उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक गीत कौन-से हैं, जानें
उत्तर प्रदेश वास्तव में एक खजाने के रूप में है, जहां प्रत्येक जिले में अद्वितीय संगीत परंपराएं हैं। यहां के लोकगीतों ने सामूहिक जीवन और सामूहिक श्रम को और अधिक आनंददायक बनाने काम किया है। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से हस्तांतरित होते रहे हैं। इस लेख में हम उत्तर प्रदेश के लोक गीतों की सूची दे रहे हैं, जो यूपीएससी-प्रीलिम्स, एसएससी, राज्य सेवा, एनडीए, सीडीएस और रेलवे आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है।
पारंपरिक लोक संगीत को कई तरीकों से परिभाषित किया गया है।इसकी तुलना व्यावसायिक और शास्त्रीय शैलियों से की गई है। उत्तर प्रदेश वास्तव में एक खजाना है, जहां प्रत्येक जिले में अद्वितीय संगीत परंपराएं हैं। इस राज्य को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के ' पुबैया आंग' का गढ़ माना जाता है ।
महात्मा गांधी (राष्ट्रपिता) के अनुसार, "लोक संगीत में, पृथ्वी गाती है, पहाड़ गाते हैं, नदियां बहती हैं और फसलें गाती हैं।"
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उत्तर प्रदेश का लोक गीत हर मूड और हर अवसर के लिए गीत है। लोकगीतों ने सामूहिक जीवन और सामूहिक श्रम को और अधिक आनंददायक बनाने काम किया है। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से हस्तांतरित होते रहे हैं।
इस लेख के माध्यम से हमने उत्तर प्रदेश के कुछ प्रमुख लोक गीतों के बारे में जानकारी दी है, जो कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए उपयोगी है। साथ ही इस लेख से उन लोगों की भी जानाकरी बढ़ेगी, जो कि सामान्य अध्ययन विषय में रूचि रखते हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक गीत
सोहर
यह वह रूप है, जो जीवन-चक्र के प्रदर्शन का हिस्सा है। इसे बच्चे के जन्म का जश्न मनाने के लिए गाए जाने वाले एक रूप के रूप में वर्णित किया गया है।
कहरवा
यह कहार जाति द्वारा विवाह के समय गाया जाता है।
चनैनी
एक प्रकार का नृत्य संगीत है।
नौका झक्कड़
यह नाई समुदाय में बहुत लोकप्रिय है और नाई का गीत माना जाता है।

बंजारा और जावा
संगीत की इस विधा को तेली समुदाय के लोग रात के समय गाते हैं।
कजली या कजरी
यह सावन के महीने में महिलाओं द्वारा गाया जाता है। यह अर्ध-शास्त्रीय गायन के रूप में भी विकसित हुआ और इसकी गायन शैली बनारस घराने से निकटता से जुड़ी हुई है।
जरेवा और सदावजरा सारंगा
संगीत का यह रूप लोक-पत्थरों के लिए गाया जाता है।
इन लोक गीतों के अलावा, गज़ल और ठुमरी (अर्ध-शास्त्रीय संगीत का एक रूप, जो कभी शाही दरबार तक ही सीमित था) अवध क्षेत्र में काफी लोकप्रिय रहे हैं और कव्वाली (सूफी कविता का एक रूप, जो भजनों से विकसित हुई) भी काफी लोकप्रिय रही हैं।
ब्रज क्षेत्र के प्रमुख लोक गीत
ब्रज क्षेत्र के प्रमुख लोक गीतों की बात करें, तो झूला, होरी, फाग, लंगुरिया और रसिया ब्रज क्षेत्र के प्रमुख लोक गीत हैं।
बुंदेलखंड के प्रमुख लोक गीत
यदि बुंदेलखंड के प्रमुख लोक गीतों की बात करें, तो हरदौल, पंवारा, ईसुरी फाग और आल्हा यहां के प्रमुख लोक गीत हैं।
पूर्वांचल के प्रमुख लोक गीत
पूर्वांचल के प्रमुख लोक गीतों की बात करें, तो कजरी, झूमर, झूला, बिरहा और सोहर यहां के प्रमुख लोक गीत हैं।
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