भारत का सबसे बड़ा रेल पहिया कारखाना कौन-सा है, जानें यहां
भारत में रेल पहिया कारखाने में ट्रेन के लिए पहियों का निर्माण किया जाता है। फैक्ट्री में लोहे को पिघालकर पहिये का आकार दिया जाता है। इस लेख में हम भारत की सबसे बड़ी रेल पहिये फैक्ट्री के बारे में जानेंगे।
भारतीय रेल को देश की लाइफलाइन कहा जाता है। यह पटरियों पर दौड़ने के साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार दे रही है। रफ्तार देने में इसके पहियों का अहम किरदार है। रेल पहियों का निर्माण देश की अलग-अलग फैक्ट्रियों में किया जाता है। हालांकि, यदि सबसे बड़ी रेल पहिया फैक्ट्री की बात करें, तो यह बेला रेल पहिया कारखाना है। यह कारखाना बिहार के छपरा जिले के बेला नामक स्थान पर है। भारतयी रेल को पहियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में इस फैक्ट्री का अहम योगदान है।
कब हुई थी फैक्ट्री की स्थापना
बेला कारखाने की योजना 2008 में बनाई गई थी, जिससे विदेशों से पहिया आयात करने के बजाय देश में ही पहियों का निर्माण किया जा सके। इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ 2014 तक यहां उत्पादन शुरू हो गया था। फैक्ट्री के निर्माण में 1417 करोड़ रुपये का लागत आई थी।
फैक्ट्री में होता है विनिर्माण तकनीक का उपयोग
बेला प्लांट में विशेष रूप से विनिर्माण तकनीक का उपयोग किया जाता है।
-प्लांट में पहिये बनाने के लिए रेलवे के पुराने कबाड़ का ही इस्तेमाल किया जाता है।
-फैक्ट्री में बड़ी-बड़ी इलेक्ट्रिक भट्टियां लगी हुई हैं, जिसमें 1600 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में लोहे को पिघलाया जाता है।
-लोहे को पिघालने के बाद इसे ग्रेफाइट सांचों में डाला जाता है, जिसके बाद कंट्रोल प्रेशर पोरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित किया जाता है कि पहिये के अंदर किसी प्रकार का बुलबुला या हवा न रह जाए।
-गर्म और भारी पहियों का एक से दूसरी जगह ले जाने के लिए रोबोटिक आर्म्स का प्रयोग होता है, जिससे जान-माल का नुकसान न हो।
कितना होता है पहियों का निर्माण
फैक्ट्री में वार्षिक तौर पर 1 लाख पहिये बनाने की क्षमता है। यहां मालगाड़ी से लेकर पैसेंजर ट्रेनों के पहियों का निर्माण किया जाता है।
पहियों की होती है अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग
रेलवे के पहिये भारी-भरकम टनों वजन उठाते हैं और 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार तक दौड़ते हैं। ऐसे में इन पहियों के निर्माण के समय अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग की जाती है, जिसमें पहिये के अंदर किसी भी प्रकार का छेद या क्रैक देखा जाता है। इस तकनीक में साउंड वेव्स का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, पहिये की बाहरी सतह पर क्रैक्स का पता लगाने के लिए चुंबकीय पाउर का प्रयोग होता है।
परीक्षा के लिए क्यों जरूरी?
कई बार रेलवे समेत अन्य राज्य व केंद्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में रेलवे व इससे जुड़े कारखानों के बारे में पूछ लिया जाता है। ऐसे में इस लेख में भारतीय रेल के सबसे बड़े रेल कारखाने के बारे में जानकारी दी गई है।
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