धरती की तरफ तेजी से एक विशालकाय उल्कापिंड बढ़ रहा है। इसकी रफ्तार 50,400 किमी प्रतिघंटा है, जो कि तेजी से अपनी दूरी तय करते हुए एक निश्चित दिशा में बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने इस उल्कापिंड को 2003 MH4 नाम दिया है, जो कि आकार में फुटबॉल के तीन बड़े मैदान जितना है।
खास बात यह है कि यह 24 मई, 2025 को धरती के करीब होगा। ऐसे में नासा की ओर से इस उल्कापिंड पर कड़ी नजर रखी जा रही है, जिससे इससे किसी भी प्रकार नुकसान न हो।
रफ्तार है बहुत अधिक
धरती के पास से गुजरने वाला उल्कापिंड 50,400 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। इसे इस तरह समझ सकते हैं कि यह दिल्ली से मुंबई की कुल 1500 किलोमीटर की दूरी एक मिनट से कम समय में पूरी कर लेगा।
धरती से कितनी दूरी से गुजरेगा उल्कापिंड
यह उल्कापिंड धरती से करीब 11.8 मिलियन किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। आम दुनिया में यह दूरी बहुत अधिक है, लेकिन यूनिवर्स के तौर पर देखें, तो यह दूरी कम है। आप इस तरह समझ सकते हैं कि यह चांद और धरती के बीच दूरी के करीब 17 गुना करीब है।
क्यों मॉनिटर कर रहा है नासा
नासा इस उल्कापिंड को लगातार मॉनिटर कर रहा है। क्योंकि, नासा की ओर से ऐसे उल्कापिंड, जिनका साइज 150 मीटर या इससे अधिक और धरती के 7.5 मिलियन किलोमीटर के दायरे में आते हैं, उन्हें गंभीर उल्कापिंड माना जाता है।
क्या इस उल्कापिंड से है कोई नुकसान
नासा द्वारा इस उल्कापिंड को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। हालांकि, इस उल्कापिंड से कोई नुकसान नहीं है। नासा द्वारा इसकी गति और दिशा, दोनों की मॉनिटरिंग की जा रही है। क्योंकि, उल्कापिंड की गति और दिशा में मामूली बदलाव भी एक बड़ी घटना को जन्म दे सकता है।
क्या धरती पर मौजूद है कोई उल्कापिंड
धरती पर सबसे बड़ा उल्कापिंड मौजूद है, जिसे होबा उल्कापिंड के नाम से जाना जाता है। यह उल्कापिंड करीब 80 हजार साल पुराना बताया जाता है, जो कि अफ्रीकी देश नामीबिया में है। कहा जाता है कि यह उल्कापिंड एक किसान को खेत में हल चलाते हुए मिला था। जब जमीन की खुदाई करवाई गई, तो धातु से मिश्रित उल्कापिंड निकला था। आज भी लोग इस उल्कापिंड को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं। इस उल्कापिंड का वजन करीब 30 टन है। यहां जहां गिरा था, आज भी उसी स्थान पर मौजूद है।
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