अलावा एक उपनाम भी मिला हुआ है। इन्हीं में भारत में एक ऐसा राज्य भी शामिल है, जिसे ‘वीरों की भूमि’ भी कहा जाता है। क्या आपने कभी ऐसे राज्य के बारे में पढ़ा या सुना है। यदि आप इस राज्य के बारे में नहीं जानते हैं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
किस राज्य को कहा जाता है ‘वीरों की भूमि’
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर किस राज्य को ‘वीरों की भूमि’ भी कहा जाता है। आपको बता दें कि भारत के उत्तर में स्थित हिमाचल प्रदेश राज्य को ‘वीरों की भूमि’ भी कहा जाता है।
क्यों कहा जाता है ‘वीरों की भूमि’
हिमाचल प्रदेश राज्य को ‘वीरों की भूमि’ कहने के पीछे यहां के लोगों का बलिदान और भारतीय सेना में उनका योगदान मुख्य कारण है। आइए इसे विस्तार से समझते हैंः
भारत का पहला परमवीर चक्र
आपको बता दें कि भारत में पहला परमवीर चक्र(मरणोप्रांत) हिमाचल प्रदेश के मेजर सोमनाथ शर्मा को ही मिला था। वहीं, कारगिल युद्ध के नायक रहे कैप्टन विक्रम बत्रा और सूबेदार संजय कुमार भी हिमाचल प्रदेश से ही हैं।
भारतीय सेना में भर्ती होने का जज्बा
हिमाचल प्रदेश में हर तीसरे या चौथे परिवार में एक सदस्य भारतीय सेना में शामिल है। यहां के लोगों की भारतीय सेना में एक बड़ी हिस्सेदारी है। प्रदेश में कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर जैसे प्रमुख सेना भर्ती केंद्र जाने जाते हैं।
लद्दाख स्काउट्स और डोगरा रेजिमेंट में मांग
हिमाचल प्रदेश के लोग बचपन से ही दुर्गम पहाड़ों और कड़कड़ाती ठंड के बीच पलते हैं। ऐसे में ये अधिक साहसी बनते हैं। इस वजह से हिमाचल के लोगों की मांग ‘लद्दाख स्काउट्स’ से लेकर ‘डोगरा रेजिमेंट’ में होती है। ये दोनों ही कठिन पोस्टिंग वाली बटालियन मानी जाती हैं। बीते कुछ वर्षों में पंजाब रेजिमेंट की तर्ज पर हिमाचल रेजिमेंट की मांग उठती रही है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश के सैनिकों की भर्ती ‘गोरखा’, ‘लद्दाख स्काउट्स’ और ‘डोगरा रेजिमेंट’ में ही की जाती है।
चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध में रहे आगे
भारत के 1962 में चीन के साथ युद्ध की बात करें या फिर 1965 और 1971 वाले भारत-पाक युद्ध की बात करें, सभी युद्धों में हिमाचल प्रदेश के जवान सबसे आगे रहे हैं। 1999 के कारगिल युद्ध में करीब 10 फीसदी जवान हिमाचल प्रदेश से ही शहीद हुए थे।
यही वजह है कि ‘देव भूमि’ कहे जाने वाले इस राज्य को ‘वीरों की भूमि’ भी कहा जाता है। आज भी भारतीय सशस्त्र सेनाओं से लेकर केंद्रीय पुलिस बलों में हिमाचल प्रदेश के जवानों मौजूदगी अधिक देखने को मिलेगी।
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