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T.N. शेषन: भारत में चुनाव सुधार के सूत्रधार

Last Updated: Nov 11, 2019, 11:15 IST

टी. एन. शेषन लोकप्रिय रूप से भारत में चुनाव सुधारों के सूत्रधार के रूप में जाने जाते हैं. टी. एन. शेषन 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयोग थे. उनका जन्म 15 दिसंबर 1932 को पलक्कड़, मद्रास प्रेसिडेंसी, ब्रिटिश इंडिया (अब केरल, भारत) में हुआ था और 10 नवंबर 2019 को कार्डियक अरेस्ट से उनकी मृत्यु हो गई है.

T.N. Seshan
T.N. Seshan

पूरा नाम: तिरुनेलई नारायण अय्यर शेषन
जन्म तिथि और स्थान: 15 दिसंबर 1932, केरल

मृत्यु: 10 नवम्बर, 2019, चेन्नई 
शिक्षा: मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से भौतिकी में स्नातक और 1968 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से सार्वजनिक प्रशासन में मास्टर डिग्री

व्यवसाय: भारतीय प्रशासनिक सेवा (1955 बैच), भारत के 18 वें कैबिनेट सचिव (मार्च 1989 -दिसंबर 1989)

मुख्य प्रसिद्धि: 10 वें चुनाव आयुक्त (12 दिसंबर 1990 - 11 दिसंबर 1996) के रूप में भारत में चुनाव सुधार लागू किये

पुरस्कार: 1996 में सरकारी सेवा के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार

वर्तमान में: टी. एन. शेषन एक वृद्ध आश्रम में अपनी पत्नी के साथ रह रहे हैं कुछ लोगों ने उनकी मौत की झूठी ख़बरें भी उड़ाईं थीं लेकिन वे अभी भी स्वस्थ हैं. ईश्वर उन्हें दीर्घायु प्रदान करे.

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टी. एन. शेषन के बारे में;
टी. एन. शेषन को भारत में चुनाव सुधारों के जनक के रूप में जाना जाता है. उन्होंने 12 दिसंबर 1990 को 10 वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में शपथ ली और 11 दिसंबर 1996 तक सेवा की. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के 5 प्रधानमंत्री देखे थे.

यह वह समय था जब चुनाव आयोग को बहुत ही कम लोग जानते थे और लोकतंत्र का त्यौहार अर्थात “चुनाव” कुछ बड़े नेताओं के रहमो-करम के अनुसार कराये जाते थे.

लेकिन 1990 में टी. एन. शेषन के आते ही सब कुछ बदल गया और टी. एन. शेषन ने सभी को बताया कि चुनाव आयोग भी कोई संवैधानिक संस्था है और इसके पास कुछ अधिकार भी होते हैं.

उन्होंने भारत में कई चुनाव सुधारों का प्रस्ताव रखा और राजनीतिक दलों को कानून का सख्ती से पालन करने की चेतावनी देते हुए "Nobody dared to violate the law." का नारा दिया था.

इस नारे को कई राजनीतिक दलों द्वारा पसंद नहीं किया गया और हर कोई उसके खिलाफ खड़ा हो गया, बाद में यह स्थिति "शेषन बनाम नेशन" जैसी हो गई थी.

लेकिन बाद में देश में चुनाव सुधार लागू हुए और देश में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई नए सुधारों को लागू  किया गया था.

टी. एन. शेषन द्वारा शुरू किए गए प्रमुख चुनाव सुधार इस प्रकार हैं;

1. सभी पात्र मतदाताओं के लिए मतदाता पहचान पत्र का वितरण

2. चुनाव आचार संहिता के पालन के लिए सख्त कार्रवाई

3. चुनाव में उम्मीदवारों के लिए व्यय सीमा निर्धारित करना

4. चुनाव के दौरान शराब / पैसे के वितरण पर प्रतिबंध

5. मतदाताओं को घूस देना या डराना

6. चुनाव प्रचार के लिए आधिकारिक मशीनरी का उपयोग. लेकिन दुर्भाग्य से इस पर अभी रोक नहीं लगी है.

7. चुनाव प्रक्रिया में कानून का क्रियान्वयन

8. भारत के चुनाव आयोग को स्वायत्त दर्जा

9. पूर्व लिखित अनुमति के बिना लाउडस्पीकर और ऊंची आवाज के संगीत पर प्रतिबंध

10. जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर वोट मांगने पर प्रतिबंधित

11. चुनाव अभियानों के लिए धार्मिक स्थान के उपयोग पर प्रतिबंध

यदि श्री टी.एन. शेषन को भारत में चुनाव सुधार के पितामह का दर्जा दिया जाये तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. उन्होंने भारतीय राजनीति को स्वच्छ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण चुनाव सुधारों को लागू किया था. लेकिन दुर्भाग्य से राजनीतिक दलों की अनिच्छा के कारण भारतीय राजनीति पर अभी भी समृद्ध लोग हावी है और अब भारतीय राजनीति “3M” के आधार पर चलायी जाती है,ये हैं, मनी, मसल्स और माइंड.

वर्तमान समय में भी चुनाव आयोग जिस तरह से काम कर रहा है इससे भी लोगों के मन में चुनाव आयोग के प्रति रोष की भावना बढ़ रही है और लोग टी.एन. शेषन को याद करते हुए कहते हैं कि काश वो फिर से मुख्य चुनाव आयुक्त बन जाएँ.

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Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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First Published: Nov 11, 2019, 10:58 IST

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